नई दिल्ली: 26 अक्टूबर — राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का देशव्यापी “वोट चोर गड्डी छोड़” अभियान अपनी गति खोता दिख रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह मुद्दा मतदाताओं को प्रभावित करने में विफल रहा है, खासकर बिहार में, जहाँ आगामी चुनावों ने राजनीतिक संदेश को महत्वपूर्ण बना दिया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के भीतर भी इस नारे को लेकर उत्साह कम है, और कई नेता अन्य रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना पसंद कर रहे हैं।
बिहार में कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने पहले ही इस अभियान से खुद को अलग कर लिया है और सहयोगियों से इस नारे का इस्तेमाल न करने को कहा है। खबरों के अनुसार, कांग्रेस भी इसी तरह इस मुद्दे को अपने बिहार चुनाव अभियान के एजेंडे से दूर रख सकती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इसकी तुलना 2019 में “चौकीदार चोर है” जैसे पहले के असफल अभियानों और ईवीएम पर आरोपों से की जा सकती है।

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