पटना | भोजपुर जिले का बिलौटी गांव अब सिर्फ एनकाउंटर का गवाह नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीति की प्रयोगशाला बन गया है। भरत तिवारी एनकाउंटर अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर महागठबंधन के भीतर की सियासी उथल-पुथल की कहानी बन गया है।
तेजस्वी का बयान आक्रामक, कदम संतुलित:
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनकाउंटर को ‘पुलिसिया हत्या’ कहा, न्यायिक जांच की मांग की। मगर खुद बिलौटी गांव नहीं गए। अपनी जगह उदय नारायण चौधरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा।
एक्सपर्ट की राय – MY वोट बैंक की मजबूरी:
यह सोची-समझी हिचकिचाहट है। भरत तिवारी सवर्ण ब्राह्मण थे और उनपर केस थे। तेजस्वी जानते हैं कि सवर्ण आरोपी के घर जाना उनके मूल वोटर यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक को खटक सकता है। RJD ‘A to Z’ की बात करती है, मगर जमीन पर MY और EBC के दबाव से मुक्त नहीं है।

कांग्रेस ने लपका मौका:
तेजस्वी की इसी हिचकिचाहट के बीच बने खाली स्पेस को कांग्रेस ने लपक लिया। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और हरियाणा विधायक कुलदीप वत्स बिलौटी पहुंचे। दावा किया कि राहुल गांधी भी आ सकते हैं। कांग्रेस को लगता है कि सवर्ण समाज में नीतीश सरकार के खिलाफ गुस्से को भुना सकती है।
A to Z नैरेटिव की परीक्षा:
यह एनकाउंटर तेजस्वी के उस नैरेटिव की परीक्षा है जिसमें वे खुद को आधुनिक नेता साबित करना चाहते थे। लालू की राजनीति खुलकर सवर्ण विरोधी थी। तेजस्वी उससे अलग दिखना चाहते हैं, मगर इस मोड़ पर दूरी ने साबित किया कि पुराने जातीय समीकरण आज भी मजबूरी हैं।
महागठबंधन में टकराव:
एक दल अपना जनाधार बचाने की रणनीति पर है, दूसरा राजनीतिक विस्तार तलाश रहा है। बिलौटी की कहानी बताती है कि सहयोगी साथ तो चलते हैं, मगर हर मोड़ पर अपनी जमीन भी तलाशते हैं।
स्रोत: राजनीतिक विश्लेषक / स्थानीय रिपोर्टर

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