Best Cooking Oil: घर में रोजाना खाना बनाते समय तेल का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होता है। सही तेल न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि सेहत को भी फायदा पहुंचाता है। आजकल हृदय रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कुकिंग ऑयल चुनते समय उसके पोषण मूल्य, स्मोक पॉइंट और फायदों पर ध्यान दें। कोई एक तेल सभी के लिए सबसे अच्छा नहीं होता, लेकिन भारतीय रसोई के लिए कुछ तेल बेहतर माने जाते हैं।
तेल चुन समय क्या देखें?
तेल का स्मोक पॉइंट वह तापमान होता है जब तेल जलने लगता है और धुआं निकलता है। इससे ज्यादा गर्म करने पर तेल हानिकारक हो सकता है। अच्छे तेल में संतुलित फैटी एसिड होते हैं जैसे मोनोअनसैचुरेटेड (MUFA), पॉलीअनसैचुरेटेड (PUFA) और ओमेगा-3, ओमेगा-6। ये दिल की सेहत के लिए अच्छे होते हैं। रिफाइंड तेलों में ज्यादा प्रोसेसिंग होती है, जो सूजन बढ़ा सकती है।
सरसों का तेल: उत्तर भारत का पसंदीदा
उत्तर और पूर्वी भारत में सरसों का तेल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। यह काफी लोकप्रिय है क्योंकि इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड का अच्छा संतुलन मिलता है। इसका स्मोक पॉइंट काफी ऊंचा होता है, इसलिए तलने, भूनने और सब्जी बनाने के लिए सुरक्षित है।
फायदे: यह दिल के लिए अच्छा माना जाता है। सूजन कम करने में मदद करता है।
इस्तेमाल का तरीका: इस्तेमाल से पहले तेल को अच्छे से गर्म करें जब तक धुआं न निकले, ताकि उसका तीखापन कम हो जाए और स्वाद बेहतर आए।
मूंगफली का तेल: हल्का और बहुमुखी

मूंगफली का तेल (ग्राउंडनट ऑयल) में MUFA की अच्छी मात्रा होती, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इसका स्वाद हल्का होता है, इसलिए यह खाने के असली स्वाद को नहीं बदलता।
फायदे: सभी तरह की कुकिंग के लिए उपयुक्त, खासकर डीप फ्राइंग के लिए। स्मोक पॉइंट ऊंचा होने से स्थिर रहता है। यह विटामिन ई से भी भरपूर होता है।
तिल का तेल: दक्षिण भारतीय व्यंजनों का साथी
दक्षिण भारत में तिल का तेल बहुत इस्तेमाल होता है। इसमें सेसमोल नाम का शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो गर्म करने पर भी नष्ट नहीं होता।
फायदे: ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है। तड़का लगाने और कुछ खास व्यंजनों के लिए बेस्ट है। इसका इस्तेमाल हल्की कुकिंग या फिनिशिंग के लिए अच्छा रहता है।
राइस ब्रान ऑयल: कोलेस्ट्रॉल कंट्रोलर
राइस ब्रान ऑयल आजकल काफी पॉपुलर हो रहा है। इसमें ओरिज़ानॉल नाम का तत्व होता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में सहायक है। इसका स्मोक पॉइंट बहुत ऊंचा होता है।
फायदे: पूरी, पकोड़े या डीप फ्राइंग के लिए आदर्श। यह हृदय के लिए सुरक्षित विकल्प है और न्यूट्रल फ्लेवर देता है।
इन तेलों से बचें या कम इस्तेमाल करें
रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल जैसे सोयाबीन, सूरजमुखी या कॉर्न ऑयल में ओमेगा-6 की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इससे शरीर में सूजन बढ़ सकती है। डालडा या वनस्पति घी में ट्रांस फैट्स होते हैं, जो दिल की बीमारियों का बड़ा कारण बनते हैं। इनका इस्तेमाल जितना कम हो उतना अच्छा।
तेल बदलने की आदत क्यों डालें?
पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक ही तेल लगातार इस्तेमाल न करें। हर 1-2 महीने में तेल बदलें या दो तेलों का मिश्रण इस्तेमाल करें, जैसे सरसों और मूंगफली। इससे शरीर को अलग-अलग फैटी एसिड मिलते रहते हैं और पोषण संतुलित रहता है।
रोजाना कितना तेल इस्तेमाल करें?
तेल कैलोरी से भरपूर होता है। इसलिए कम मात्रा में इस्तेमाल करें। डॉक्टरों के अनुसार 2-4 चम्मच (10-20 मिली) रोजाना पर्याप्त है। ज्यादा तेल से वजन बढ़ सकता है और हृदय पर बोझ पड़ता है। हेल्दी खाना बनाने के लिए कम तेल वाले तरीके अपनाएं, जैसे भाप में पकाना, ग्रिल करना या एयर फ्राई।
Best Cooking Oil: सही चुनाव से सेहत बेहतर
रोजाना खाना बनाने के लिए कोई एक “सबसे अच्छा” तेल नहीं है। यह आपके क्षेत्र, खाने की स्टाइल और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। सरसों का तेल उत्तर भारत में, तिल का दक्षिण में और मूंगफली या राइस ब्रान पूरे देश में अच्छे विकल्प हैं। सही तेल चुनकर और संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करके आप परिवार की सेहत को मजबूत बना सकते हैं।



