नई दिल्ली – दुनिया के सबसे अमीर मंदिर तिरुपति बालाजी में भक्तों के चढ़ावे से दशकों तक चोरी करने वाला मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। क्लर्क सीवी रवि कुमार अप्रैल 2023 में CCTV पर संदिग्ध व्यवहार करते पकड़ा गया। कबूलनामे उसने कहा कि वह मंदिर में 20 साल से अधिक समय तक चोरी की, जिससे चेन्नई, तिरुपति व हैदराबाद में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां खरीदी। यह पूरा मामला लोक अदालत में समझौते के बाद बंद हो गया था। अब आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सेटलमेंट रद कर CID से नई जांच के आदेश दिए हैं, जिससे बड़े कवर-अप के आरोप लग रहे हैं।
चोरी कैसे हुई?
यह मामला अप्रैल 2023 का है। मंदिर के परकमणि हॉल में दान की गिनती होती है। यहां विदेशी मुद्रा और रुपये अलग-अलग रखे जाते हैं। एक क्लर्क सीवी रवि कुमार को सीसीटीवी में डॉलर की नोटों की गड्डी अपने अंडरगारमेंट में छिपाते देखा गया। जब पकड़ा गया तो उससे करीब 11,300 डॉलर बरामद हुए, लेकिन एफआईआर में सिर्फ 900 डॉलर की चोरी दर्ज की गई। रवि कुमार पेड्डा जीयर मठ में क्लर्क थे। वे 1990 के दशक से मंदिर की दान गिनती के काम में जुड़े थे। हर दिन 4 से 6 करोड़ रुपये का चढ़ावा गिना जाता है। रवि कुमार ने 20 साल से ज्यादा समय तक रोज थोड़ी-थोड़ी रकम चुराई, खासकर विदेशी डॉलर। वे इसे छिपाकर बाहर ले जाते थे।
100 करोड़ की संपत्ति कैसे बनी?
चोरी के पैसे से रवि कुमार ने तिरुपति, चेन्नई और हैदराबाद में कई संपत्तियां खरीदीं। इनकी कीमत शुरुआत में 14 करोड़ थी, लेकिन 2023 तक बढ़कर 140 करोड़ हो गई। उनके पास मर्सिडीज और वोल्वो जैसी लग्जरी कारें भी थीं। जांच में पता चला कि उन्होंने कुल 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बना ली। यह सब एक मामूली क्लर्क की सैलरी से नामुमकिन था।
केस कैसे बंद हुआ?
पकड़े जाने के बाद मामला पुलिस में दर्ज हुआ। लेकिन जल्दी ही इसे लोक अदालत में भेज दिया गया। सितंबर 2023 में समझौता हो गया। रवि कुमार ने मंदिर को 40 करोड़ की सात संपत्तियां दान में दे दीं। बदले में केस खत्म हो गया और उन्हें बरी कर दिया गया। कई लोगों ने कहा कि यह समझौता जल्दबाजी में हुआ और बड़े लोगों की मिलीभगत थी।
हाईकोर्ट ने क्यों खोला केस?
2025 में तिरुपति के एक पत्रकार एम श्रीनिवासुलु ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने लोक अदालत के फैसले को चुनौती दी। सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने लोक अदालत का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच में गड़बड़ी हुई। आरोपी को गलत धाराओं में चार्ज किया गया, जबकि भ्रष्टाचार की गंभीर धाराएं लगनी चाहिए थीं। कोर्ट ने सीआईडी को सभी रिकॉर्ड जब्त करने और नई जांच करने का आदेश दिया। एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को रवि कुमार की संपत्तियों की जांच सौंपी गई। दिसंबर 2025 तक सीआईडी और एसीबी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा की। कोर्ट ने कहा कि मंदिर बोर्ड और अधिकारियों की भूमिका भी जांचें।
राजनीतिक विवाद
यह मामला राजनीतिक भी हो गया। भाजपा और टीडीपी नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार (जगन मोहन रेड्डी के समय) में यह चोरी हुई और केस दबाया गया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज जारी की और कहा कि चोरी की रकम से रियल एस्टेट में निवेश हुआ। पूर्व टीटीडी चेयरमैन पर भी सवाल उठे।
भक्तों की आस्था पर असर
तिरुपति मंदिर भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। यहां चढ़ावा भगवान की सेवा और गरीबों की मदद के लिए इस्तेमाल होता है। ऐसे में चोरी का खुलासा होने से लाखों भक्तों को ठेस पहुंची। लोग कहते हैं कि मंदिर की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए।
निष्कर्ष :
यह चोरी कांड सिर्फ पैसे की चोरी नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था पर चोट है। एक साधारण क्लर्क ने सालों तक सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाया और करोड़ों की संपत्ति बना ली। हाईकोर्ट का फैसला सही दिशा में कदम है। नई जांच से सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी। मंदिर प्रबंधन को अब सख्त नियम बनाने चाहिए, ताकि सीसीटीवी, ऑडिट और स्टाफ की निगरानी बढ़े। आखिरकार, भक्तों का चढ़ावा भगवान की सेवा के लिए है, न कि किसी की जेब भरने के लिए। उम्मीद है कि इस केस से मंदिर की व्यवस्था मजबूत होगी और भक्तों का विश्वास कायम रहेगा।



