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लाल सागर में फिर भड़की हिंसा: यमन तट के पास व्यापारिक जहाज पर हमला

मुख्य बातें

  • सुरक्षा बलों ने दिया करारा जवाब
  • हूती विद्रोहियों पर शक गहराया
  • 2023 से अब तक 100 से ज्यादा जहाजों पर हमला
7 जुलाई 2025
लाल सागर में फिर भड़की हिंसा: यमन तट के पास व्यापारिक जहाज पर हमला

मध्य पूर्व पहले से ही युद्ध और संघर्ष की आग में झुलस रहा है और अब यमन के पास लाल सागर (रेड सी) में एक नया हमला सामने आया है। रविवार को इस संवेदनशील समुद्री मार्ग में एक कमर्शियल जहाज पर अज्ञात सशस्त्र हमलावरों ने हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने न केवल गोलियां चलाईं, बल्कि रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) का भी इस्तेमाल किया।

सुरक्षा बलों ने दिया करारा जवाब

ब्रिटेन के यूनाइटेड किंगडम मरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) सेंटर के अनुसार, हमले के वक्त जहाज पर मौजूद सुरक्षा टीम ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की और हमलावरों पर गोलियां चलाईं। घटना के बाद जहाज की सुरक्षा व्यवस्था और समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर फिर बहस तेज हो गई है।

हूती विद्रोहियों पर शक गहराया

यमन के हूती विद्रोही समूह की गतिविधियों को देखते हुए संदेह की सुई एक बार फिर उन्हीं पर टिक गई है। पिछले कुछ महीनों में हूतियों ने इस क्षेत्र में कई वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों को निशाना बनाया है। हूती गुट दावा करता है कि उसके ये हमले गाजा में चल रहे इस्राइली कार्रवाई के विरोध में हैं।

2023 से अब तक 100 से ज्यादा जहाजों पर हमला

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2023 से लेकर जनवरी 2025 तक हूती लड़ाकों ने रेड सी में 100 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया है। इनमें से दो जहाज पूरी तरह डूब चुके हैं, जबकि चार नाविकों की जान भी जा चुकी है। इन घटनाओं ने वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा खड़ा कर दिया है।

वैश्विक व्यापार पर गहराया संकट

रेड सी, विशेष रूप से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, विश्व व्यापार का एक अहम मार्ग है। इस रास्ते से हर साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की वस्तुओं की आवाजाही होती है। लेकिन लगातार हो रहे हमलों के कारण इस क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। जहाज कंपनियां अब इस मार्ग से दूरी बनाने पर विचार कर रही हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर पड़ रहा है।

दुनिया की नजर रेड सी पर

इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राष्ट्र लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह इलाका, अगर अस्थिर होता रहा, तो न केवल व्यापार बल्कि भू-राजनीतिक तनाव भी और बढ़ सकते हैं।

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कवरेज: Krishan Mohan shukla, News Media Kiran

Krishan Mohan shukla

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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