Ranchi News: शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए रांची नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। सिटी लेवल इंप्लीमेंटेशन कमिटी की 11वीं बैठक में एंटी स्माग गन, स्प्रिंकलर और मैकेनिकल स्विपिंग मशीन खरीदने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार को नगर निगम सभागार में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता प्रशासक सुर्शात गौरव ने की। बैठक में परिवेशी वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा की गई और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
गैप असेसमेंट के आधार पर होगी मशीनों की खरीद

बैठक में रांची जैसे शहरी इलाकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गैप असेसमेंट कराने का फैसला किया गया। इसी आकलन के आधार पर एंटी स्माग गन, स्प्रिंकलर और मैकेनिकल स्विपिंग मशीनों की खरीद के लिए नए प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। प्रशासक ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से हासिल करने के लिए जल्द से जल्द कार्ययोजना बनाई जाए।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, एंटी स्माग गन से धूल कणों को नियंत्रित किया जा सकेगा। यह मशीन हवा में फैले सूक्ष्म कणों पर पानी का छिड़काव कर उन्हें जमीन पर बैठा देती है। वहीं, स्प्रिंकलर सिस्टम से सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा, जिससे धूल उड़ने की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
मैकेनिकल स्विपिंग मशीन की मदद से शहर की मुख्य सड़कों की साफ-सफाई अधिक कुशलता से की जा सकेगी। परंपरागत सफाई विधियों की तुलना में यह मशीन धूल को कम उड़ाती है और सफाई का काम तेजी से पूरा करती है।
निर्माण स्थलों पर ग्रीन शीट कवर अनिवार्य
वायु प्रदूषण के एक प्रमुख स्रोत निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि शहर के सभी निर्माणाधीन भवनों और कंस्ट्रक्शन साइट्स को ग्रीन शीट से ढकना अनिवार्य होगा। इससे निर्माण सामग्री से उड़ने वाली धूल पर अंकुश लगेगा।
प्रशासक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम की गाइडलाइंस का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माण ठेकेदारों और बिल्डरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम की विशेष टीम निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण करेगी और नियमों के पालन की निगरानी रखेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण गतिविधियों से शहरी इलाकों में पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। ग्रीन शीट का उपयोग इन कणों को नियंत्रित करने का एक प्रभावी तरीका है।
हरित आवरण बढ़ाने पर विशेष बल
वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए शहर में हरित आवरण बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशासक सुर्शात गौरव ने हार्टिकल्चर शाखा को निर्देशित किया कि नगर निगम क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त स्थलों की पहचान की जाए और अधिकतम संख्या में पौधे लगाए जाएं।
पेड़-पौधे प्राकृतिक रूप से वायु को शुद्ध करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं। शहरी क्षेत्रों में अधिक पेड़ लगाने से तापमान में कमी आती है और वायु की गुणवत्ता बेहतर होती है। नगर निगम पार्कों, सड़कों के किनारे, सार्वजनिक भवनों और खाली पड़ी भूमि पर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाएगा।
इसके अलावा, मौजूदा पेड़ों की देखभाल और रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाएगा। शहर के विभिन्न हिस्सों में फलदार और छायादार वृक्ष लगाने की योजना है।
वैज्ञानिक पद्धति से होगी वायु गुणवत्ता की निगरानी
बैठक में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की वैज्ञानिक तरीके से जांच करने के लिए रूट प्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया। एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा, जो नियमित रूप से विभिन्न इलाकों में वायु की गुणवत्ता की जांच करेगी।
यह टीम पीएम 2.5, पीएम 10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषक तत्वों के स्तर की निगरानी करेगी। एकत्रित आंकड़ों के आधार पर प्रदूषण के हॉटस्पॉट की पहचान की जाएगी और उन क्षेत्रों में विशेष उपाय किए जाएंगे।
वायु गुणवत्ता डेटा को सार्वजनिक किया जाएगा ताकि नागरिकों को अपने क्षेत्र की वायु स्थिति की जानकारी मिल सके। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहेंगे।
ई-व्हीकल को मिलेगा प्रोत्साहन
स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से ई-व्हीकल को प्रोत्साहन देने पर चर्चा की गई। पेट्रोल और डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है। इलेक्ट्रिक वाहन पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और इनसे किसी तरह का उत्सर्जन नहीं होता।
नगर निगम सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग को बढ़ावा देगा। साथ ही, निजी वाहन मालिकों को ई-व्हीकल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न योजनाओं और सब्सिडी की संभावना तलाशी जा रही है।
बैठक में उपलब्ध फंड्स का अधिकतम और कारगर उपयोग सुनिश्चित करने की रणनीति पर भी विस्तार से बात हुई। एविएंट एयर क्वालिटी इंप्रूवमेंट के तहत मिले धन का सदुपयोग प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रमों में किया जाएगा।
जनजागरूकता अभियान पर जोर
वायु प्रदूषण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक आईईसी गतिविधियां आयोजित करने का निर्णय लिया गया। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों और उससे बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी।
शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों को प्रदूषण नियंत्रण में उनकी भूमिका के बारे में बताया जाएगा। पोस्टर, बैनर और डिजिटल माध्यमों से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। नागरिकों से अपील की गई है कि वे व्यक्तिगत वाहनों का कम से कम उपयोग करें, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें और कूड़ा जलाने से बचें।
Ranchi News: बैठक में कौन थे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण बैठक में उप प्रशासक गौतम प्रसाद साहू, सहायक प्रशासक, नगर प्रबंधक के अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण परिषद, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रांची वन प्रमंडल और बीआईटी मेसरा के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में किए जा रहे प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की जानकारी दी और आगे की कार्ययोजना पर सुझाव दिए।
रांची नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास करें। अधिक से अधिक पेड़ लगाएं, प्लास्टिक के उपयोग से बचें और शहर को स्वच्छ, सुंदर एवं स्वस्थ बनाए रखने में सक्रिय सहयोग दें। केवल सरकारी प्रयासों से प्रदूषण पर काबू नहीं पाया जा सकता, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे।



