How To Increase Children Height: दुनिया भर में जब लंबाई की बात होती है तो नीदरलैंड्स का नाम सबसे पहले आता है। यहां के लोगों की औसत लंबाई 6 फीट से भी अधिक है। मॉन्टेनेग्रो, एस्टोनिया और आइसलैंड जैसे देश भी इस मामले में शीर्ष पर हैं। लेकिन जब भारत की बात आती है तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। भारतीय पुरुषों की औसत लंबाई केवल 5 फीट 4 इंच है जबकि महिलाओं की लगभग 5 फीट। सबसे चिंताजनक बात यह है कि देश में हर तीसरा बच्चा स्टंटेड यानी कुपोषित है, जिसका अर्थ है कि उनकी शारीरिक वृद्धि उम्र के अनुसार नहीं हो रही है।
यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है बल्कि आने वाले भारत की तस्वीर है। बच्चों की घटती लंबाई केवल शारीरिक विकास का मुद्दा नहीं बल्कि समग्र स्वास्थ्य और राष्ट्रीय विकास से जुड़ा एक गंभीर मामला है। इस समस्या के समाधान के लिए योग गुरु स्वामी रामदेव ने योग, व्यायाम और सही पोषण के माध्यम से बच्चों की लंबाई बढ़ाने के प्रभावी उपाय बताए हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि भारत में बच्चों की लंबाई क्यों घट रही है और इसे बढ़ाने के लिए क्या किया जा सकता है।
विश्व में सबसे लंबे लोग कहां रहते हैं?

दुनिया भर में लंबाई के मामले में नीदरलैंड्स सबसे आगे है। यहां के पुरुषों की औसत लंबाई 6 फीट से अधिक है जबकि महिलाओं की लगभग 5 फीट 7 इंच है। यह कोई संयोग नहीं है बल्कि उनकी जीवनशैली, खान-पान और स्वास्थ्य सुविधाओं का परिणाम है। नीदरलैंड्स में डेयरी उत्पादों का बहुत अधिक सेवन किया जाता है जो कैल्शियम और प्रोटीन का उत्कृष्ट स्रोत हैं।
मॉन्टेनेग्रो दूसरे स्थान पर है जहां पुरुषों की औसत लंबाई लगभग 6 फीट है। एस्टोनिया, डेनमार्क, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन जैसे स्कैंडिनेवियाई देश भी शीर्ष दस में शामिल हैं। इन सभी देशों की समानता यह है कि यहां पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और जीवन स्तर बेहद उच्च है। बच्चों को बचपन से ही संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद मिलती है।
इसके विपरीत, भारत और दक्षिण एशियाई देश इस सूची में काफी नीचे हैं। यहां कुपोषण, गरीबी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी प्रमुख कारण हैं। हालांकि पिछले कुछ दशकों में भारत में औसत लंबाई में कुछ वृद्धि हुई है, लेकिन अभी भी हम वैश्विक औसत से काफी पीछे हैं।
भारत में लंबाई की स्थिति
भारतीय पुरुषों की औसत लंबाई लगभग 5 फीट 4 इंच है जबकि महिलाओं की लगभग 5 फीट। यह आंकड़ा विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। लेकिन असली चिंता का विषय यह है कि भारत में बच्चों में स्टंटिंग की दर बहुत अधिक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के अनुसार, भारत में लगभग 35 प्रतिशत बच्चे स्टंटेड हैं।
स्टंटिंग का अर्थ है कि बच्चे की लंबाई उसकी उम्र के औसत से काफी कम है। यह दीर्घकालिक कुपोषण का संकेत है। स्टंटिंग केवल लंबाई को प्रभावित नहीं करती बल्कि बच्चे के संज्ञानात्मक विकास, प्रतिरक्षा प्रणाली और समग्र स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। ये बच्चे वयस्क होने पर भी कम उत्पादक होते हैं और पुरानी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील रहते हैं।
भारत के विभिन्न राज्यों में यह समस्या अलग-अलग स्तर पर है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्टंटिंग की दर राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। केरल और गोवा जैसे राज्यों में यह दर तुलनात्मक रूप से कम है जहां स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण की स्थिति बेहतर है।
