Migraine in Summer: गर्मियों में धूप में थोड़ी देर भी रहने से कई लोगों को सिरदर्द शुरू हो जाता है। आंखों में चुभन, उल्टी जैसा महसूस होना और तेज रोशनी बर्दाश्त न करना- ये सब माइग्रेन के आम लक्षण हैं। माइग्रेन सिर्फ साधारण सिरदर्द नहीं है, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तेज धूप माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले सबसे बड़े कारणों में से एक है। अगर आपको भी धूप में निकलते ही माइग्रेन की समस्या होती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
माइग्रेन क्या है और क्यों होता है यह दर्द?
माइग्रेन एक प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें दिमाग की नसों, रासायनिक पदार्थों और नर्व सिग्नल्स में अचानक बदलाव आ जाते हैं। इस वजह से सिर के एक तरफ तेज दर्द होता है जो कई घंटों से लेकर 2-3 दिन तक भी रह सकता है। कई बार दर्द के साथ आंखों के सामने चमकदार रोशनी या काले धब्बे भी दिखाई देते हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि माइग्रेन के पीछे आनुवंशिक कारण, मस्तिष्क में रासायनिक बदलाव और पर्यावरणीय फैक्टर्स मुख्य भूमिका निभाते हैं। अगर परिवार में किसी को माइग्रेन है तो आपको भी इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव जैसे पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के समय माइग्रेन अटैक की संभावना बढ़ जाती है।
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता स्क्रीन टाइम, नींद की कमी, अनियमित खानपान और लगातार तनाव ने माइग्रेन की समस्या को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों का नर्वस सिस्टम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होता है, इसलिए छोटी-छोटी चीजें भी उन्हें प्रभावित कर देती हैं।
धूप क्यों बन जाती है माइग्रेन का बड़ा ट्रिगर?

तेज धूप माइग्रेन का सबसे आम ट्रिगर मानी जाती है। धूप में ज्यादा चमकदार रोशनी आंखों और दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालती है। इससे ब्रेन की संवेदनशील नसें सक्रिय हो जाती हैं और माइग्रेन अटैक शुरू हो जाता है। माइग्रेन वाले लोगों में फोटोफोबिया यानी रोशनी के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता बहुत आम है।
गर्मियों में धूप के कारण शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी हो जाता है, जो माइग्रेन को और बढ़ावा देता है। धूप में देर तक रहने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है, ब्लड वेसल्स फैलती हैं और दर्द तेज हो जाता है। कई लोग बताते हैं कि सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच धूप में निकलते ही उनका माइग्रेन शुरू हो जाता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, धूप के अलावा चमकदार रोशनी, कंप्यूटर या मोबाइल की स्क्रीन से आने वाली ब्लू लाइट भी माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती है। इसलिए जो लोग पहले से माइग्रेन से परेशान हैं उन्हें धूप में निकलते समय खास सावधानी बरतनी चाहिए।
ये अन्य चीजें भी बढ़ा सकती हैं माइग्रेन का खतरा
धूप के अलावा कई और फैक्टर्स माइग्रेन अटैक को आमंत्रित कर सकते हैं। लगातार तनाव लेना माइग्रेन का बड़ा कारण है। काम का प्रेशर, परिवार की चिंता या भावनात्मक तनाव दिमाग पर बोझ डालता है और दर्द शुरू कर देता है।
नींद का सही समय पर न होना या बहुत ज्यादा सोना भी समस्या पैदा कर सकता है क्योंकि इससे शरीर का जैविक चक्र बिगड़ जाता है। कई लोग देर रात काम करते हैं या मोबाइल देखते रहते हैं, जिससे नींद पूरी नहीं होती और अगले दिन माइग्रेन हो जाता है।
भूखे रहना या अनियमित समय पर खाना खाना भी माइग्रेन ट्रिगर कर सकता है। खासकर महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण माइग्रेन की शिकायत ज्यादा देखी जाती है। तेज आवाज, परफ्यूम की तेज गंध, धुआं, प्रदूषण और मौसम में अचानक बदलाव जैसे गर्मी, ठंड या बारिश भी माइग्रेन को बढ़ावा दे सकते हैं।
माइग्रेन से बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
माइग्रेन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है अपने ट्रिगर्स को समझना और उनसे दूर रहना। अगर धूप से समस्या होती है तो बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी का सनग्लास पहनें। छाता या कैप का इस्तेमाल करें ताकि तेज रोशनी सीधे आंखों पर न पड़े।
शरीर को हमेशा हाइड्रेट रखें। दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर पानी जरूर पीएं। गर्मियों में नारियल पानी या नींबू पानी भी फायदेमंद होता है। नींद का नियमित शेड्यूल बनाएं। रोजाना रात को तय समय पर सोएं और सुबह उठें।
तनाव कम करने के लिए रोजाना 15-20 मिनट योग या मेडिटेशन करें। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज भी बहुत मदद करती है। खाना समय पर और नियमित रूप से खाएं। लंबे समय तक भूखे न रहें।
अगर माइग्रेन बार-बार हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। डॉक्टर कुछ दवाइयां दे सकते हैं जो अटैक आने पर तुरंत राहत देती हैं या फिर अटैक को रोकने में मदद करती हैं। कुछ लोगों को लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव से ही काफी फायदा होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि माइग्रेन पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है। ट्रिगर्स से बचाव, स्वस्थ आदतें और जरूरत पड़ने पर दवा से ज्यादातर लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं।
कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
अगर सिरदर्द बहुत तेज है, बार-बार हो रहा है, आंखों में धुंधलापन या कमजोरी महसूस हो रही है या दर्द के साथ बुखार, गर्दन में अकड़न जैसी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कभी-कभी ये लक्षण किसी और गंभीर समस्या के भी हो सकते हैं।
माइग्रेन से पीड़ित लोग अपनी डायरी रख सकते हैं। इसमें लिखें कि कब दर्द हुआ, क्या खाया, कितनी देर धूप में रहे या कितनी नींद ली। इससे ट्रिगर्स को आसानी से पहचाना जा सकता है।
गर्मियों के मौसम में माइग्रेन की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए सावधानी बरतें और स्वस्थ रहें। अगर आप भी धूप में निकलते ही माइग्रेन से परेशान होते हैं तो ऊपर बताए गए उपायों को अपनाकर काफी हद तक राहत पा सकते हैं।
Read More Here:-



