Jharkhand News: झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (यूएसआईएल) ने अपनी बिजली दरों में औसतन 17 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसईआरसी) के समक्ष रखा है। सोमवार को आदित्यपुर के ऑटो क्लस्टर में आयोजित जन सुनवाई में इस प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं, उद्यमियों और विभिन्न संगठनों ने जमकर विरोध जताया। आयोग के चेयरमैन नवनीत कुमार और विधिक सदस्य महेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में हुई इस सुनवाई में कंपनी ने अपनी वित्तीय जरूरतों का हवाला देते हुए बढ़ोतरी की मांग की, लेकिन उपभोक्ताओं ने इसे अनुचित और बोझिल बताया।
जन सुनवाई में कंपनी का पक्ष और प्रस्तावित वृद्धि

टाटा स्टील यूएसआईएल ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के मल्टी-ईयर टैरिफ प्लान के तहत यह प्रस्ताव पेश किया। कंपनी के चीफ सुमन मंडल ने सुनवाई में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में उनके पास 7,572 उपभोक्ता हैं, जिन्हें सालाना 1,117.46 मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति की जा रही है। अगले पांच वर्षों में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 15,568 होने की उम्मीद है, जिसके लिए 1,377.54 मिलियन यूनिट बिजली की जरूरत पड़ेगी। कंपनी ने कुल 935.21 करोड़ रुपये की राजस्व आवश्यकता बताई है।
प्रस्तावित वृद्धि के अनुसार फिक्स्ड चार्ज में न्यूनतम 10 रुपये से अधिकतम 115 रुपये तक और एनर्जी चार्ज में 60 पैसे से 1.05 रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी शामिल है। हालांकि, कुछ श्रेणियों जैसे 5 किलोवाट तक के शहरी कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए एनर्जी चार्ज में केवल 25 पैसे प्रति यूनिट और रेलवे, इंजीनियरिंग तथा मिलिट्री स्टेशनों के लिए 5 पैसे प्रति यूनिट की कमी का प्रस्ताव भी रखा गया है। कंपनी ने ट्रू-अप (वर्ष 2024-25), एनुअल परफॉर्मेंस रिव्यू (2025-26) और बिजनेस प्लान के साथ यह याचिका दाखिल की है।
कंपनी की प्रमुख चुनौतियां और दलीलें
सुनवाई में कंपनी प्रबंधन ने अपनी परिचालन चुनौतियों का जिक्र किया। सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में भूमिगत केबल अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिसके लिए जुडको, गेल, जेबीवीएनएल और अन्य एजेंसियों की खुदाई को जिम्मेदार ठहराया गया। वन क्षेत्र में अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में देरी और ट्रांसफार्मर से तेल की चोरी जैसी समस्याओं ने भी कंपनी की लागत बढ़ाई है। कंपनी का दावा है कि इन चुनौतियों के बावजूद उनका वर्तमान टीएंडडी लॉस केवल 1.68 प्रतिशत है, जो उद्योग मानकों से काफी बेहतर है। पूंजीगत व्यय में प्रतिवर्ष 30 करोड़ रुपये और पांच वर्षों में 150 करोड़ रुपये निवेश की योजना है।
उपभोक्ताओं और उद्यमियों का विरोध और प्रमुख आपत्तियां
जन सुनवाई में उपभोक्ताओं ने 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी को अतिरिक्त बोझ करार दिया। विभिन्न संगठनों जैसे एशिया (एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज एंड असोसिएट्स) के प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि कंपनी पहले से ही सरचार्ज लगा रही है, फिर अतिरिक्त वृद्धि क्यों।
कुछ प्रमुख आपत्तियां इस प्रकार रहीं:
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पूर्व अध्यक्ष संतोष खेतान ने हाईकोर्ट के 5 जनवरी के फैसले का हवाला देते हुए 166 करोड़ रुपये की विद्युत शुल्क राशि ब्याज सहित वापस मांगी।
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उद्यमी हर्ष अग्रवाल ने कहा कि टीएंडडी लॉस को बढ़ाकर 3 प्रतिशत दिखाया गया है, जबकि उपभोक्ता बढ़ने के साथ यह कम होना चाहिए।
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दशरथ उपाध्याय और अशोक गुप्ता ने इंस्टालेशन चार्ज और क्षमता बढ़ाने पर दोबारा चार्ज लेने की प्रक्रिया को गैर-तर्कसंगत बताया।
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सुधीर सिंह ने 40 एचपी लोड बढ़ाने के लिए 8 लाख रुपये की मांग को अनुचित कहा, जिससे उद्यमी जीवित नहीं रह पाएंगे।
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अन्य उद्यमियों ने लोड बढ़ाने के आवेदनों में 1-2 साल की देरी और पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए।
आयोग का रुख और भविष्य की प्रक्रिया
आयोग के चेयरमैन नवनीत कुमार ने कंपनी को टीएंडडी लॉस कम करने और पूंजीगत व्यय में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रेवेन्यू गैप न बढ़े, अन्यथा टैरिफ में और वृद्धि होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अब रेवेन्यू गैप को नियंत्रित रखना जरूरी है। विधिक सदस्य महेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया कि कंपनी के 17 प्रतिशत के प्रस्ताव के बावजूद आडिट रिपोर्ट और तय फॉर्मूले के आधार पर ही अंतिम बढ़ोतरी तय होगी, ताकि उपभोक्ताओं और कंपनी दोनों का संतुलन बना रहे।
Jharkhand News: झारखंड में बिजली दरों का संदर्भ
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब राज्य में अन्य वितरण कंपनियों जैसे जेबीवीएनएल ने भी 2026-27 के लिए 60 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। टाटा स्टील यूएसआईएल का क्षेत्र सीमित है, लेकिन जमशेदपुर और आदित्यपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में इसका प्रभाव बड़ा होगा। आयोग जन सुनवाई के बाद आपत्तियों का अध्ययन कर अंतिम टैरिफ आदेश जारी करेगा, जो उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालेगा।
उद्योग और घरेलू उपभोक्ता दोनों ही इस बढ़ोतरी से प्रभावित होंगे। कंपनी दक्षता और निवेश का दावा कर रही है, लेकिन उपभोक्ता इसे महंगाई का दूसरा नाम मान रहे हैं। आयोग के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं, जो आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। यह मामला न केवल बिजली दरों से जुड़ा है, बल्कि औद्योगिक विकास और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन का भी है।



