March Festival 2026: भारतीय पंचांग के अनुसार, मार्च 2026 का महीना धार्मिक त्योहारों और व्रतों से परिपूर्ण होने वाला है। होलिका दहन और होली जैसे प्रमुख त्योहारों से लेकर चैत्र नवरात्र की शुरुआत तक, यह पूरा महीना भक्ति और उल्लास से भरा रहने वाला है।
मार्च 2026: धार्मिक महत्व और उत्सव
मार्च का महीना भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख त्योहार और व्रत पड़ते हैं। यह महीना फाल्गुन की समाप्ति और चैत्र मास की शुरुआत का प्रतीक है, जो हिंदू नववर्ष की दहलीज पर खड़ा है। धार्मिक दृष्टिकोण से, यह अवधि आध्यात्मिक साधना और सामुदायिक उत्सवों, दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष से होती है। मार्च 2026 में, यह महीना 04 मार्च को होली के त्योहार के साथ शुरू होगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
01 मार्च: रवि प्रदोष व्रत
मार्च का महीना रवि प्रदोष व्रत के साथ शुरू हो रहा है, जो भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। प्रदोष व्रत प्रत्येक चंद्र मास के त्रयोदशी तिथि पर पड़ता है, और जब यह रविवार को आता है, तो इसे विशेष महत्व प्राप्त होता है।
03 मार्च: होलिका दहन और चंद्र ग्रहण
मार्च का तीसरा दिन होलिका दहन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो होली के त्योहार से एक दिन पहले मनाया जाने वाला अनुष्ठान है। इस वर्ष, होलिका दहन का समय शाम 06 बजकर 48 मिनट से रात 08 बजकर 50 मिनट तक है।
इसके अतिरिक्त, इस तिथि को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है, जो खगोल विज्ञान और आध्यात्मिकता के दृष्टिकोण से विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। चंद्र ग्रहण का समय भारतीय समयानुसार रात 11 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर मध्यरात्रि 01 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
04 मार्च: होली का त्योहार

होली, रंगों का त्योहार, 04 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और पौराणिक कथाओं में प्रह्लाद की भक्ति और होलिका के दहन का स्मरण कराता है। चैत्र माह की शुरुआत भी इसी दिन से मानी जाती है।
05 मार्च: होली भाई दूज
होली के उत्सव का सिलसिला भाई दूज के साथ जारी रहता है, जो रक्षा बंधन की तरह ही भाई-बहन के प्रेम को समर्पित है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
06 मार्च: भालचन्द्र संकष्टी
भालचन्द्र संकष्टी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और इसे चंद्रमा उदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर मनाया जाता है। इस व्रत को रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
08 मार्च: रंग पंचमी
रंग पंचमी, जो होली के उत्सव को पांच दिन आगे बढ़ाती है, 08 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान कृष्ण और राधा की लीलाओं का स्मरण किया जाता है और रंगों के साथ उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।
10 मार्च: शीतला सप्तमी
शीतला सप्तमी शीतला माता को समर्पित है, जिन्हें चेचक और बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने वाली माना जाता है। इस दिन ठंडे भोजन का सेवन किया जाता है और माता का आशीर्वाद लिया जाता है।
11 मार्च: शीतला अष्टमी और कालाष्टमी
11 मार्च को शीतला अष्टमी और कालाष्टमी दोनों मनाई जाती हैं। शीतला माता की पूजा के साथ ही, भगवान काल भैरव को समर्पित कालाष्टमी का व्रत भी इस दिन पड़ता है।
15 मार्च: पापमोचनी एकादशी
पापमोचनी एकादशी, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है, पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान है।
17 मार्च: मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित है और इसे मार्च के महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस रात को शिव लिंग का विशेष अभिषेक किया जाता है।
18 मार्च: चैत्र अमावस्या
चैत्र अमावस्या हिंदू नववर्ष के पहले महीने के अंत का प्रतीक है। यह दिन पितरों की शांति के लिए और नए महीने की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण है।
19 मार्च: चैत्र नवरात्र का शुभारंभ
चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होकर नौ दिनों तक चलेंगे। इस वर्ष घटस्थापना का शुभ समय सुबह 06 बजकर 52 मिनट से 07 बजकर 46 मिनट तक है। अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक होगी।
19 मार्च: गुड़ी पड़वा और उगादि
चैत्र नवरात्र के पहले दिन, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना में उगादि मनाई जाती है। यह दिन नए साल की शुरुआत का प्रतीक है।
22 मार्च: वासुदेव चतुर्थी
वासुदेव चतुर्थी भगवान कृष्ण को समर्पित है और इसे चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
23 मार्च: लक्ष्मी पञ्चमी
लक्ष्मी पञ्चमी चैत्र मास की पंचमी तिथि को पड़ती है और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
24 मार्च: रोहिणी व्रत और स्कन्द षष्ठी
24 मार्च को रोहिणी व्रत और स्कन्द षष्ठी दोनों मनाई जाती हैं। स्कन्द षष्ठी भगवान कार्तिकेय के जन्म का उत्सव है।
26 मार्च: राम नवमी
राम नवमी, भगवान राम के जन्म का उत्सव, मार्च 2026 में 26 मार्च को मनाया जाएगा। यह हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।
29 मार्च: कामदा एकादशी
मार्च महीने का समापन कामदा एकादशी के साथ होगा, जो भगवान विष्णु को समर्पित है और मोक्ष प्राप्ति में सहायक मानी जाती है।
30 मार्च: कामदा एकादशी पारण
कामदा एकादशी का व्रत 30 मार्च को पारण के साथ समाप्त होगा, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ता है।
क्षेत्रीय विविधता: अलग-अलग राज्यों में अलग उत्सव
मार्च का महीना भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है, जहाँ हर राज्य में अलग-अलग परंपराओं के साथ त्योहार मनाए जाते हैं। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र प्रदेश में उगादि, पश्चिम बंगाल में डोल यात्रा और पंजाब में होला मोहल्ला एक साथ मनाए जाते हैं।
आध्यात्मिक महत्व और आधुनिक प्रासंगिकता
ये त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज के दौर में, ये त्योहार लोगों को आधुनिक जीवनशैली के बीच अपनी जड़ों से जोड़े रखने का अवसर प्रदान करते हैं।
स्वास्थ्य और सुरक्षा के पहलू
होली जैसे त्योहारों के दौरान सुरक्षा के विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरण के अनुकूल रंगों का उपयोग करें और पानी बचाएं।
March Festival 2026: एकता में विविधता का उत्सव
मार्च 2026 का महीना भारत की ‘विविधता में एकता’ का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करता है। ये त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण हैं। ये त्योहार भारत की सभ्यतागत विरासत को संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह लेख उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। सटीक समय और विवरण के लिए स्थानीय पंचांग और धार्मिक विशेषज्ञों से परामर्श लें।



