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अंधविश्वास की खौफनाक हद: “देवी मां का आदेश” मानकर पिता ने 8, 6 और 5 साल के बच्चों को जिंदा गाड़ दिया

वाराणसी – यूपी के बस्ती जिले में दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। परशुरामपुर थाना क्षेत्र के नंदनगर गांव में एक बेरहम पिता ने अपनी ही संतानों की जान लेने की कोशिश की। जानकारी के अनुसार, आरोपी पिता अपनी पत्नी से आए दिन मारपीट करता था। लगातार अत्याचार से तंग आकर पत्नी अपने एक बच्चे को लेकर मायके चली गई लेकिन घर में मौजूद उसके तीन मासूम बच्चे बेरहम पिता के कहर का शिकार बनते रहे।

जिंदा बच्चों को दफनाने की कोशिश कर रहा था पिता

आरोप है कि पिता ने अपने तीन नाबालिग बच्चों को मिट्टी में दफनाने की तैयारी कर ली थी। उसने घर के पास ही एक गड्ढा खोद लिया और बच्चों को जबरन वहां ले जाने लगा। इसी बीच किसी ग्रामीण ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। सूचना मिलते ही परशुरामपुर थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।

आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मौके से आरोपी पिता को गिरफ्तार कर थाने ले आई है। बच्चों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है और महिला की तहरीर पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। नंदनगर गांव की यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है। समय पर मिली सूचना और पुलिस की तत्परता से तीन मासूमों की जान बच गई।परशुरामपुर थाने के एसओ ने बताया कि बुधवार शाम 7.30 बजे डायल 112 पर सूचना मिली कि इरफान हाशमी गड्ढा खोदकर अपने बच्चों को जिंदा दफनाने की कोशिश कर रहा है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को हिरासत में पूछताछ की तो शिकायत सही मिली। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।

निष्कर्ष:

यह घटना अंधविश्वास, मानसिक रोग और सामाजिक जागरूकता की भयानक कमी का जीता-जागता उदाहरण है। एक पिता के चक्कर में कोई पिता अपने ही बच्चों की बलि चढ़ाने पर उतारू हो जाए, यह कल्पना से परे है। यह समाज को झकझोरने वाली घटना इस बात की चेतावनी है कि:

. अंधविश्वास आज भी ग्रामीण भारत के बड़े हिस्से में जड़ें जमाए बैठा है।मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की घोर कमी है; ऐसे लोग इलाज के बजाय तांत्रिकों-बाबाओं के चक्कर में पड़ते हैं।

. बच्चों की सुरक्षा का अंतिम कवच माता-पिता ही होते हैं, जब वही दुश्मन बन जाएं तो बच्चे कितने असुरक्षित हैं, यह इस घटना से साफ झलकता है।

यह सिर्फ एक पिता की पागलपन की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज और सिस्टम की नाकामी की कहानी है। उम्मीद है तीनों बच्चे जल्द ठीक हो जाएं और दोषी को सबसे कठोर सजा मिले। साथ ही, इस घटना से सबक लेकर अंधविश्वास के खिलाफ और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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