Bengal Voter List 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची में बड़ा बदलाव हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल 90,83,345 नाम हटाए गए हैं। इनमें मुर्शिदाबाद जिले में सबसे ज्यादा 4,55,137 नाम कटे हैं, जबकि उत्तर 24 परगना में 3,25,666 नाम हटाए गए।
यह प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ-सुथरा और सही बनाने के लिए की गई थी। चुनाव आयोग ने कहा है कि हटाए गए मतदाताओं को अपनी बात रखने और अपील करने का एक मौका मिलेगा। न्यायिक अधिकारियों की ई-हस्ताक्षर प्रक्रिया पूरी होते ही अंतिम आंकड़े जारी कर दिए जाएंगे। राज्य में पहले कुल मतदाताओं की संख्या करीब 7 करोड़ 66 लाख थी, अब यह संख्या काफी कम हो गई है।
SIR प्रक्रिया क्या थी और क्यों जरूरी ?
पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण की अधिसूचना जारी की गई थी। इसका मकसद मतदाता सूची से मृत व्यक्तियों, दोहरे नामों, स्थानांतरित लोगों और उन व्यक्तियों के नाम हटाना था जिनका कोई सही पता नहीं मिल रहा था।
दिसंबर में जारी मसौदा सूची में करीब 58 लाख नाम हटा दिए गए थे। फरवरी में अंतिम सूची आने तक यह आंकड़ा 63 लाख 66 हजार के पार पहुंच गया। अब न्यायिक जांच के बाद और 27 लाख 16 हजार 393 नाम हटाए गए। इस तरह कुल कटौती 90 लाख 83 हजार 345 हो गई है। यह संख्या राज्य की पुरानी मतदाता सूची का करीब 11.9 प्रतिशत है।
जिलेवार आंकड़े: मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा असर
न्यायिक जांच में सबसे ज्यादा नाम अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले से हटाए गए। यहां 11 लाख 1 हजार 145 मामलों में से 4 लाख 55 हजार 137 नाम हटाए गए। यानी करीब 41 प्रतिशत मामलों में नाम कटे।
- उत्तर 24 परगना: 3,25,666 नाम हटाए गए।
- नदिया: करीब 2,98,000 नाम हटे।
- दक्षिण 24 परगना: करीब 2,23,000 नाम हटे।
- पूर्वी बर्धमान: 2,09,000 नाम हटाए गए।
मालदा और अन्य सीमावर्ती जिलों में भी काफी संख्या में नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि नाम हटाने का फैसला पूरी जांच और सबूतों के आधार पर लिया गया।
हटाए गए मतदाताओं को अपील का मौका
चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें एक बार अपील करने का पूरा मौका मिलेगा। लोगों को जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड या अन्य पहचान पत्र के साथ आवेदन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में कहा था कि हटाए गए मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जाए।
2026 विधानसभा चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होगा और दूसरे चरण में 29 अप्रैल को बाकी 142 सीटों पर वोटिंग होगी। नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। 91 लाख नाम हटने से राज्य की कुल मतदाता संख्या अब करीब 6 करोड़ 75 लाख के आसपास रह गई है। यह बदलाव कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकता है।
मतदाता सूची साफ करने का महत्व
मतदाता सूची में फर्जी नाम या गलत एंट्री लोकतंत्र के लिए खतरा होती है। SIR जैसी प्रक्रिया से सूची सही और विश्वसनीय बनती है। इससे वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है और फर्जी वोटिंग की संभावना कम होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर मतदाता सूची की जांच जरूरी है, क्योंकि लोग शादी, नौकरी या दूसरे कारणों से जगह बदलते रहते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया और तैयारियां
कोलकाता समेत पूरे राज्य में लोग इस खबर पर चर्चा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने सभी जिलों में हेल्प डेस्क बनाए हैं। वहां लोग अपनी स्थिति चेक कर सकते हैं। मोबाइल ऐप और वेबसाइट पर भी मतदाता सूची देखने की सुविधा है।
SIR प्रक्रिया के अन्य पहलू
इस पूरे अभ्यास में 700 से ज्यादा न्यायिक अधिकारी लगाए गए थे। उन्होंने लाखों मामलों की सुनवाई की। चुनाव आयोग ने कहा कि SIR के दौरान नए मतदाताओं के नाम भी जुड़े, लेकिन हटाए गए नामों की संख्या ज्यादा रही। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि अंतिम सूची जल्द जारी हो जाएगी।
निष्कर्ष: साफ सूची से मजबूत लोकतंत्र
पश्चिम बंगाल में 91 लाख नाम हटने की खबर चुनावी चर्चा का केंद्र बन गई है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। चुनाव आयोग की यह कोशिश लोकतंत्र की मजबूती के लिए सराहनीय है। राज्य के मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपनी वोटर आईडी चेक करें और कोई समस्या हो तो तुरंत संबंधित अधिकारी से संपर्क करें।
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