वाराणसी – उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षाओं में हो रही कथित अनियमितताओं से गुस्साए छात्र अब खुलकर सड़क पर आने को तैयार हैं। 15 दिसंबर को लखनऊ के इको गार्डन में लाखों छात्रों के जुटने का ऐलान हो चुका है। सोशल मीडिया पर यह मुहिम तूफान की तरह फैल रही है और छात्रों ने अपनी मांगों वाला क्यूआर कोड भी जारी कर दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
पिछले कुछ महीनों से RO-ARO और PCS प्री परीक्षा को लेकर छात्र सड़कों पर हैं। मुख्य शिकायतें ये हैं:
. एक ही दिन में दो शिफ्ट में परीक्षा होना
. पहली शिफ्ट का पेपर कठिन, दूसरी शिफ्ट का आसान होना
. नॉर्मलाइजेशन के नाम पर मनमाने ढंग से नंबर बढ़ाना-घटाना
. पेपर लीक के गंभीर आरोप
छात्रों का कहना है कि इससे मेहनत करने वाले का हक़ मारकर दूसरों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर जोरदार मुहिम
ट्विटर (X), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर #SaveUPPSC_Merit, #15DecemberLko, #एकदिन_एकशिफ्ट_एकपरीक्षा जैसे हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।हर घंटे सैकड़ों वीडियो, मीम्स और पोस्टर वायरल हो रहे हैं। छात्र रात-दिन लाइव आकर एक-दूसरे को जोड़ रहे हैं।
सबसे खास हथियार – क्यूआर कोड
छात्रों ने अपनी सारी मांगें एक पीडीएफ में लिखी और उसे क्यूआर कोड बना दिया। अब कोई भी व्यक्ति अपना फोन निकालकर इस कोड को स्कैन कर सकता है और पूरी मांग-पत्रिका पढ़ सकता है।यह कोड हर पोस्ट, हर स्टोरी, हर ग्रुप में शेयर हो रहा है। छात्रों का कहना है, “अब कोई यह नहीं कह सकेगा कि हमें मांगें पता नहीं हैं।”
छात्रों की साफ-साफ मांगें
. एक दिन में सिर्फ एक शिफ्ट में परीक्षा हो
. नॉर्मलाइजेशन पूरी तरह बंद हो
. पेपर लीक की CBI या हाईकोर्ट की निगरानी में जाँच हो
. दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो. प्रभावित परीक्षाएँ रद्द करके दोबारा एक शिफ्ट में हों
. भविष्य में कभी दो शिफ्ट न हों
15 दिसंबर को क्या होगा?
सुबह 10 बजे से इको गार्डन में छात्र जुटना शुरू करेंगे।
. कई जिलों से बसें बुक हो चुकी हैं
. छात्र नेता अंकित तिवारी, अविनाश पांडेय, राघवेंद्र प्रताप सिंह, साक्षी पटेल आदि मोर्चा संभाल रहे हैं
. छात्रों ने वादा किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन संख्या बहुत बड़ी होगी
आम जनता भी साथ आ रही
अब सिर्फ छात्र ही नहीं, उनके माता-पिता, शिक्षक और दूसरे अभ्यर्थी भी समर्थन कर रहे हैं। व्हाट्सएप ग्रुप में बुजुर्ग लोग भी मैसेज फॉरवर्ड कर रहे हैं – “हमारे बच्चों का हक मत मारो।”
सरकार अब तक चुप
सरकार की तरफ से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया। कुछ दिन पहले कहा गया था कि नॉर्मलाइजेशन “वैज्ञानिक” तरीके से हो रहा है, लेकिन छात्र इसे मानने को तैयार नहीं।
निष्कर्ष:
यह लड़ाई सिर्फ दो शिफ्ट या नॉर्मलाइजेशन की नहीं है। यह उन लाखों युवाओं की लड़ाई है जो रात-दिन पढ़कर सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं। अगर मेहनत का फल कोई सिस्टम छीन लेगा तो युवा चुप नहीं बैठेगा।क्यूआर कोड जारी करके छात्रों ने साबित कर दिया कि वे सिर्फ गुस्सा नहीं, समझदारी से भी लड़ रहे हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है। अगर 15 दिसंबर से पहले बातचीत और ठोस कदम नहीं उठे तो लखनऊ की सड़कें सिर्फ नारे नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश के युवाओं के गुस्से से गूँजेंगी।



