Top 5 This Week

Related Posts

जन्म के समय त्वचा पर निशान क्यों होते हैं? जानें कारण, प्रकार और उपचार

Birthmark: क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोगों के शरीर पर जन्म से ही विशिष्ट निशान, तिल या रंगीन धब्बे क्यों होते हैं? कुछ लोगों के चेहरे पर तिल दिखाई देता है, तो किसी की गर्दन या हाथ पर लाल अथवा भूरे रंग का निशान। कुछ इन्हें भाग्य का संकेत मानते हैं, तो कुछ सौंदर्य की पहचान। वास्तव में ये निशान बर्थमार्क कहलाते हैं और लगभग प्रत्येक व्यक्ति के शरीर पर कहीं न कहीं अवश्य होते हैं।

बर्थमार्क क्या होते हैं?

बर्थमार्क त्वचा पर दिखाई देने वाला एक विशिष्ट निशान है जो जन्म के समय से ही विद्यमान रहता है। यह सामान्य त्वचा से भिन्न दिखाई देता है। कई बार यह निशान जन्म के कुछ समय पश्चात भी उभर आते हैं। बर्थमार्क विभिन्न रंग, आकार और बनावट के हो सकते हैं। कुछ निशान आयु बढ़ने के साथ धीरे-धीरे हल्के हो जाते हैं, जबकि अनेक पूरे जीवनकाल तक बने रहते हैं।

अधिकांश बर्थमार्क हानिकारक नहीं होते और न ही इनमें पीड़ा होती है। परंतु कुछ विशेष प्रकार के बर्थमार्क, विशेषकर कुछ जन्मजात तिल (कंजेनिटल नेवी), भविष्य में त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए इन पर नियमित निगरानी रखना आवश्यक है।

बर्थमार्क के प्रमुख प्रकार

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार बर्थमार्क मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किए जाते हैं:

  • वैस्कुलर बर्थमार्क – ये रक्त वाहिकाओं से संबंधित होते हैं। इन निशानों का रंग आमतौर पर लाल, गुलाबी या बैंगनी होता है। इनमें स्ट्रॉबेरी हेमांजियोमा, पोर्ट-वाइन स्टेन और सैल्मन पैच शामिल हैं। कुछ वैस्कुलर बर्थमार्क समय के साथ स्वतः गायब हो जाते हैं।

  • पिगमेंटेड बर्थमार्क – ये त्वचा की रंगद्रव्य कोशिकाओं (मेलानोसाइट्स) के संचय से बनते हैं। इनका रंग भूरा, काला या नीला हो सकता. है। मोल्स (तिल), कैफे-ऑ-ले स्पॉट्स और मंगोलियन स्पॉट्स इसी श्रेणी में आते हैं।

बर्थमार्क बनने के कारण

Birthmark on the cheek of a boy
Birthmark on the cheek of a boy

बर्थमार्क बनने का कोई एक निश्चित कारण अभी तक चिकित्सा विज्ञान में स्थापित नहीं हो पाया है। हालांकि चिकित्सकों के अनुसार कुछ विशिष्ट परिस्थितियां हैं जिनमें त्वचा पर बर्थमार्क विकसित होते हैं:

  1. रक्त वाहिकाओं का असामान्य विकास – गर्भ में शिशु के विकास के दौरान रक्त नलिकाओं का उचित रूप से निर्माण न हो पाना।

  2. मेलानिन कोशिकाओं का संकेंद्रण – त्वचा को रंग प्रदान करने वाली कोशिकाओं का एक स्थान पर जमा हो जाना।

  3. आनुवंशिक कारक – जीन्स में उत्परिवर्तन या वंशानुगत विशेषताएं।

  4. चिकित्सीय स्थितियां – विशेष रोग जैसे नेवस सेबेसियस सिंड्रोम या न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस।

कब बन जाते हैं खतरनाक?

यद्यपि अधिकतर बर्थमार्क निरापद होते हैं, किंतु कुछ परिस्थितियों में इन पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। यदि किसी बर्थमार्क में निम्नलिखित परिवर्तन दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए:

  • न निशान के रंग, आकार या बनावट में अचानक परिवर्तन।

  • खुजली, पीड़ा या रक्तस्राव की समस्या।

  • निशान के किनारों का असमान होना।

  • निशान का तेजी से बढ़ना।

  • निशान का उभरना या कठोर होना।

बर्थमार्क हटाने के उपचार विकल्प

चिकित्सक कुछ विशेष परिस्थितियों में बर्थमार्क हटाने की सलाह देते हैं, विशेषकर तब जब त्वचा कैंसर का जोखिम हो या निशान किसी शारीरिक कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा हो।

बर्थमार्क हटाने की चिकित्सीय विधियां:

  • क्रायोथेरेपी: अत्यधिक निम्न तापमान का उपयोग करके असामान्य ऊतकों को नष्ट किया जाता है।

  • लेजर उपचार: विशिष्ट प्रकाश तरंगों द्वारा बर्थमार्क को हल्का या पूर्णतः हटाया जाता है।

  • शल्य चिकित्सा: बड़े या गहरे बर्थमार्क को सर्जरी द्वारा काटकर निकाल दिया जाता है।

  • कॉर्टिसोन इंजेक्शन: कुछ प्रकार के बर्थमार्क को सिकोड़ने के लिए स्टेरॉयड इंजेक्शन दिए जाते हैं।

Birthmark: सावधानियां और देखभाल

बर्थमार्क वाली त्वचा की विशेष देखभाल आवश्यक है। सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाव के लिए सनस्क्रीन का नियमित उपयोग करें। निशान को खरोंचने या रगड़ने से बचें। किसी भी परिवर्तन पर तुरंत चिकित्सक को सूचित करें।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और इसे पेशेवर चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए सदैव त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles