Bihar News: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने घोषणा की है कि बिहार में अगले तीन सालों में कुल 42 मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। यह राज्य के स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। इस योजना के तहत हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का सरकार का सपना साकार होता नजर आ रहा है।
बिहार में मेडिकल कॉलेजों की मौजूदा स्थिति
फिलहाल बिहार में कुल 15 मेडिकल कॉलेज चालू हैं। इनमें से 12 राज्य सरकार द्वारा संचालित हैं और तीन केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे हैं जिनमें एम्स पटना और बिहटा में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में नौ निजी मेडिकल कॉलेज भी संचालित हो रहे हैं जिन्होंने लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार किया है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 1520 है जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में 1350 सीटें उपलब्ध हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 11162 है और निजी अस्पतालों में 7822 बिस्तर हैं।
22 नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण शुरू
बजट सत्र 2025 में अपने भाषण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि आने वाले वर्षों में बिहार को 22 नए मेडिकल कॉलेज मिलेंगे। ये 22 नए मेडिकल कॉलेज 10 अन्य जिलों में बनाए जाएंगे। इनमें सीतामढ़ी, झंझारपुर, सीवान, बक्सर, जमुई, बेगूसराय, वैशाली, मुंगेर, सुपौल और आरा में सरकारी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
साथ ही मोतिहारी, गोपालगंज और सहरसा में भी नए मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना है। इन जिलों में मेडिकल कॉलेज के लिए प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल चुकी है और इनका निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा। इन 22 मेडिकल कॉलेजों के बनने के बाद राज्य में सीटों की संख्या बढ़कर 2350 हो जाएगी जबकि बिस्तरों की संख्या 9900 तक पहुंच जाएगी।
मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा में मिली 7 नए कॉलेजों की मंजूरी
मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान बांका, अररिया, खगड़िया, औरंगाबाद, कैमूर, नवादा और जहानाबाद में मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थापित करने की घोषणा की है। इन सात नए सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों को खोला जाएगा जिससे राज्य में कुल 34 सरकारी मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे।
कैबिनेट ने किशनगंज, कटिहार, रोहतास, शिवहर, लखीसराय, अरवल और शेखपुरा जिलों में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सार्वजनिक भाषणों में दोहराते रहे हैं कि उनकी सरकार हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करना चाहती है और यह निर्णय उस लक्ष्य को हकीकत के करीब ले आया है।
निर्माणाधीन 20 मेडिकल कॉलेज जल्द होंगे तैयार
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में 20 मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं जो जमुई, बक्सर, सीवान, आरा, वैशाली, बेगूसराय, मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल और मुंगेर जैसे जिलों में फैले हुए हैं। दरभंगा एम्स इन परियोजनाओं में शामिल है। एक बार ये पूरे हो जाने के बाद नवीन स्वीकृत सात के साथ बिहार के लगभग हर जिले में अपना मेडिकल कॉलेज होगा जो 20 साल पहले अकल्पनीय था।
वैशाली, भोजपुर और सीवान में तीन नए मेडिकल कॉलेज अगले साल तक तैयार होने की उम्मीद है। यह विस्तार चिकित्सा शिक्षा क्षमता बढ़ाने और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करने के लिए सरकार की चल रही रणनीति का हिस्सा है।
2005 में सिर्फ 6 से अब होंगे 42 मेडिकल कॉलेज
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 2005 में बिहार में सिर्फ छह मेडिकल कॉलेज थे। जल्द ही यह संख्या बढ़कर 42 हो जाएगी। यह स्वास्थ्य और शिक्षा में परिवर्तन के पैमाने को दर्शाता है। सरकार का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं हर नागरिक को उपलब्ध हों।
एक बार सात नवीन स्वीकृत कॉलेज और निर्माणाधीन 20 अन्य कॉलेज कार्यात्मक हो जाने पर बिहार में कुल 42 मेडिकल कॉलेज होंगे। यह राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।
हर जिले में मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने के लक्ष्य पर काम कर रही है। फिलहाल रोहतास, कटिहार और किशनगंज में निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं जबकि चार जिलों अरवल, शिवहर, लखीसराय और शेखपुरा में अभी भी मेडिकल कॉलेज नहीं हैं। सरकार इन जिलों में भी जल्द मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना बना रही है।
31 जिलों में 34 सरकारी मेडिकल कॉलेज खुलने से लगभग पूरे राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। यह योजना बिहार के युवाओं को घर के पास ही मेडिकल की पढ़ाई करने का मौका देगी।
ट्रॉमा सेंटर भी होंगे स्थापित
मेडिकल कॉलेजों के अलावा बिहार में विक्रम, मोहनिया और करहरा में ट्रॉमा सेंटर भी बनाए जाएंगे। मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से राजमार्ग पर पटना के विक्रम, कैमूर के मोहनिया और औरंगाबाद के करहरा में ट्रॉमा सेंटर शुरू किए जाएंगे।
ये ट्रॉमा सेंटर हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायल लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित होंगे। तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध होने से कई जानें बचाई जा सकेंगी।
66000 स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती
बिहार सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न भूमिकाओं में 66000 नई नियुक्तियों की योजना बनाई है। इनमें से 38733 पद नियमित नियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे जबकि 27375 पद मानदेय आधार पर होंगे। मार्च 2025 में बिहार विधानसभा में 20036 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य विभाग बजट पेश करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने यह घोषणा की।
बिहार लोक सेवा आयोग मेडिकल कॉलेजों में 1827 सहायक प्रोफेसर नियुक्त करेगा। बिहार तकनीकी सेवा आयोग 3623 विशेषज्ञ डॉक्टर, 667 चिकित्सा अधिकारी, 808 दंत चिकित्सक और आईजीआईसी पटना में सहायक निदेशक के पद के लिए 18 डॉक्टरों की नियुक्ति करेगा। तकनीकी सेवा आयोग 11925 पैरामेडिकल कर्मियों और 19110 एएनएम जीएनएम शिक्षकों की नियुक्ति करेगा।
ग्रामीण इलाकों में 1500 नए अस्पताल
बिहार सरकार अगले वित्तीय वर्ष में ग्रामीण इलाकों में 1500 से अधिक नए अस्पताल भवन बनाने की योजना बना रही है। यह पहल वित्त वर्ष 2025-26 के लिए स्वास्थ्य विभाग के 20035.80 करोड़ रुपये के व्यापक बजट प्रस्ताव का हिस्सा है जिसे विधानसभा में मंजूरी मिल चुकी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इतने बड़े पैमाने पर अस्पतालों की स्थापना से गांव के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। लोगों को इलाज के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पटना मेडिकल कॉलेज बनेगा विश्व का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल
पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का विस्तार किया जा रहा है ताकि यह 5462 बिस्तरों के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल बन सके। यह बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे राजधानी में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
यह विस्तार परियोजना राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को विश्व स्तरीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हजारों मरीजों को एक ही छत के नीचे उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
एमबीबीएस सीटों में बड़ा इजाफा
नए मेडिकल कॉलेज खुलने से राज्य में एमबीबीएस सीटों की संख्या 2870 से बढ़कर 5220 हो जाएगी। यह बिहार के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है जो डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। अब उन्हें राज्य के बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
चिकित्सा शिक्षा में सीटों की बढ़ोतरी से बिहार में डॉक्टरों की कमी दूर होगी। राज्य आत्मनिर्भर होगा और अधिक से अधिक युवाओं को मेडिकल की पढ़ाई का मौका मिलेगा।
पीपीपी मॉडल से होगा विकास
बिहार सरकार ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत चुनिंदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उप मुख्यमंत्री समरत चौधरी ने घोषणा की है कि इन संस्थानों को संभालने के लिए निजी फर्मों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
सरकार पीपीपी मॉडल के तहत नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थापित करने के लिए निजी खिलाड़ियों को जमीन भी उपलब्ध कराएगी। इस मॉडल से स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और राज्य भर में सेवाओं में सुधार करने का लक्ष्य है।
निशुल्क दवाएं बांट रही सरकार
मंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में सरकारी अस्पतालों में मरीजों को 900 करोड़ रुपये की निशुल्क दवाएं वितरित की गई हैं। पिछले छह महीनों से दवा वितरण के मामले में बिहार को देश में पहला स्थान मिला है। यह स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त दवाएं मिलने से उनके इलाज का खर्च कम हो रहा है। यह योजना सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का हिस्सा है।
कैंसर अस्पताल भी खुलेंगे
बेगूसराय और नवादा में कैंसर अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। यह कैंसर रोगियों के लिए बड़ी राहत होगी। अभी तक बिहार के मरीजों को कैंसर के इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था।
इन अस्पतालों की स्थापना से राज्य में कैंसर के इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी। मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेगा।
Bihar News: स्वास्थ्य विभाग का बजट 20000 करोड़ से अधिक
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए स्वास्थ्य विभाग का कुल बजट 20035.80 करोड़ रुपये रखा गया है। यह बिहार सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र को दी जाने वाली प्राथमिकता को दर्शाता है। इस बजट से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की उम्मीद है।
बजट में मेडिकल कॉलेज निर्माण, अस्पताल विस्तार, कर्मचारी भर्ती और उपकरण खरीद के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है।



