रांची। झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने सोमवार को एक आपात बैठक आयोजित कर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि हाईकोर्ट के अधिवक्ता बुधवार, 12 मार्च तक चीफ जस्टिस समेत तीन न्यायाधीशों की अदालत में न्यायिक कार्य नहीं करेंगे। इस निर्णय के तहत चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस आर. मुखोपाध्याय की कोर्ट में वकीलों के बहिष्कार का ऐलान किया गया।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि झारखंड हाईकोर्ट के वकीलों को जज बनाने के लिए कोलेजियम द्वारा नाम न भेजे जाने के फैसले का कड़ा विरोध जारी रहेगा। एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के साथ अन्याय करार दिया।
इसके अलावा, एसोसिएशन ने उन 15 अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया, जिन्होंने इस बहिष्कार का उल्लंघन कर न्यायालय की कार्यवाही में हिस्सा लिया। साथ ही, इस पूरे मामले को लेकर एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर राष्ट्रपति, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, केंद्रीय कानून मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और कोलेजियम के सदस्यों से मुलाकात करेगा और अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगा।
बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता अलिनी था, अविता सिंह, मनोज कुमार मिश्रा, कातेश्वर गोपाल, विभूति शंकर सहाय, नीरज मिश्रा, देवेश कृष्णा, वंदना भारती, श्वेता सिंह, रजनीश वर्धन, पंकज कुमार, विनीत कुमार वशिष्ठ, अनुराधा सहाय, विश्वनाथ राय, सतीश कुमार, अभय तिवारी, चंदन कुमार और ओ.पी. तिवारी सहित अन्य कई अधिवक्ता मौजूद थे।
एसोसिएशन ने सभी सदस्यों से अपील की कि वे आगामी आम सभा की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर इस सामूहिक निर्णय को प्रभावी बनाएं।

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