Vande Mataram: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर महत्वपूर्ण नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंद बजाना या गाना अनिवार्य होगा। यह गीत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले बजाया जाएगा। मौजूद सभी लोगों को गीत के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा। यह नियम सिनेमा हॉल में फिल्म दिखाने के दौरान लागू नहीं होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को 10 पन्नों का आदेश जारी किया था। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को उसकी मूल रूप में प्रस्तुत करना है।
नए दिशानिर्देश कब और क्यों जारी हुए?

गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ के गायन और वादन के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं। ये दिशानिर्देश सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजे गए हैं।
नए नियमों के अनुसार, यदि किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान दोनों बजते हैं, तो ‘वंदे मातरम्’ पहले बजाया जाएगा। उसके बाद ‘जन गण मन’ आएगा। दोनों के दौरान सभी लोग खड़े रहेंगे।
यह फैसला स्वतंत्रता संग्राम के इस गीत को पूरी शक्ति के साथ वापस लाने के लिए लिया गया है। बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में यह गीत लिखा था। 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में यह प्रकाशित हुआ।
‘वंदे मातरम्’ के छह छंद क्यों अनिवार्य?
मूल गीत में कुल छह छंद हैं। 1937 में कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में केवल पहले दो छंदों को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया गया था। बाद के छंदों में हिंदू देवियों जैसे दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का जिक्र होने से कुछ लोगों को आपत्ति थी।
अब सरकार ने फैसला लिया है कि सरकारी आयोजनों में पूरे छह छंद बजेंगे। पूरा गीत लगभग 3 मिनट 10 सेकंड लंबा होगा।
पहले दो छंद भारत को मां के रूप में दिखाते हैं। बाद के छंद देवी रूपों का वर्णन करते हैं। पूरा गीत भारत माता की पूरी छवि पेश करता है।
किन कार्यक्रमों में अनिवार्य होगा पूरा ‘वंदे मातरम्’?
गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार ये अवसर हैं जहां पूरे छह छंद बजाना जरूरी होगा:
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राष्ट्रपति के किसी भी सरकारी कार्यक्रम में उनके आगमन और प्रस्थान के समय
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राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम भाषण या संबोधन से पहले और बाद में
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राज्यपाल या उपराज्यपाल के राज्य में सरकारी कार्यक्रमों में आगमन और प्रस्थान के समय
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उनके भाषण या संबोधन से पहले और बाद में
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तिरंगा फहराने के सभी सरकारी मौकों पर
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पद्म पुरस्कार, गैलेंट्री अवॉर्ड और अन्य नागरिक सम्मान समारोहों में
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सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख आयोजनों में
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गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों के मुख्य समारोहों में
स्कूलों में भी हर दिन ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन शुरू करना होगा। स्कूल प्राधिकरण को राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान और तिरंगे के सम्मान को बढ़ावा देने के कदम उठाने होंगे।
‘वंदे मातरम्’ के छंदों का संक्षिप्त अर्थ
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प्रथम छंद: भारत को सुजलां, सुफलां, शस्य-श्यामला और मलयज-शीतल माता के रूप में वर्णित करता है।
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द्वितीय छंद: कोटि-कोटि कंठों से गूंजती मां की शक्ति और शत्रुओं का नाश करने वाली माता का गुणगान।
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तृतीय छंद: मां को विद्या, धर्म, हृदय, मर्म, प्राण, शक्ति और भक्ति का स्वरूप बताता है।
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चतुर्थ छंद: मां को दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और वाणी (सरस्वती) के रूप में नमन।
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पंचम छंद: श्यामला, सरला, सुस्मिता और भूषिता धरणी-भरणी माता का वर्णन।
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षष्ठ छंद: मां को शक्ति का मूल रूप बताते हुए बार-बार वंदन।
ये छंद मिलकर भारत की पूर्ण तस्वीर दिखाते हैं।
‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में ‘वंदे मातरम्’ लिखा। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम में बहुत लोकप्रिय हुआ। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में इसे बड़े पैमाने पर गाया गया।
1950 में संविधान लागू होने पर ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान का दर्जा मिला। ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगीत बनाया गया। लेकिन आधिकारिक रूप से केवल पहले दो छंद ही इस्तेमाल होते थे।
अब नए दिशानिर्देशों से पूरा गीत सरकारी मंचों पर गूंजेगा। यह कदम राष्ट्रीय गीत की मूल भावना को मजबूत करने वाला है।
क्या नहीं लागू होगा यह नियम?
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान ‘वंदे मातरम्’ बजने पर दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं है। ऐसा करने से फिल्म प्रदर्शन में व्यवधान आ सकता है।
अगर कोई समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री में गीत बजता है, तो भी खड़े होने की उम्मीद नहीं की जाती।
Vande Mataram: दिशानिर्देशों के मुख्य बिंदु
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‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगान से पहले बजाया जाएगा।
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पूरे छह छंद (3 मिनट 10 सेकंड) अनिवार्य।
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सभी लोग सावधान मुद्रा में खड़े रहेंगे।
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सिनेमा हॉल में छूट।
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सभी सरकारी विभागों, स्कूलों और संस्थानों को पालन करना होगा।
ये नियम देशभर में लागू हैं। सभी को राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान दिखाना होगा।



