Ranchi News: राजधानी रांची और आसपास के बाजारों में गैर-मौसमी सब्जियों के दामों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। परवल और सहजन (ड्रमस्टिक) जैसी पसंदीदा सब्जियां अब 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। भिंडी, करेला, नेनुआ, कटहल और हरी मिर्च भी महंगी हो गई हैं। ये सब्जियां स्थानीय स्तर पर अभी नहीं उग रही हैं, इसलिए इन्हें बंगाल, बिहार और दक्षिण भारत से मंगवाया जा रहा है। स्थानीय उत्पादन मार्च-अप्रैल में शुरू होगा। तब तक महंगाई का दौर जारी रहने की आशंका है।
रांची के मुख्य बाजारों जैसे डेली मार्केट, कांके, हटिया और कोकर में थोक और फुटकर दोनों स्तर पर दाम चढ़े हुए हैं। आम परिवारों के लिए रोजमर्रा की सब्जियां अब महंगी लग रही हैं। लोग अब सस्ती और मौसमी सब्जियों जैसे फूलगोभी, बंदागोभी, मटर, पालक, आलू और प्याज पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं।
गैर-मौसमी सब्जियों के दाम क्यों बढ़े?

थोक विक्रेता रवि कुमार ने बताया कि आपूर्ति कम होने से दाम बढ़ गए हैं। मौसम की वजह से अन्य राज्यों में भी उत्पादन प्रभावित हुआ है। ट्रांसपोर्टेशन खर्च और माल ढुलाई में देरी से लागत बढ़ गई। जब तक झारखंड में स्थानीय फसल नहीं आएगी, राहत मिलना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि अगर अगले एक महीने तक बारिश नहीं हुई तो मौसमी सब्जियां भी सस्ती बनी रहेंगी। लेकिन गैर-मौसमी सब्जियां महंगी रहेंगी।
खरीदारी करने वाली मीना देवी ने कहा, “महंगाई से घर का बजट बिगड़ रहा है। परवल और सहजन जैसी सब्जियां सप्ताह में एक-दो बार ही ले पाते हैं। बाकी दिन सस्ती सब्जियों पर गुजारा करना पड़ता है।” कई ग्राहकों ने बताया कि महंगी और सस्ती सब्जियों के बीच का फासला इतना बढ़ गया है कि खरीदारी का पैटर्न ही बदल गया है।
सब्जियों के मौजूदा भाव: महंगी और सस्ती वाली लिस्ट
यहां रांची के प्रमुख बाजारों में 7 फरवरी 2026 को दर्ज कुछ मुख्य सब्जियों के दाम दिए गए हैं (प्रति किलो):
महंगी सब्जियां (गैर-मौसमी):
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परवल: 160 से 200 रुपये
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सहजन (ड्रमस्टिक): 200 रुपये
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करेला: 80 से 100 रुपये
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नेनुआ: 60 से 70 रुपये
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कटहल: 80 से 100 रुपये
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हरी मिर्च: 150 से 200 रुपये
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मुनगा फूल: 80 से 100 रुपये
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भिंडी: 80 से 120 रुपये
सस्ती सब्जियां (मौसमी):
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मटर: 20 रुपये
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फूलगोभी: 20 से 30 रुपये
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बंदागोभी: 20 से 30 रुपये
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सेम: 20 से 30 रुपये
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आलू: 20 से 30 रुपये
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प्याज: 25 से 30 रुपये
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बींस: 50 से 60 रुपये
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पालक: 20 से 40 रुपये
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टमाटर: 30 से 50 रुपये
ये दाम बाजार के हिसाब से थोड़े-बहुत बदल सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर महंगाई का असर साफ दिख रहा है।
किसान संघ और व्यापारियों का कहना
किसान संघ के पदाधिकारी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर फसल आने पर दाम खुद-ब-खुद स्थिर हो जाएंगे। अभी बाहर से माल आने की वजह से दाम ऊंचे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी अब मौसमी सब्जियों की ओर रुख कर रहा है। इससे महंगी सब्जियों की मांग घटी है। लेकिन फिर भी कई परिवारों के लिए संतुलित आहार बनाना मुश्किल हो रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्टेशन और ईंधन के दाम बढ़ने से भी लागत बढ़ी है। रांची में सर्दी का मौसम होने से कुछ सब्जियां कम उत्पादित हो रही हैं।
Ranchi News: आम लोगों पर असर और विकल्प
रांची में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि सब्जी का खर्च पहले से दोगुना हो गया है। कई लोग अब दाल-चावल और सस्ती सब्जियों पर ज्यादा निर्भर हैं। कुछ लोग बाजार की बजाय घर के छोटे-मोटे बगीचे से सब्जियां उगा रहे हैं। लेकिन शहर में जगह कम होने से यह विकल्प सीमित है।
स्थानीय स्तर पर सब्जी उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। सरकार और कृषि विभाग को किसानों को मौसमी सब्जियों की खेती के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए। साथ ही कोल्ड स्टोरेज और बेहतर सप्लाई चेन पर काम होना चाहिए ताकि दाम स्थिर रहें।
रांची में फिलहाल महंगाई का दबाव बना हुआ है। मार्च-अप्रैल में स्थानीय फसल आने पर उम्मीद है कि दाम नीचे आएंगे। तब तक लोगों को सस्ती और मौसमी सब्जियों से काम चलाना होगा।



