- Vastu Tips: शनिवार को शमी का पौधा लगाना सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि यह शनि देव को प्रिय है। लेकिन वास्तु शास्त्र में शमी को बहुत शक्तिशाली पौधा बताया गया है, जो सही जगह लगाने पर धन, सुख और विजय देता है, गलत जगह पर नकारात्मकता बढ़ा सकता है। छोटे शहरों और गांवों के लोग जो शमी लगाकर शनि दोष दूर करना चाहते हैं, उन्हें इन 7 नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। नहीं तो घर में क्लेश, धन हानि या स्वास्थ्य समस्याएं आ सकती हैं।
1 दिशा का विशेष ध्यान: उत्तर-पूर्व या पूर्व में ही लगाएं
शमी का पौधा हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में लगाएं। यहाँ लगाने से शनि की कृपा और लक्ष्मी का वास होता है। दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण में कभी न लगाएं, वहां शनि की नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में कलह रहता है।
2 घर के अंदर शमी न लगाएं, बाहर ही रखें
शमी को घर के अंदर गमले में रखना वर्जित है। यह बाहर मुख्य द्वार के दाएं या बाएं तरफ या आंगन में लगाएं। घर के अंदर रखने से राहु-केतु का दोष बढ़ता है और मानसिक तनाव रहता है।
3 शमी का पौधा कभी सूखने न दें
शमी का पौधा सूख जाए तो इसे तुरंत हटा दें। सूखा शमी पौधा घर में दरिद्रता और शनि की पीड़ा लाता है। अगर पत्तियां पीली पड़ने लगें तो रोज जल दें और शनिवार को सरसों का तेल चढ़ाएं।
4 शमी की जड़ या पत्ते घर में न रखें
विजयादशमी पर शमी के पत्ते लाना शुभ है, लेकिन साल भर घर में रखना अशुभ। जड़ या छाल भी घर में न रखें। इससे शनि और राहु का प्रकोप बढ़ता है।
5 शमी के नीचे कोई मूर्ति या पूजा स्थल न बनाएं
शमी के नीचे शिवलिंग, हनुमान जी या किसी देवता की मूर्ति रखना वर्जित है। यह शनि और उस देवता के बीच द्वंद्व पैदा करता है। पूजा के लिए शमी के पत्ते तोड़कर लाएं, लेकिन पेड़ के नीचे पूजा न करें।
6 शमी का पौधा दान न करें, खुद लगाएं
शमी का पौधा किसी को दान में न दें। खुद खरीदकर या किसी से मांगकर लगाएं। दान करने से शनि की कृपा कम हो जाती है।
7 शमी लगाने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें
शमी लगाने से पहले हनुमान चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें। पौधे के चारों ओर सरसों का तेल और काले तिल छिड़कें। इससे शनि की नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
शमी का पौधा सही नियमों से लगाएं तो शनि दोष, पितृ दोष और कालसर्प दोष में राहत मिलती है। लेकिन गलत जगह या तरीके से लगाने से उल्टा असर होता है। इन नियमों का पालन करें तो घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।


