Deergh Vishnu Temple: मथुरा में एक ऐसा मंदिर है जो दुनिया भर में अपनी अनोखी पहचान रखता है। यह दीर्घ विष्णु मंदिर भगवान विष्णु के लंबे रूप को समर्पित है, जहां भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। मथुरा के भारतपुर गेट के पास स्थित यह मंदिर करीब 5000 साल पुराना माना जाता है। यहां की मूर्ति में भगवान चार भुजाओं वाले विष्णु रूप में हैं, जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल है। यह मंदिर ब्रज क्षेत्र के अन्य मंदिरों से अलग है, जहां कृष्ण ज्यादातर बाल रूप में पूजे जाते हैं। हर साल लाखों भक्त यहां आते हैं, खासकर कृष्ण जन्माष्टमी पर। मंदिर की मान्यता इतनी प्राचीन है कि कृष्ण के वंशज वज्रनाभ ने यहां इसकी पूजा की थी। यह जगह न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि इतिहास के पन्नों से जुड़ी हुई है। मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मानने वाले भक्तों के लिए यह मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र है।
मंदिर का इतिहास: प्राचीन कथा से जुड़ी अनोखी कहानी

इस मंदिर का इतिहास भगवान कृष्ण की लीलाओं से गहराई से जुड़ा है। कहा जाता है कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां कृष्ण दीर्घ रूप में विराजमान हैं। एक कथा के अनुसार, कृष्ण ने प्रयागराज (तब प्रयाग) पर गुस्सा होकर यह रूप धारण किया। हुआ यूं कि कृष्ण ने सभी तीर्थों की सभा बुलाई, लेकिन प्रयाग नहीं आया। इससे नाराज होकर कृष्ण ने प्रयाग को तीर्थों का राजा बना दिया और खुद दीर्घ रूप ले लिया। दूसरी मान्यता है कि कंस वध के बाद कृष्ण ने यह रूप दिखाया। मंदिर की स्थापना इतनी पुरानी है कि महाभारत काल से भी पहले की मानी जाती है। वज्रनाभ, जो कृष्ण के परपोते थे, ने इस मूर्ति की पूजा शुरू की। मथुरा के अन्य प्राचीन मंदिरों की तरह यह भी कई हमलों का शिकार हुआ, लेकिन इसकी मूर्ति आज भी सुरक्षित है। इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर वैदिक काल से चला आ रहा है। ब्रज संस्कृति में इसका खास स्थान है, जो कृष्ण भक्ति की गहरी जड़ें दिखाता है।
मंदिर का महत्व: लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र
दीर्घ विष्णु मंदिर का महत्व इसकी दुर्लभता में छिपा है। यहां कृष्ण को विष्णु के अवतार के रूप में पूजा जाता है, जो भक्तों को उनके व्यापक स्वरूप की याद दिलाता है। मंदिर में आने वाले भक्त मानते हैं कि यहां दर्शन से जीवन की हर परेशानी दूर हो जाती है। खासकर प्रयागराज से जुड़ी कथा के कारण यह तीर्थयात्रियों के लिए पवित्र है। मथुरा के 12 ज्योतिर्लिंगों और अन्य कृष्ण मंदिरों के बीच यह अलग चमकता है। वास्तुकला सरल लेकिन प्रभावशाली है, जहां मुख्य मंडप में लंबी मूर्ति स्थापित है। आसपास के चौराहे पर हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है। मंदिर प्रबंधन बताता है कि यहां रोजाना हजारों लोग आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अलावा, यह पर्यटन का भी केंद्र है। मथुरा आने वाले सैलानी इसे मिस नहीं करते। कुल मिलाकर, यह मंदिर कृष्ण भक्ति की अनंतता को दर्शाता है।



