Top 5 This Week

Related Posts

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव सिर्फ 3 चरणों में होने की संभावना, 2.4 लाख केंद्रीय बल तैयार

West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय निर्वाचन आयोग इस बार मतदान के चरणों को काफी कम करने की योजना बना रहा है। साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को पहले से कहीं ज्यादा बढ़ाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग इस बार चुनाव को दो या तीन चरणों में ही पूरा करने के लिए गंभीरता से विचार कर रहा है।

2.4 लाख केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात होंगे

West Bengal Election: Central Security Force
West Bengal Election: Central Security Force

राज्य प्रशासन के सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने एक आंतरिक अनुमान तैयार किया है। इस अनुमान में बताया गया है कि इस बार चुनाव कराने के लिए लगभग 2000 कंपनी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल यानी सीएपीएफ की जरूरत होगी। यानी करीब 2.4 लाख सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाएंगे।

यह संख्या 2021 के विधानसभा चुनाव में तैनात बलों की लगभग दोगुनी है। सूत्रों का कहना है कि यह संख्या और भी बढ़ सकती है। इतनी बड़ी तैनाती की जरूरत चुनाव कार्यक्रम को संक्षिप्त करने और राज्य की खास सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए पड़ेगी।

2021 में 8 चरणों में हुआ था चुनाव

साल 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 8 चरणों में हुआ था। यह चुनाव 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच 292 सीटों के लिए कराया गया था। दो अतिरिक्त सीटों पर विशेष परिस्थितियों के कारण 30 सितंबर को मतदान हुआ था। लेकिन इस बार स्थिति पूरी तरह अलग होगी।

निर्वाचन आयोग में अच्छी तरह से जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग बंगाल चुनाव को दो या तीन चरणों तक सीमित रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। यह 2021 में अपनाई गई आठ चरण की व्यवस्था से बिल्कुल अलग होगा। सूत्रों के मुताबिक आयोग इस बात को लेकर दृढ़ है कि इस बार चुनाव तीन चरण से अधिक नहीं होगा।

5 जनवरी की बैठक में हुई चर्चा

यह मुद्दा 5 जनवरी को हुई एक अहम बैठक में विस्तार से चर्चा का विषय बना। इस बैठक में निर्वाचन आयोग ने सभी चुनाव वाले राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मुलाकात की। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अपना आकलन पेश किया कि पश्चिम बंगाल में चरणों की संख्या को कितना कम किया जा सकता है।

बैठक के दौरान हुई चर्चाओं के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग को बताया कि राज्य मशीनरी तीन चरणों में मतदान पूरा करने के लिए तैयार है। हालांकि ऐसा करने के लिए केंद्रीय बलों की काफी ज्यादा तैनाती जरूरी होगी।

सूत्रों ने बताया कि अग्रवाल ने कहा कि 2021 में इस्तेमाल किए गए सीएपीएफ कर्मियों की संख्या से कम से कम दोगुने सुरक्षाकर्मियों की आवश्यकता होगी। किसी भी अतिरिक्त जरूरत का आकलन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए राज्य पुलिस कर्मियों की संख्या के आधार पर किया जाएगा।

भाजपा का 2021 का आकलन

केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर राजनीतिक विचार भी इस सोच को आकार दे रहे हैं। एक केंद्रीय मंत्री ने गुमनाम रहने की शर्त पर बताया कि पश्चिम बंगाल की अपनी आखिरी यात्रा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा के मुख्य समूह से कहा था कि 2021 में असामान्य रूप से लंबा चुनाव कार्यक्रम तृणमूल कांग्रेस के फायदे में गया था। यह यात्रा 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई थी।

2021 के विधानसभा चुनाव का लंबा खिंचाव अनपेक्षित परिणाम लेकर आया था। जब तक मतदान आधे से अधिक हो गया, तब तक कोविड-19 की दूसरी लहर आ चुकी थी। इसने प्रचार और मतदाताओं को जुटाने पर गंभीर असर डाला था।

ऐतिहासिक रुझान के विपरीत होगा फैसला

ऐतिहासिक रूप से पश्चिम बंगाल में सुरक्षा चिंताओं के कारण मतदान चरणों में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। साल 2011 का विधानसभा चुनाव छह चरणों में हुआ था। इसके बाद 2016 में सात चरण और 2021 में आठ चरण में चुनाव हुए। अगर निर्वाचन आयोग आगामी चुनाव को दो या तीन चरणों तक सीमित करने में सफल होता है तो यह इस रुझान से निर्णायक विचलन होगा।

यह बदलाव पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ऐसा कदम केवल बड़े पैमाने पर केंद्रीय बल समर्थन, सख्त रसद और चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन के बीच निकट समन्वय के साथ ही संभव होगा।

भारी सुरक्षा बल की जरूरत क्यों?

