Devendra Nath Mahto Open Letter: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले Devendra Nath Mahto Open Letter के जरिए इन दिनों चर्चा में हैं। जेपीएससी-जेएसएससी न्याय मंच के छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो का अनिश्चितकालीन अनशन पिछले दस दिनों से लगातार जारी है। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां से उन्होंने छात्रों के नाम एक भावनात्मक और कड़ा खुला पत्र जारी किया है। इस खत के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही उनका शरीर अस्वस्थ और कमजोर हो गया है, लेकिन न्याय की मांग और छात्रों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष का संकल्प पूरी तरह अडिग है।
Devendra Nath Mahto Open Letter: अस्पताल के बिस्तर से छात्र नेता का सोरेन सरकार को कड़ा संदेश

अस्पताल में उपचाराधीन रहते हुए भी छात्र नेता ने अपनी भूख-हड़ताल जारी रखी है और राज्य सरकार को स्पष्ट संदेश भेजा है। उनका यह आंदोलन पिछले पांच जुलाई से लगातार चल रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने पर उन्हें और उनके साथियों को जिस प्रकार की पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, वह बेहद निंदनीय है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बल प्रयोग और लाठीचार्ज के जरिए युवाओं की आवाज को कभी भी दबाया नहीं जा सकता है।
विधानसभा घेराव और पुलिसिया लाठीचार्ज पर खड़े किए तीखे सवाल
अपने खुले पत्र में उन्होंने विधानसभा घेराव के दौरान हुई घटना का जिक्र करते हुए पुलिस प्रशासन से कई तीखे सवाल पूछे हैं। उनका कहना है कि जब पुलिस खुद एस्कॉर्ट करके उन्हें एक निश्चित स्थान पर शांतिपूर्ण तरीके से बैठा चुकी थी, तब अचानक बिना किसी पूर्व चेतावनी के लाठीचार्ज क्यों किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस को कार्रवाई ही करनी थी, तो उन्हें उस स्थल तक सुरक्षित पहुंचाया ही क्यों गया था। इस प्रकार की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई को उन्होंने पूरी तरह से अलोकतांत्रिक करार दिया है और इस घटना की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
Devendra Nath Mahto Open Letter: संविधान के दायरे में रहकर जारी रहेगा छात्रों का यह संघर्ष
छात्र नेता ने अपने संदेश में सभी युवा साथियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की हिंसा का रास्ता न अपनाएं। उनका यह साफ कहना है कि उनका पूरा आंदोलन पूरी तरह से संविधान और लोकतंत्र के मार्ग पर चलकर आगे बढ़ रहा है। सरकार की तमाम बाधाओं और प्रशासनिक दबाव के बावजूद वे पीछे हटने वाले नहीं हैं जब तक कि छात्रों को वास्तविक इंसाफ नहीं मिल जाता। उन्होंने आंदोलन में सहयोग देने वाले सभी साथियों का शुक्रिया अदा करते हुए इस लड़ाई को और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है।
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