Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची में परिवहन विभाग ने सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़ा अभियान चलाया। कांटाटोली स्थित खादगढ़ा बस स्टैंड पर स्लीपर बसों की विशेष जांच की गई। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के संचालकों पर सख्ती बरती गई और उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अनियमितताओं को तुरंत ठीक किया जाए अन्यथा कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यह अभियान यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए चलाया गया।
21 बसों का हुआ विस्तृत निरीक्षण
जांच अभियान के क्रम में कुल 21 स्लीपर बसों का गहन निरीक्षण किया गया। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान यानी सीआईआरटी द्वारा स्लीपर बसों के संबंध में जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन न करने पर संबंधित बस संचालकों को औपचारिक नोटिस जारी किए गए। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि चेसिस में अनधिकृत एक्सटेंशन लगाकर बनाई गई बस बॉडी को तत्काल संचालन से हटाया जाएगा।
उप परिवहन आयुक्त सह सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल रांची हरविंश पंडित, मोटरयान निरीक्षक रांची विमल किशोर सिंह तथा जिला परिवहन पदाधिकारी रांची अखिलेश कुमार ने संयुक्त रूप से सभी स्लीपर बसों की गहन जांच की। तीनों अधिकारियों ने मिलकर प्रत्येक बस का सूक्ष्म निरीक्षण किया और कमियां चिन्हित कीं।
पंजीकरण के लिए नए सख्त नियम
परिवहन विभाग ने घोषणा की है कि अब सभी प्रकार की बसों का पंजीकरण केवल किसी अनुमोदित परीक्षण एजेंसी की मंजूरी के साथ फॉर्म 22 या 22ए के आधार पर ही किया जाएगा। हर बस के पंजीकरण के समय लेआउट ड्राइंग अनिवार्य रूप से संलग्न करनी होगी। इस ड्राइंग में बस के समस्त आयाम, दरवाजों की सटीक स्थिति, आपातकालीन निकास और छत पर बने हैच का स्पष्ट विवरण होना आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त बस बॉडी निर्माता की मान्यता की वैधता की भी कड़ाई से जांच अनिवार्य की जाएगी। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि केवल प्रमाणित और योग्य निर्माता ही बस बॉडी का निर्माण करें। अप्रमाणित निर्माताओं द्वारा बनाई गई बसें सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करतीं और दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।
चालक केबिन में पार्टीशन हटाने के निर्देश
अधिकारियों ने बताया कि स्लीपर कोचों में चालक के केबिन में लगाए गए पार्टीशन दरवाजे को तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है। यह पार्टीशन आपातकालीन स्थिति में बाधा उत्पन्न कर सकता है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरनाक है। निरीक्षण के दौरान कुछ बसों से मौके पर ही पार्टीशन हटाने को कहा गया।
जिन बस संचालकों ने तुरंत पार्टीशन हटा दिया उन्हें सराहा गया। लेकिन जिन्होंने टालमटोल की उन्हें चेतावनी दी गई कि निर्धारित समय सीमा के भीतर यह काम पूरा नहीं करने पर उनकी बसों का पंजीकरण निलंबित किया जा सकता है।
बर्थ में स्लाइडर की मनाही

सभी स्लीपर कोचों के बर्थ में लगे स्लाइडर तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। ये स्लाइडर यात्रियों की निजता के लिए लगाए जाते हैं लेकिन ये सुरक्षा दृष्टि से उचित नहीं हैं। आपातकाल में ये बाधा उत्पन्न कर सकते हैं और यात्रियों को बाहर निकलने में मुश्किल हो सकती है।
परिवहन विभाग का मानना है कि यात्रियों की निजता से अधिक महत्वपूर्ण उनकी सुरक्षा है। इसलिए सभी बस संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे इन स्लाइडरों को हटा दें। जो संचालक इस निर्देश का पालन नहीं करेंगे उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अग्नि सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य
अग्नि सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी स्लीपर बसों में एफडीएसएस यानी फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम लगाने के लिए बस संचालकों को एक माह का समय दिया गया है। यह एक अत्याधुनिक प्रणाली है जो आग का पता लगाते ही स्वचालित रूप से उसे बुझाने का काम करती है।
साथ ही सभी बसों में न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के फायर एक्सटिंग्विशर ग्रीन जोन की उपलब्धता और कार्यशीलता सुनिश्चित करने को कहा गया है। ये एक्सटिंग्विशर आपातकाल में प्रारंभिक अग्निशमन में मददगार होते हैं। अधिकारियों ने जांचा कि मौजूदा एक्सटिंग्विशर काम करने योग्य हैं या नहीं। कई बसों में पुराने और खराब एक्सटिंग्विशर मिले जिन्हें बदलने के निर्देश दिए गए।
बस मालिकों के साथ हुई बैठक
खादगढ़ा बस स्टैंड पर उपस्थित वाहन मालिकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में सीआईआरटी द्वारा जारी सभी सुझावों और निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये नियम यात्रियों की सुरक्षा के लिए हैं और इनमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
बैठक में वाहन स्वामियों ने विभागीय निर्देशों का पालन करने पर सहमति जताई और तय समय सीमा के भीतर आवश्यक बदलाव करने का आश्वासन दिया। कुछ मालिकों ने वित्तीय कठिनाइयों की बात कही लेकिन अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह अभियान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा राज्य सरकार की सड़क सुरक्षा नीतियों के अनुरूप है। इसमें यात्रियों के जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर साल देश में हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। इनमें से कई दुर्घटनाएं वाहनों की खराब स्थिति के कारण होती हैं।
स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाएं विशेष रूप से चिंताजनक हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई दुर्घटनाएं हुई हैं जिनमें दर्जनों यात्रियों की जानें गई हैं। इसलिए सरकार इन बसों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्क है।
भविष्य में भी जारी रहेंगे अभियान
परिवहन विभाग ने घोषणा की है कि भविष्य में भी ऐसे अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे। नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिन बसों में निर्धारित सुरक्षा उपकरण नहीं पाए जाएंगे उनका पंजीकरण निलंबित किया जा सकता है।
अधिकारियों ने कहा कि वे अचानक छापे भी मारेंगे ताकि बस संचालक लापरवाही न बरतें। जो संचालक गंभीरता से नियमों का पालन करेंगे उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। लेकिन जो नियमों की अनदेखी करेंगे उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
Jharkhand News: यात्रियों की भूमिका
परिवहन विभाग ने यात्रियों से भी अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहें। यदि उन्हें किसी बस में सुरक्षा संबंधी कोई कमी दिखे तो वे तुरंत परिवहन विभाग को सूचित करें। विभाग ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है जहां शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले यह सुनिश्चित करें कि बस में फायर एक्सटिंग्विशर है या नहीं। आपातकालीन निकास कहां हैं यह भी देख लें। यदि कुछ भी संदिग्ध लगे तो उस बस में यात्रा न करें।
यह अभियान दर्शाता है कि सरकार यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर है और इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है।



