West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं और ऐसे नाजुक वक्त में दक्षिण 24 परगना जिले के रायदीघी इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां भारतीय जनता पार्टी के एक स्थानीय कार्यकर्ता की बेहद बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे इलाके में डर और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। भाजपा ने इस हत्या के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि पुलिस ने अब तक इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
कौन थे किशोर माजी?
मृतक की पहचान किशोर माजी के रूप में हुई है, जिनकी उम्र महज 37 साल थी। वे दिघीरपाड़-बकुलतला ग्राम पंचायत के रहने वाले थे और भाजपा के 216 नंबर बूथ के सह-अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक किशोर अपने इलाके में काफी सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता थे और पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करते थे। चुनाव का माहौल था, बूथ स्तर पर काम तेज था और ऐसे में उनकी हत्या ने भाजपा कार्यकर्ताओं में गुस्से और दहशत की लहर पैदा कर दी है।
कैसे हुई हत्या?
पुलिस के मुताबिक सोमवार की रात किशोर माजी को किसी ने फोन करके घर से बाहर बुलाया। वे फोन पर बात करते हुए घर से निकले और फिर वापस नहीं लौटे। कुछ समय बाद उनका खून से लथपथ शव पास के इलाके में मिला। गला रेतकर की गई इस हत्या को देखकर साफ था कि यह कोई साधारण वारदात नहीं थी। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया ताकि हालात काबू में रहें।
पत्नी और पड़ोसी को क्यों किया गिरफ्तार?
जांच के शुरुआती घंटों में ही पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले। सुंदरबन जिले के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला विवाहेतर संबंध से जुड़ा हुआ लग रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने किशोर माजी की पत्नी और उनके एक पड़ोसी युवक को गिरफ्तार किया है। दोनों से अभी पूछताछ जारी है। पुलिस का मानना है कि इस हत्या की साजिश पहले से रची गई थी और फोन पर बुलाकर किशोर को जानबूझकर घर से बाहर निकाला गया था। हालांकि पूरी सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
परिवार ने जताई साजिश की आशंका
किशोर माजी के परिवार वालों का कहना है कि उनकी हत्या एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। परिवार के मुताबिक उस रात अज्ञात लोगों ने किशोर को फोन करके बाहर बुलाया था। परिजनों का कहना है कि पुलिस जो भी कह रही है, वह पूरी सच्चाई नहीं है। उनके घर वालों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और असली दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले। परिवार की मांग है कि किसी भी दबाव में आकर जांच की दिशा न बदली जाए।
भाजपा ने लगाया तृणमूल पर आरोप
मंगलवार की सुबह रायदीघी से भाजपा के चुनावी उम्मीदवार पलाश राणा सीधे मृतक के घर पहुंचे और परिवार से मिले। उन्होंने खुलकर आरोप लगाया कि इस हत्या के पीछे तृणमूल कांग्रेस का हाथ है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं को डराने और खत्म करने की कोशिश की जा रही है। पलाश राणा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार और पुलिस दोनों पर उन्हें भरोसा नहीं है क्योंकि इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं और हर बार उन्हें व्यक्तिगत विवाद बताकर दबाने की कोशिश होती है।
इस हत्या के विरोध में भाजपा ने उसी दिन शाम चार बजे रायदीघी थाने का घेराव करने का आह्वान किया। पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किया। माहौल काफी गरम था और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
तृणमूल ने बताया निजी विवाद
तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी की तरफ से कहा गया कि इस घटना का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। तृणमूल के नेताओं ने इसे पूरी तरह एक पारिवारिक और व्यक्तिगत विवाद का नतीजा बताया और कहा कि भाजपा बिना किसी आधार के उनकी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है और जांच का इंतजार किए बिना सियासी बयानबाजी करना सही नहीं है।
पुलिस की जांच और सुरक्षा व्यवस्था
सुंदरबन जिले के पुलिस अधीक्षक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक जो सुराग मिले हैं, उनसे विवाहेतर संबंध का मामला सामने आया है, लेकिन किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पूरी जांच जरूरी है। पूछताछ के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया है। किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए रायदीघी और आसपास के गांवों में गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की है।
चुनाव से पहले बंगाल में हिंसा का पैटर्न
पश्चिम बंगाल में चुनाव के समय हिंसा की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। राज्य में हर चुनाव से पहले और बाद में राजनीतिक हिंसा की खबरें आती रहती हैं। भाजपा लगातार यह आरोप लगाती रही है कि तृणमूल सरकार के दौर में विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जाता है। दूसरी तरफ तृणमूल का कहना है कि भाजपा हर छोटी-बड़ी घटना को राजनीतिक रंग देती है। इन दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला चुनाव दर चुनाव जारी है।
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