नई दिल्ली – बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से ही अल्पसंख्यकों पर हमले लगातार बढ़ गए हैं। ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटिज (HRCBM) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस साल जून से दिसंबर कर बांग्लादेश में हिंदू अस्पसंख्यकों के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों से जुड़ी कम से कम 71 घटनाएं सामने आई हैं।मुस्लिम बहुल देश के पीरोजपुर जिले के डुमरीताला गांव में एक हिंदू परिवार के कम से कम पांच घरों को आग लगा दी गई, जिसे अल्पसंख्यकों पर एक टारगेटेड हमला माना जा रहा है। स्थानीय अधिरकारियों के अनुसार, आग लगने का सही कारण अभी तक पता नहीं चला है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमलावरों ने कथित तौर पर एक कमरे में कपड़ा भरकर आग लगा दी, जिससे आग तेजी से पूरे घर में फैल गई।
HRCBM रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
HRCBM की रिपोर्ट बताती है कि इन 71 मामलों में पुलिस गिरफ्तारियां, एफआईआर, भीड़ की पिटाई, घरों की तोड़फोड़ और यहां तक कि मौतें शामिल हैं। ज्यादातर आरोप सोशल मीडिया पर कथित पोस्ट से जुड़े हैं, लेकिन कई मामलों में ये पोस्ट फर्जी या हैक किए गए अकाउंट से साबित हुए हैं। रिपोर्ट कहती है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा आरोपी हिंदू हैं, जिनमें 15-17 साल के नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। ये आरोप अक्सर व्यक्तिगत दुश्मनी या संपत्ति हड़पने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एक बार आरोप लगते ही भीड़ जमा हो जाती है और पूरे हिंदू मोहल्ले को निशाना बना लिया जाता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो अल्पसंख्यकों का डर और बढ़ेगा।
हाल की आगजनी की घटनाएं
हाल के दिनों में कई जगहों पर हिंदू परिवारों के घरों में आग लगाई गई है। पीरोजपुर जिले के दुमरिताला गांव में 27 दिसंबर 2025 को एक हिंदू परिवार के कई कमरों में आग लगा दी गई। हमलावरों ने कपड़े ठूंसकर आग लगाई और घर जलकर राख हो गया। चटगांव (चट्टोग्राम) के रावजान इलाके में कुछ दिनों में सात हिंदू परिवारों के घर जलाए गए। हमलावरों ने दरवाजे बाहर से बंद कर दिए थे, ताकि लोग अंदर फंस जाएं। परिवारों को बाड़ काटकर या दीवार तोड़कर जान बचानी पड़ी। इन हमलों में पालतू जानवर भी मारे गए और संपत्ति का बड़ा नुकसान हुआ। कुछ जगहों पर धमकी भरे नोट भी छोड़े गए, जिनमें लिखा था कि इस्लाम के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
उदाहरण
18 दिसंबर 2025 को माइमेंसिंह जिले में दीपू चंद्र दास नाम के 30 साल के हिंदू युवक को ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को आग लगा दी। खुलना में 15 साल के उत्सव मोंडल को पुलिस की मौजूदगी में बुरी तरह पीटा गया। रंगपुर में एक नाबालिग की गिरफ्तारी के बाद 22 हिंदू घरों को तोड़ दिया गया। ये घटनाएं दिखाती हैं कि आरोप एक व्यक्ति पर लगता है, लेकिन सजा पूरे समुदाय को मिलती है।
राजनीतिक अस्थिरता का असर
शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें मजबूत हुई हैं। अंतरिम सरकार के समय में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। कुछ लोग कहते हैं कि भारत विरोधी भावना को भड़काकर इन हमलों को जायज ठहराया जा रहा है। हिंदू समुदाय, जो देश की आबादी का करीब 8-10 प्रतिशत है, खुद को सबसे असुरक्षित महसूस कर रहा है। लंदन में भी हिंदू समुदाय ने बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन किए और सुरक्षा की मांग की। भारत सरकार ने भी इन हमलों पर चिंता जताई है और कहा है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार दुश्मनी चिंता की बात है।
निष्कर्ष :
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति बहुत नाजुक हो गई है। HRCBM की रिपोर्ट साफ बताती है कि ईशनिंदा के झूठे आरोप एक हथियार बन गए हैं, जिससे घर जल रहे हैं, लोग मारे जा रहे हैं और डर का माहौल है। ये सिर्फ छिटपुट घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक सुनियोजित पैटर्न लगता है। अंतरिम सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए – दोषियों को सजा देनी चाहिए, कानून का सही इस्तेमाल होना चाहिए और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हिंदू समुदाय और कमजोर होगा, और देश में सद्भावना खतरे में पड़ जाएगी। दुनिया को भी इस पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि मानवाधिकार सबके लिए हैं। अल्पसंख्यकों को सुरक्षित महसूस करने का हक है, और हिंसा का कोई बहाना स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।



