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रांची के जवान अजय लकड़ा जम्मू-कश्मीर के डोडा में शहीद, मां की मजदूरी ने बनाया था सैनिक

Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची से एक दुखद खबर सामने आई है। धुर्वा थाना क्षेत्र के लाबेद गांव के निवासी भारतीय सेना के जवान अजय लकड़ा जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में शहीद हो गए। गुरुवार को डोडा में सेना का एक बुलेटप्रूफ वाहन सड़क से फिसलकर करीब 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में 10 जवान शहीद हुए, जिनमें अजय लकड़ा भी शामिल थे। इस घटना ने पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ा दी है।

हादसे की पूरी जानकारी

Jharkhand News: Indian Army soldier Ajay Lakra
Jharkhand News: Indian Army soldier Ajay Lakra

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह-चंबा मार्ग पर यह दर्दनाक हादसा हुआ। सेना का वाहन ड्यूटी पर जाते समय खराब मौसम और पहाड़ी सड़क के कारण नियंत्रण से बाहर हो गया। सड़क पर तेज मोड़ और गहरी खाइयां होने से वाहन सीधे खाई में जा गिरा। हादसे में 10 जवान शहीद हुए और 11 जवान घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

सेना के अनुसार यह इलाका बहुत खतरनाक है। यहां अक्सर ऐसे हादसे होते रहते हैं। खराब मौसम, बर्फबारी और सिकुड़ी हुई सड़कें दुर्घटना का मुख्य कारण बनती हैं। इस हादसे के बाद सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। शहीद जवानों के पार्थिव शरीर को शुक्रवार और शनिवार को उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था की गई। अजय लकड़ा का शव शनिवार को रांची पहुंचा।

अजय लकड़ा का परिवार और संघर्ष

अजय लकड़ा का जन्म लाबेद गांव में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय लोहरा उरांव की कई साल पहले मौत हो गई थी। उस समय अजय बहुत छोटे थे। पिता के जाने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी मां पोकलो देवी पर आ गई। पोकलो देवी ने हड़िया बेचकर और मजदूरी करके छह बच्चों का पालन-पोषण किया। उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजा, पढ़ाई कराई और अच्छे इंसान बनाया।

मां की मेहनत रंग लाई। अजय के छोटे भाई अरूण लकड़ा सीआईएसएफ में तैनात हैं। सबसे छोटी बहन अंजू लकड़ा झारखंड पुलिस में पदस्थ हैं। तीन बहनों की शादी हो चुकी है। मां पोकलो देवी ने अपनी कड़ी मेहनत से तीन बच्चों को सरकारी नौकरी दिलाई। अजय बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखते थे। वे हमेशा शारीरिक रूप से फिट रहते थे। दौड़-भाग, व्यायाम और खेलकूद में हिस्सा लेते थे। इसी जुनून के चलते सात साल पहले वे भारतीय सेना में भर्ती हुए।

अजय का विवाह नहीं हुआ था। वे कहते थे कि परिवार की सारी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद ही शादी करेंगे। दिसंबर 2025 में अजय 15 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। छुट्टी खत्म होने पर वे जम्मू-कश्मीर लौट गए। उनका छोटा भाई अरूण की शादी 2025 में हो चुकी है। परिवार अब भी गरीबी और संघर्ष से जूझ रहा है, लेकिन मां की मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

गांव और परिवार में शोक का माहौल

शहीद अजय लकड़ा की मौत की खबर मिलते ही लाबेद गांव में मातम छा गया। सेना ने मां पोकलो देवी को फोन पर सूचना दी। गांव वाले रोते-बिलखते नजर आए। अजय के दोस्त और सहकर्मी कहते हैं कि वे बहुत साहसी और जिम्मेदार जवान थे। हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे।

रांची एयरपोर्ट पर शव पहुंचने पर सेना के अधिकारियों और झारखंड सरकार के प्रतिनिधियों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर भी मौजूद थे। पूरे गांव में लोग अजय की बहादुरी को याद कर रहे हैं। उनका कहना है कि अजय जैसे जवान देश की सुरक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं।

Ranchi News: शहीद परिवार को मिलने वाली सहायता

शहीद अजय लकड़ा की शहादत पर सेना और सरकार ने गहरा दुख जताया है। शहीद परिवार को सेना की ओर से आर्थिक सहायता, नौकरी और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। झारखंड सरकार भी ऐसे परिवारों को मदद देती है। लोगों की अपील है कि शहीद परिवार को हर संभव सहयोग मिले।

अजय लकड़ा की शहादत झारखंड के लिए गर्व की बात है। उन्होंने देश की रक्षा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका बलिदान हमेशा याद रहेगा। ऐसे वीर जवानों को सलाम।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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