चुनाव के चरणों को कम करने का सीधा मतलब है कि एक साथ ज्यादा सीटों पर मतदान होगा। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना जरूरी हो जाता है। पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हमेशा सुरक्षा को लेकर खास सतर्कता बरती जाती है।

राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तनाव और कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती जरूरी मानी जा रही है। 2.4 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हो।

कोविड की दूसरी लहर का अनुभव

2021 के चुनाव में लंबे चुनाव कार्यक्रम का एक बड़ा नुकसान यह हुआ कि बीच में कोविड-19 की दूसरी लहर आ गई। इससे प्रचार गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। रैलियां और जनसभाएं रद्द करनी पड़ीं। मतदाताओं तक पहुंचना मुश्किल हो गया।

इस अनुभव से सबक लेते हुए अब चुनाव आयोग चाहता है कि चुनाव जल्द से जल्द पूरा हो जाए। दो या तीन चरणों में चुनाव कराने से किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटना आसान होगा।

तृणमूल को फायदा हुआ था

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मानना है कि 2021 में लंबे चुनाव कार्यक्रम से तृणमूल कांग्रेस को फायदा हुआ था। जब कोविड की दूसरी लहर आई तो भाजपा की प्रचार मशीनरी बुरी तरह प्रभावित हुई। वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर सकी।

इस बार भाजपा यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चुनाव जल्दी और एक साथ हो जाए। इससे सभी दलों को बराबर का मौका मिलेगा। लंबे चुनाव से किसी एक दल को अनुचित फायदा नहीं मिल पाएगा।

अंतिम फैसला जमीनी आकलन के बाद

अधिकारियों ने बताया कि चरणों और तैनाती पर अंतिम फैसला तब लिया जाएगा जब आयोग अपने जमीनी आकलन को पूरा कर लेगा। चुनाव आयोग की टीमें राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर सुरक्षा स्थिति का आकलन करेंगी। स्थानीय प्रशासन से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी।

केंद्रीय बलों की उपलब्धता भी एक अहम कारक होगी। चूंकि अन्य राज्यों में भी चुनाव होने हैं, इसलिए बलों को उचित तरीके से बांटना होगा। लेकिन पश्चिम बंगाल को प्राथमिकता के आधार पर पर्याप्त बल उपलब्ध कराए जाएंगे।

सख्त रसद और समन्वय जरूरी

दो या तीन चरणों में चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए सख्त रसद व्यवस्था की जरूरत होगी। मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। सुरक्षा बलों की तैनाती को सही तरीके से प्लान करना होगा।

चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन के बीच निकट समन्वय बेहद जरूरी है। दोनों को मिलकर काम करना होगा ताकि चुनाव सुचारू रूप से संपन्न हो सके। किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कड़ी निगरानी रहेगी

चुनाव के दौरान कड़ी निगरानी रखी जाएगी। सीसीटीवी कैमरों से लैस मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी। उड़न दस्ते लगातार गश्त करेंगे। किसी भी अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार किसी भी तरह की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।

West Bengal Election: छोटा लेकिन सुरक्षित चुनाव

अब तक जो संकेत मिले हैं उनसे साफ है कि बंगाल का चुनाव पहले से छोटा, अधिक कसकर प्रबंधित और पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होगा। यह पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में एक नया अध्याय होगा।

चुनाव आयोग का यह कदम चुनाव प्रबंधन में एक नई मिसाल कायम कर सकता है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में अन्य राज्यों में भी इसे अपनाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए सभी पक्षों का सहयोग और बेहतरीन तैयारी जरूरी है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles