डेस्क – बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। पिछले साल शेख हसीना की सरकार गिराने वाले छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी मौत के बाद देश भर में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। यह घटना बांग्लादेश की नाजुक राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना रही है, खासकर जब फरवरी 2026 में चुनाव होने वाले हैं।
घटना क्या हुई?
12 दिसंबर 2025 को ढाका में नकाबपोश हमलावरों ने शरीफ उस्मान हादी पर गोली चलाई। वह उस समय चुनाव प्रचार कर रहे थे या मस्जिद से निकल रहे थे। गोली उनके सिर में लगी और हालत गंभीर हो गई। उन्हें पहले ढाका के अस्पताल में भर्ती किया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया। वहां 18 दिसंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। हादी सिर्फ 32 साल के थे और इंकलाब मंच नाम के संगठन के प्रवक्ता थे।यह हमला ऐसे समय हुआ जब बांग्लादेश में चुनाव की तारीख घोषित हुई थी। हादी ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार बनने वाले थे। उनकी मौत की खबर फैलते ही ढाका और अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
शरीफ उस्मान हादी कौन थे?
शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश के युवा नेता थे। वे 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे। उस आंदोलन में छात्रों ने नौकरी कोटे के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया था, जो बाद में शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़ा विद्रोह बन गया। हसीना को देश छोड़कर भारत भागना पड़ा। हादी इंकलाब मंच के नेता थे। वे शेख हसीना और भारत की नीतियों के कड़े आलोचक थे। कई लोग उन्हें क्रांतिकारी मानते थे। उनकी लोकप्रियता युवाओं में बहुत थी। वे चुनाव लड़कर राजनीति में बड़ा रोल निभाना चाहते थे। उनकी मौत को कई लोग राजनीतिक साजिश मान रहे हैं।
मौत के बाद क्या हुआ बवाल?
हादी की मौत की खबर जैसे ही आई, ढाका में प्रदर्शन शुरू हो गए। लोग शाहबाग चौराहे पर जमा हुए और न्याय की मांग करने लगे। प्रदर्शन जल्दी हिंसक हो गए।
. प्रदर्शनकारियों ने दो बड़े अखबारों – प्रथम आलो और डेली स्टार – के दफ्तरों में आग लगा दी। इन अखबारों को भारत समर्थक माना जाता है।
. चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग पर हमला हुआ।
. कई जगहों पर अवामी लीग के दफ्तरों और सांस्कृतिक केंद्रों को निशाना बनाया गया।
. पत्रकारों को भी नुकसान पहुंचा, कई को इमारतों से बचाकर निकाला गया।
अंतरिम सरकार ने सेना और पुलिस तैनात की। मुहम्मद यूनुस ने लोगों से शांति की अपील की। उन्होंने हादी को शहीद बताया और कहा कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं होगा। संयुक्त राष्ट्र ने भी शांति बनाए रखने की सलाह दी।
भारत से क्यों जुड़ा विवाद?
हादी भारत की आलोचना करते थे। वे कहते थे कि भारत बांग्लादेश के मामलों में दखल देता है। शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं, इसलिए प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भारत पर भी निकला। लोग हसीना की प्रत्यर्पण की मांग कर रहे हैं। कुछ ने कहा कि हमलावर भारत भाग गए। इससे दोनों देशों के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए हैं। हसीना ने भी आरोप लगाया कि यूनुस की सरकार कानून-व्यवस्था नहीं संभाल पा रही।
चुनाव पर क्या असर?
बांग्लादेश में फरवरी 2026 में चुनाव होने हैं। यह हसीना के जाने के बाद पहला बड़ा चुनाव होगा। हादी की मौत से राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। अवामी लीग पर पहले से बैन की मांग हो रही है। कई लोग डर रहे हैं कि हिंसा बढ़ेगी और चुनाव प्रभावित होगा। अंतरिम सरकार सुधार करने की कोशिश कर रही है, लेकिन चुनौतियां बहुत हैं।
एक और हमला: मोतालेब शिकदर पर गोली
हादी की मौत के कुछ दिन बाद, 22 दिसंबर को एक और छात्र नेता मोहम्मद मोतालेब शिकदर पर हमला हुआ। खुलना में घर में घुसकर उन्हें गोली मारी गई। वे नेशनल सिटिजन्स पार्टी से जुड़े थे और 2024 के आंदोलन में सक्रिय थे। उनकी हालत गंभीर है। इससे साफ है कि बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही।
निष्कर्ष :
बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने पुराने घाव फिर से हरे कर दिए हैं। 2024 का छात्र आंदोलन लोकतंत्र की जीत लगा था, लेकिन अब हिंसा और अस्थिरता बढ़ रही है। युवा नेता की मौत से लोग गुस्से में हैं, लेकिन हिंसा से देश को नुकसान ही हो रहा है। सरकार को जल्दी जांच पूरी करनी चाहिए और दोषियों को सजा देनी चाहिए। चुनाव से पहले शांति जरूरी है, वरना बांग्लादेश की तरक्की रुक जाएगी। उम्मीद है कि लोग संयम रखें और बातचीत से समस्याएं सुलझाएं। यह समय है एकजुट होने का, न कि बंटवारे का।