भारत में बच्चों की लंबाई क्यों घट रही है
भारत में बच्चों की घटती लंबाई के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण बचपन में प्रोटीन की कमी है। भारतीय आहार में प्रोटीन की मात्रा पारंपरिक रूप से कम रही है और शाकाहारी आहार में यह और भी कम होती है। प्रोटीन शरीर के विकास और मांसपेशियों के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसकी कमी से बच्चों की वृद्धि सीधे प्रभावित होती है।
दूसरा प्रमुख कारण आयरन, जिंक, विटामिन डी और कैल्शियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है। आयरन की कमी से एनीमिया होता है जो बच्चों में बहुत आम है। जिंक शरीर की वृद्धि और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन डी और कैल्शियम हड्डियों के विकास के लिए आवश्यक हैं। इन सभी की कमी लंबाई को सीधे प्रभावित करती है।
तीसरा कारण शारीरिक गतिविधि की कमी है। आज के बच्चे खेल के मैदानों से दूर होते जा रहे हैं। पहले बच्चे घंटों बाहर खेलते थे, दौड़ते थे, कूदते थे। लेकिन अब उनका अधिकतर समय घर के अंदर मोबाइल फोन, टैबलेट या टेलीविजन के सामने बीतता है। शारीरिक गतिविधि की कमी से न केवल मोटापा बढ़ता है बल्कि विकास हार्मोन का स्राव भी कम होता है।
स्क्रीन टाइम का लगातार बढ़ना भी एक बड़ा कारण है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम से नींद की गुणवत्ता खराब होती है। वृद्धि हार्मोन मुख्य रूप से गहरी नींद के दौरान स्रावित होता है। जब बच्चे देर रात तक मोबाइल या टीवी देखते हैं तो उनकी नींद प्रभावित होती है और इससे उनकी लंबाई पर नकारात्मक असर पड़ता है।
लंबाई बढ़ाने में योग की भूमिका
स्वामी रामदेव के अनुसार योग लंबाई बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। योग केवल व्यायाम नहीं है बल्कि शरीर के संपूर्ण विकास का माध्यम है। विशेष रूप से सूर्य नमस्कार बच्चों और युवाओं के लिए एक संपूर्ण व्यायाम है जो लंबाई बढ़ाने में सहायक है।
सूर्य नमस्कार में 12 आसन होते हैं जो शरीर के हर अंग को सक्रिय करते हैं। जब आप आगे झुकते हैं तो हैमस्ट्रिंग और पीठ की मांसपेशियां खिंचती हैं। जब पीछे झुकते हैं तो रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है और वह खुलती है। जब शरीर ऊपर उठाते हैं तो ग्रोथ हार्मोन सक्रिय होता है। यह पूरी प्रक्रिया शरीर को लंबाई बढ़ाने के लिए तैयार करती है।
ताड़ासन या माउंटेन पोज भी लंबाई बढ़ाने के लिए बेहद प्रभावी है। इसमें पैर की उंगलियों पर खड़े होकर हाथों को ऊपर की ओर खींचना होता है। यह पूरे शरीर को खींचता है और रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है। भुजंगासन (कोबरा पोज) रीढ़ को लचीला बनाता है और छाती को खोलता है। मार्जरीआसन (कैट-काउ पोज) भी रीढ़ के स्वास्थ्य के लिए उत्कृष्ट है।
शोध बताते हैं कि 60 से 80 प्रतिशत लंबाई आनुवंशिक होती है, लेकिन 20 से 40 प्रतिशत पोषण और जीवनशैली पर निर्भर करती है। इसका मतलब यह है कि आधी लंबाई किस्मत से मिलती है और बाकी आधी आपकी मेहनत से। यदि आप नियमित योग, सही आहार और अच्छी नींद लेते हैं तो अपनी आनुवंशिक क्षमता को अधिकतम कर सकते हैं।
8 से 18 वर्ष की गोल्डन एज
बच्चों के विकास में 8 से 18 वर्ष की आयु सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसे गोल्डन एज कहा जाता है क्योंकि इस समय विकास प्लेट्स यानी ग्रोथ प्लेट्स खुली होती हैं। ये हड्डियों के सिरों पर कार्टिलेज के क्षेत्र होते हैं जो नई हड्डी का निर्माण करते हैं और इस तरह लंबाई बढ़ती है।
यौवनावस्था में विकास हार्मोन का स्राव सबसे अधिक होता है। लड़कियों में यह 8 से 13 वर्ष और लड़कों में 10 से 15 वर्ष की उम्र में शुरू होता है। इस दौरान बच्चे बहुत तेजी से बढ़ते हैं। लड़कियां आमतौर पर 16 वर्ष और लड़के 18 वर्ष की उम्र तक बढ़ते हैं, हालांकि कुछ मामलों में 20-21 वर्ष तक भी वृद्धि हो सकती है।
