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धनबाद नगर निगम का सख्त फैसला, अब जिनके घर में निगम का पानी कनेक्शन है उन्हें नहीं मिलेगी बोरिंग की अनुमति

Jharkhand News: धनबाद नगर निगम ने भूजल संरक्षण को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। नगर निगम बोर्ड ने शहर में बोरिंग करने की अनुमति तो जारी कर दी है, लेकिन नई गाइडलाइन में कई सख्त शर्तें लगा दी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन घरों या मकानों में पहले से नगर निगम का पानी का कनेक्शन है, वहां अब बोरिंग की अनुमति नहीं मिलेगी। अगर कोई मकान मालिक वहां बोरिंग करवाता है तो उसका पानी कनेक्शन अवैध माना जाएगा और कार्रवाई की जा सकती है।

यह फैसला गुरुवार को नगर निगम बोर्ड की बैठक में पास हुए प्रस्ताव के बाद लिया गया है। नगर निगम ने बोरिंग को लेकर पूरी नई गाइडलाइन जारी कर दी है, जिसका मकसद भूजल का अनियंत्रित दोहन रोकना और पर्यावरण को बचाना है।

नगर निगम का साफ नियम: निगम कनेक्शन वाले घरों में बोरिंग बंद

धनबाद नगर निगम की नई गाइडलाइन बहुत साफ है। अगर किसी के घर में नगर निगम की पानी की सप्लाई का कनेक्शन है तो उसे बोरिंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। नगर निगम का कहना है कि जिन लोगों को पहले से सरकारी पानी मिल रहा है, उन्हें अतिरिक्त बोरिंग की जरूरत नहीं है।

अगर कोई व्यक्ति नियम तोड़कर बोरिंग करवाता है तो उसका पूरा पानी कनेक्शन काट दिया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस नियम का मकसद है कि लोग बिना जरूरत के भूजल का दोहन न करें और नगर निगम की पानी व्यवस्था का सही उपयोग करें। धनबाद में पिछले कई सालों से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। शहर के कई इलाकों में बोरिंग की वजह से पानी की परत बहुत नीचे चली गई है। ऐसे में नगर निगम ने यह सख्त कदम उठाया है ताकि भविष्य में पानी का संकट और गहरा न हो।

बोरिंग के लिए क्या-क्या शर्तें लगाई गई हैं?

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नगर निगम ने बोरिंग की अनुमति देने के लिए कई सख्त नियम बनाए हैं। अपनी जमीन पर बोरिंग कराने के लिए सबसे पहले नगर निगम से लिखित अनुमति लेनी होगी। बोरिंग की साइज सिर्फ 4.75 इंच तक ही रखी गई है। आवेदन के साथ पांच हजार रुपये का बैंक ड्राफ्ट शुल्क जमा करना होगा। बोरिंग करने वाली एजेंसी को भी नगर निगम में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन के लिए एजेंसी को 50 हजार रुपये का शुल्क देना होगा।

बोरिंग का उपयोग सिर्फ उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकेगा जिसके लिए अनुमति ली गई है। अगर घरेलू उपयोग के लिए अनुमति ली गई है तो उसका इस्तेमाल व्यावसायिक कामों में नहीं किया जा सकता। अगर नियम तोड़ा गया तो भारी जुर्माना लगेगा। नगर निगम ने यह भी साफ किया है कि भूजल दोहन से होने वाले किसी भी पर्यावरणीय नुकसान की जिम्मेदारी बोरिंग कराने वाले व्यक्ति की होगी। अगर पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनाना अनिवार्य

धनबाद नगर निगम की नई गाइडलाइन में एक और महत्वपूर्ण शर्त जोड़ी गई है। बोरिंग की अनुमति तभी मिलेगी जब आवेदक अपने परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना ले। बारिश का पानी संग्रह करने की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है ताकि भूजल को रिचार्ज किया जा सके। नगर निगम का कहना है कि बिना रेन वाटर हार्वेस्टिंग के बोरिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही किसी भी जगह पर जरूरत से ज्यादा बोरिंग करने की इजाजत नहीं होगी।

बोरिंग का काम रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बिल्कुल बंद रहेगा। यह समय सीमा इसलिए रखी गई है ताकि इलाके के लोगों को शोर और परेशानी न हो। सभी अनुमतियां भूजल विभाग के दिशा-निर्देशों के आधार पर ही दी जाएंगी। नगर निगम अब भूजल विभाग के साथ समन्वय में काम करेगा ताकि बोरिंग पूरी तरह नियंत्रित रहे।

धनबाद में भूजल संकट और नगर निगम का प्रयास

धनबाद शहर में पिछले कई वर्षों से भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। कोयला खनन, औद्योगिक गतिविधियां और अनियंत्रित बोरिंग की वजह से कई इलाकों में पानी की परत बहुत नीचे चली गई है। गर्मियों में कई जगहों पर बोरिंग भी सूख जाती है। नगर निगम का यह फैसला भूजल बचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अगर लोग रेन वाटर हार्वेस्टिंग अपनाएंगे और बिना जरूरत बोरिंग नहीं करवाएंगे तो भूजल स्तर धीरे-धीरे सुधर सकता है।

नगर निगम ने आम लोगों से अपील की है कि वे नई गाइडलाइन का पालन करें। जो लोग पहले से बोरिंग कर चुके हैं और उनके पास निगम का पानी कनेक्शन है, उन्हें नियम के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। शहरवासी अब बोरिंग से संबंधित किसी भी काम के लिए सीधे नगर निगम कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। अनुमति बिना बोरिंग करवाने पर सख्त कार्रवाई होगी। यह फैसला न सिर्फ धनबाद बल्कि पूरे कोयलांचल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है जहां पानी की समस्या लगातार बढ़ रही है। अगर सभी नागरिक और प्रशासन मिलकर काम करें तो भविष्य में पानी का संकट काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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