डेस्क: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवादित डूरंड लाइन पर जारी तकरार ने एक बार फिर हिंसक मोड़ ले लिया है। ताजा घटनाओं के अनुसार, तालिबान के लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना की सीमावर्ती चौकियों पर हमला कर उन्हें कब्जे में ले लिया, जिसमें पाकिस्तानी बलों को गंभीर क्षति पहुंची। इस झड़प में तालिबान न केवल हथियारों पर हाथ साफ कर गया, बल्कि पाकिस्तानी सैनिकों की वर्दियां और पैंटें भी लूट लीं। बाद में इन्हें पूर्वी अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत के एक व्यस्त चौराहे पर ‘ट्रॉफी’ के रूप में टांग दिया गया, जो पाकिस्तान के लिए अपमानजनक साबित हो रहा है।
नंगरहार प्रांत में तालिबान के लड़ाकों ने अचानक पाकिस्तानी चौकियों पर धावा बोल दिया, जिससे वहां तैनात सैनिकों को भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। हमले के बाद तालिबान ने न सिर्फ राइफलें और अन्य सैन्य उपकरण लूटे, बल्कि सैनिकों की पैंटें भी छीन लीं। स्थानीय पत्रकार दाउद जुबनिश द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं तस्वीरें और वीडियो इस दृश्य को कैद करती हैं, जहां तालिबान लड़ाके इन पैंटों और हथियारों को हवा में लहराते नजर आ रहे हैं। यह नजारा न केवल उनकी विजय का उत्सव है, बल्कि पाकिस्तानी सेना की हार को सार्वजनिक रूप से उजागर करने का माध्यम भी बन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां सीमा विवाद को और गहरा सकती हैं, खासकर जब अफगान पक्ष डूरंड लाइन को ऐतिहासिक रूप से अस्वीकार करता रहा है।
अस्थायी युद्धविराम से बनी शांति
इस संघर्ष में दोनों तरफ से व्यापक तबाही हुई। मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय स्रोतों के आधार पर, पाकिस्तान की ओर से दर्जनों सैनिकों के शव मिलने की संभावना जताई जा रही है। तालिबान के लड़ाकों और स्थानीय नागरिकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। लगभग 48 घंटे चले इस टकराव के बाद दोनों पक्षों ने अस्थायी युद्धविराम घोषित कर दिया, जिसकी वजह से सीमा क्षेत्रों में फिलहाल सन्नाटा छा गया है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बिना स्थायी समाधान के यह तनाव किसी भी समय फिर भड़क सकता है। इसके अलावा, पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई में काबुल और कंधार पर हवाई हमलों से कम से कम 15 नागरिक मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए, जिसने स्थिति को और जटिल बना दिया।
डूरंड लाइन विवाद का नया दौर
डूरंड लाइन को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच दशकों पुराना विवाद किसी न किसी रूप में जीवित रहा है। तालिबान इस कृत्रिम सीमा को कभी स्वीकार नहीं करता और बार-बार सीमा पर घुसपैठ या झड़पें होती रहती हैं। इस बार की घटना ने 1971 के भारत-पाक युद्ध की यादें ताजा कर दीं, जब पाकिस्तानी सेना को अपमानजनक पराजय का सामना करना पड़ा था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ये तस्वीरें पाकिस्तानी सेना की कमजोरियों को सामने ला रही हैं, जिससे न केवल उसकी सैन्य क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता भी दांव पर लग गई है। अफगानिस्तान में तो कई लोग तालिबान के पक्ष में खड़े होकर पाकिस्तानी आक्रमण के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।
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