Post-Fever Weakness: गर्मी के मौसम में बुखार आना एक आम बात है, लेकिन बुखार उतरने के बाद जो थकान और सुस्ती शरीर में घर कर लेती है, वो कभी-कभी कई दिनों तक बनी रहती है। बहुत से लोग सोचते हैं कि जैसे ही बुखार उतरा, वे ठीक हो गए। लेकिन ऐसा नहीं है। शरीर को पूरी तरह ठीक होने में अभी भी समय और सही पोषण की जरूरत होती है। डॉक्टर और डाइटिशियन इसे ‘Post-Fever Fatigue’ कहते हैं। इस दौरान सही खानपान न मिले तो कमजोरी हफ्तों तक खिंच सकती है।
बुखार के बाद शरीर में कमजोरी क्यों रहती है?
जब शरीर किसी वायरस या बैक्टीरिया से लड़ता है, तो हमारा इम्यून सिस्टम पूरी क्षमता से काम करता है। इस प्रक्रिया में शरीर की बहुत सारी ऊर्जा खर्च हो जाती है। बुखार के दौरान भूख भी कम लगती है, जिससे शरीर को जरूरी कैलोरी और पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इसके अलावा पसीने के जरिए शरीर से पोटेशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं। यही वजह है कि बुखार उतरने के बाद भी हाथ-पैरों में दर्द, चक्कर आना और हर वक्त लेटे रहने का मन करना जैसी समस्याएं होती हैं। शरीर का मेटाबॉलिज्म भी इस दौरान धीमा पड़ जाता है।
नारियल पानी हाइड्रेशन का सबसे अच्छा तरीका
बुखार के बाद सबसे पहले शरीर को पानी की कमी को पूरा करना होता है। साधारण पानी पीना तो जरूरी है ही, लेकिन नारियल पानी इससे एक कदम आगे है। नारियल पानी में पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो बुखार के दौरान पसीने के साथ बाहर निकल जाते हैं। यह पेट के लिए हल्का होता है और आसानी से पच जाता है। दिन में एक या दो गिलास नारियल पानी पीने से शरीर का तापमान भी संतुलित रहता है और थकान जल्दी कम होती है। अगर ताजा नारियल पानी मिले तो यह सबसे अच्छा विकल्प है।
मूंग दाल की खिचड़ी पेट के लिए हल्की, शरीर के लिए भारी
बुखार के ठीक बाद पाचन तंत्र काफी कमजोर हो जाता है। ऐसे में तला-भुना या मसालेदार खाना खाने से उल्टा नुकसान हो सकता है। मूंग दाल की खिचड़ी इस समय सबसे बेहतर विकल्प मानी जाती है। मूंग दाल में अच्छी मात्रा में प्रोटीन होता है जो टूटी हुई मांसपेशियों को ठीक करने में मदद करता है। खिचड़ी में थोड़ा घी और ताजा अदरक डालकर खाने से यह और भी फायदेमंद बन जाती है। घी में स्वस्थ वसा होती है जो ऊर्जा देती है और अदरक पाचन को बेहतर बनाता है। यह डिश न सिर्फ शरीर को ताकत देती है बल्कि खाने का स्वाद भी वापस लाती है जो बुखार के दौरान अक्सर चला जाता है।
बुखार के ठीक बाद दो-तीन दिन तक सिर्फ हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाना चाहिए। इससे पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और शरीर तेजी से ठीक होता है।
विटामिन-C से भरे फल इम्यूनिटी को मिलेगी नई ताकत
बुखार के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी काफी कमजोर हो जाती है। इसे दोबारा मजबूत बनाने के लिए विटामिन-C बहुत जरूरी है। संतरा, मौसंबी, नींबू, आंवला और कीवी जैसे फलों में विटामिन-C भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ये फल शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करते हैं और थकान पैदा करने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं। ताजे फलों का रस पीना या फल सीधे खाना दोनों ही फायदेमंद हैं। इन्हें खाने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स भी मिलते हैं जो इम्यून सिस्टम को जल्दी रिकवर करने में मदद करते हैं।
उबले अंडे और ड्राई फ्रूट्स , प्रोटीन और ऊर्जा का दोहरा फायदा
अगर आप नॉन-वेजिटेरियन हैं तो उबले हुए अंडे बुखार के बाद की डाइट का अहम हिस्सा होने चाहिए। बुखार के दौरान मांसपेशियों में जो कमजोरी आती है उसे ठीक करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन की जरूरत होती है। अंडे इस काम में बेहद कारगर हैं। इनमें विटामिन B12 और फोलेट भी होते हैं जो थकान को कम करने और नई ऊर्जा देने में मदद करते हैं। एक बात का ध्यान रखें बुखार के ठीक बाद तले हुए अंडे खाने से बचें, उबले हुए या पोच्ड अंडे ज्यादा फायदेमंद रहते हैं।
वहीं, बादाम, अखरोट और किशमिश जैसे सूखे मेवे भी इस दौरान बहुत काम आते हैं। इनमें हेल्दी फैट्स, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। रात को भिगोए हुए पांच-छह बादाम और थोड़ी किशमिश सुबह खाली पेट खाने से हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर होता है और दिमाग की सुस्ती भी दूर होती है। अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो दिमाग को सक्रिय रखता है और शरीर में सूजन को कम करता है।
बुखार के बाद रिकवरी सिर्फ दवाओं से नहीं, बल्कि सही खानपान और आराम से होती है। ऊपर बताए गए ये पांच फूड्स नारियल पानी, मूंग दाल की खिचड़ी, विटामिन-C वाले फल, उबले अंडे और ड्राई फ्रूट्स आपकी रिकवरी को काफी तेज कर सकते हैं। लेकिन अगर कमजोरी बहुत ज्यादा हो, बुखार दोबारा आने लगे या कोई और लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
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