Economic Survey 2026: बजट सत्र 2026 के द्वितीय दिवस आज (गुरुवार, 29 जनवरी 2026) संसद में आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) प्रस्तुत किया जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा और राज्यसभा में यह महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करेंगी जिसमें सरकार के व्यय का संपूर्ण लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण पेश होने से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि “विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है।”
PM मोदी का विकसित भारत का संदेश

संसद में आर्थिक सर्वेक्षण की प्रस्तुति से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए विकसित भारत के दृष्टिकोण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक और सरकार विकसित भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आगामी बजट और आर्थिक नीतियां विकसित राष्ट्र बनने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। विकसित भारत का यह संकल्प सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का केंद्रबिंदु है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 – व्यापक विश्लेषण
आज लोकसभा में प्रस्तुत किए जाने वाले आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार के प्रत्येक रुपये के व्यय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाएगा। यह दस्तावेज देश की आर्थिक सेहत का व्यापक आकलन प्रदान करता है।
सर्वेक्षण में शामिल प्रमुख बिंदु
GDP वृद्धि दर: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का अनुमान और विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा। यह दर्शाएगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था किस गति से आगे बढ़ रही है।
मुद्रास्फीति: महंगाई की स्थिति, खाद्य और ईंधन मूल्यों में परिवर्तन तथा मूल्य स्थिरता के उपाय सर्वेक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
बैंकिंग क्षेत्र: बैंकिंग प्रणाली की मजबूती, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) की स्थिति और वित्तीय समावेशन की प्रगति का विश्लेषण।
कृषि क्षेत्र: कृषि उत्पादन, किसान कल्याण योजनाओं का प्रभाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति पर विस्तृत जानकारी।
निर्यात शक्ति: भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता, व्यापार संतुलन और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति का मूल्यांकन।
उद्योग और विनिर्माण: औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और मेक इन इंडिया पहल की प्रगति।
रोजगार सृजन: विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन, बेरोजगारी दर और कौशल विकास कार्यक्रमों का प्रभाव।
बुनियादी ढांचा विकास: सड़क, रेलवे, बंदरगाह और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश और प्रगति।
समय से पहले प्रस्तुति – एक असामान्य कदम
परंपरागत रूप से आर्थिक सर्वेक्षण प्रत्येक वर्ष बजट प्रस्तुत होने से एक दिन पूर्व (31 जनवरी को) प्रस्तुत किया जाता था। परंतु इस वर्ष यह 2 दिन पूर्व अर्थात 29 जनवरी को लोकसभा में प्रस्तुत किया जा रहा है।
प्रारंभिक प्रस्तुति के संभावित कारण
विस्तृत विश्लेषण का समय: दो दिन पहले प्रस्तुति से संसद सदस्यों, अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों को दस्तावेज का गहन अध्ययन करने का अधिक समय मिलेगा।
बजट के लिए संदर्भ: बजट से पहले आर्थिक स्थिति को स्पष्टता से समझने में सहायता मिलेगी।
व्यापक चर्चा: संसदीय चर्चा और जनता की प्रतिक्रिया के लिए अधिक समय उपलब्ध होगा।
वित्त मंत्री की भूमिका
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद के दोनों सदनों में यह महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करेंगी। यह उनका कार्यकाल का एक और महत्वपूर्ण आर्थिक प्रस्तुति होगी। वित्त मंत्री सरकार का पूर्ण रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगी जिसमें सफलताओं और चुनौतियों दोनों का उल्लेख होगा।
आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व
आर्थिक सर्वेक्षण केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है बल्कि यह देश की आर्थिक नीति की दिशा निर्धारित करता है। यह निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:
पारदर्शिता: सरकारी व्यय और आय का पारदर्शी विवरण प्रदान करता है।
नीति निर्माण: भविष्य की आर्थिक नीतियों के लिए आधार प्रदान करता है।
निवेशक विश्वास: घरेलू और विदेशी निवेशकों को आर्थिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर प्रदान करता है।
जवाबदेही: सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है।
शैक्षणिक महत्व: अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं के लिए मूल्यवान डेटा प्रदान करता है।
विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री मोदी का “विकसित भारत” का उल्लेख सरकार के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। 2047 तक, भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी पर, देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रगति आवश्यक है:
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प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं
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उन्नत बुनियादी ढांचा
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तकनीकी नवाचार
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सतत विकास
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सामाजिक समानता
Economic Survey 2026: निष्कर्ष
आज प्रस्तुत होने वाला आर्थिक सर्वेक्षण 2026 भारत की आर्थिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा। यह न केवल बीते वर्ष की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करेगा बल्कि भविष्य की आर्थिक दिशा भी निर्धारित करेगा। प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संदेश के साथ यह सर्वेक्षण देश के आर्थिक विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करेगा।