अगर इस गोल्डन एज में शरीर को सही पोषण, पर्याप्त धूप, उचित नींद और नियमित व्यायाम नहीं मिलता है तो विकास प्लेट्स समय से पहले बंद हो सकती हैं। एक बार जब ये प्लेट्स बंद हो जाती हैं तो लंबाई बढ़ाने का अवसर समाप्त हो जाता है। इसलिए इस उम्र में माता-पिता को बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
स्वामी रामदेव के अनुसार बच्चों की लंबाई बढ़ाने के उपाय
स्वामी रामदेव ने बच्चों की लंबाई बढ़ाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण है नियमित व्यायाम। बढ़ती उम्र के बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 30 से 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। इसमें दौड़ना, कूदना, तैरना, साइकिल चलाना, खेलना शामिल हो सकते हैं। व्यायाम से ग्रोथ हार्मोन सक्रिय होते हैं, रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर की मुद्रा सुधरती है और हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम मोटापे को भी नियंत्रित करता है जो लंबाई को प्रभावित कर सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है पोषण। घर का बना ताजा और पौष्टिक खाना बच्चों को देना चाहिए। खाने में फल, सब्जियां, दालें, अनाज, दूध और दूध से बने उत्पादों को शामिल करें। प्रोटीन युक्त आहार जैसे दाल, राजमा, छोले, पनीर, दूध, दही, अंडे (यदि शाकाहारी नहीं हैं) जरूर दें। जंक फूड, पैकेट बंद स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों से बचें। ये खाली कैलोरी देते हैं लेकिन पोषण नहीं देते।
तीसरा है स्क्रीन टाइम को कम करना और शारीरिक गतिविधि बढ़ाना। बच्चों को मोबाइल, टैबलेट और टेलीविजन से दूर रखें। इसकी जगह उन्हें बाहर खेलने, दौड़ने और सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करें। स्क्रीन टाइम से न केवल शारीरिक विकास प्रभावित होता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।
चौथा है स्वस्थ दिनचर्या अपनाना। बच्चों को सुबह जल्दी उठने और रात में समय पर सोने की आदत डालें। एक नियमित दिनचर्या बनाएं जिसमें पढ़ाई, खेल, व्यायाम और आराम के लिए निश्चित समय हो। कम से कम 30 मिनट का व्यायाम या योग दैनिक रूटीन में जरूर शामिल करें। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद भी बेहद जरूरी है। बच्चों को 8 से 10 घंटे की नींद अवश्य मिलनी चाहिए।
How To Increase Children Height: पोषण संबंधी विशेष सुझाव
स्वामी रामदेव ने कुछ विशेष पोषण संबंधी सुझाव भी दिए हैं। बच्चों को दूध शतावरी शेक पिलाएं। शतावरी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो शारीरिक विकास में सहायक है। केले का शेक भी बेहद पौष्टिक है। केले में प्रोटीन, विटामिन और खनिज होते हैं। खजूर-अंजीर शेक भी उत्कृष्ट है। खजूर और अंजीर में कैल्शियम, आयरन और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं।
अश्वगंधा भी लंबाई बढ़ाने में सहायक माना जाता है। यह विकास हार्मोन को उत्तेजित करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है। लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह से और उचित मात्रा में ही लें। बादाम, अखरोट जैसे मेवे भी बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इन्हें रात में भिगोकर सुबह खाएं।
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी में आयरन और कैल्शियम होता है। गाजर में विटामिन ए होता है जो समग्र विकास के लिए आवश्यक है। अपनी लंबाई बढ़ाने की यात्रा आज से ही शुरू करें और अगली पीढ़ी को स्वस्थ और मजबूत बनाएं।



