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FIR से भड़के असम CM हिमंत बिस्व सरमा, ममता सरकार को दी कड़ी चेतावनी, बोले एक गोली चलाओगे तो दो चलाऊंगा

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार में उस वक्त नया सियासी तूफान आ गया जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ बंगाल में एफआईआर दर्ज की गई। इस कार्रवाई के बाद हिमंत बिस्व सरमा भड़क उठे और उन्होंने ममता बनर्जी की सरकार पर जमकर हमला बोला। जलपाईगुड़ी में भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि तृणमूल वाली गुंडागर्दी उनके साथ नहीं चलेगी और टक्कर बराबर की होगी। रविवार को उत्तर बंगाल में उन्होंने चार अलग-अलग जगहों पर जनसभाओं को संबोधित किया और हर जगह ममता सरकार पर तीखे प्रहार किए।

FIR पर फूटा गुस्सा, दी कड़ी चेतावनी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा बंगाल में भाजपा के सबसे आक्रामक और मुखर चेहरों में से एक हैं। वे पिछले कई दिनों से उत्तर बंगाल में एक के बाद एक रैलियां कर रहे थे और तृणमूल कांग्रेस पर तीखे हमले बोल रहे थे। इसी बीच बंगाल पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। इस कदम को हिमंत ने ममता सरकार की राजनीतिक बदले की भावना बताया और कहा कि यह सीधे-सीधे गुंडागर्दी है।

जलपाईगुड़ी की जनसभा में उन्होंने मंच से बेबाकी से कहा कि तृणमूल की इस हरकत का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर आप एक गोली चलाओगे तो मैं दो गोली चलाऊंगा। यह कोई धमकी नहीं बल्कि बराबर की टक्कर का वादा है। याद रखो कि बंगाल में थाना है तो असम में भी पुलिस है। यह बयान सुनकर सभा में मौजूद हजारों समर्थकों ने जोरदार तालियां बजाईं।

हिमंत ने यह भी साफ किया कि वे इस एफआईआर से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव से काम करने वाले लोग अलग होते हैं और वे उस तरह के नेता नहीं हैं। उन्होंने ममता सरकार को चेताया कि इस तरह की कार्रवाई से भाजपा का प्रचार रुकेगा नहीं बल्कि और तेज होगा।

‘तीन दिन से मेरे नाम का जाप कर रही हैं दीदी’

हिमंत बिस्व सरमा ने ममता बनर्जी पर सीधा तंज कसते हुए कहा कि ममता दीदी मोदी-मोदी और अमित शाह-अमित शाह का जाप करती रहती हैं। उनके भाषणों में भाजपा के नेताओं का नाम तो खूब आता है लेकिन राम का नाम और दुर्गा का नाम कभी नहीं आता। अब तीन दिन से मेरा नाम लेना शुरू कर दिया और ऊपर से मेरे नाम पर केस भी दर्ज कर दिया।

उनका यह तंज सुनकर सभा में खूब ठहाके लगे। हिमंत ने कहा कि जब कोई नेता विरोधी का नाम लेने लगे और उसके नाम पर केस दर्ज कराने लगे, तो इसका मतलब यह है कि वह उस नेता से डर गया है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी को उनसे डरने की जरूरत नहीं क्योंकि वे सिर्फ बंगाल की जनता के लिए यहां आए हैं।

मछली-मांस बंद होने के दावे पर दी प्रतियोगिता की चुनौती

इस जनसभा का सबसे दिलचस्प और चर्चित हिस्सा वह रहा जब हिमंत बिस्व सरमा ने ममता बनर्जी के उस दावे का जोरदार खंडन किया जिसमें वे कहती हैं कि बंगाल में भाजपा सरकार आने पर मछली और मांस बंद हो जाएगा। हिमंत ने इसे सफेद झूठ करार दिया।

उन्होंने भीड़ से पूछा कि असम में भाजपा की सरकार है, क्या वहां मछली-मांस बंद हुआ? जनता ने जोर से जवाब दिया कि नहीं। इस पर हिमंत ने कहा कि बिल्कुल नहीं हुआ और न होगा। फिर उन्होंने एक मजेदार चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि ममता दीदी को चुनौती है कि एक टेबल पर बैठकर देखते हैं कौन कितना खाता है। मछली-मांस खाने की प्रतियोगिता कर लें।

यह बयान सुनकर पूरी जनसभा हंसी से गूंज उठी। हिमंत का यह अंदाज लोगों को खूब भाया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी बंगाल के लोगों को डराने के लिए झूठी बातें फैला रही हैं और जनता को इस झूठ से सावधान रहना चाहिए।

हुमायूं कबीर पर भी बोला तीखा हमला

जनसभा में हिमंत बिस्व सरमा ने पूर्व तृणमूल नेता हुमायूं कबीर पर भी तीखा हमला बोला। हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद से जुड़े बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि किसी की निजी संपत्ति नहीं है कि जहां मन में आए मस्जिद बना लें। उन्होंने कहा कि अगर हुमायूं असम में मिलते तो दो घंटे में उनका ट्रीटमेंट हो जाता और फिर वे ऐसी बात कभी नहीं करते।

हिमंत के इस बयान ने बंगाल की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे दिया। तृणमूल कांग्रेस ने इस बयान की तीखी निंदा की और कहा कि यह एक जिम्मेदार मुख्यमंत्री की भाषा नहीं है। वहीं भाजपा के समर्थकों ने इस बयान को खूब सराहा।

चुनावी माहौल में बढ़ती तीखी बयानबाजी

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होता जा रहा है। हिमंत बिस्व सरमा पिछले कई दिनों से उत्तर बंगाल में डेरा डाले हुए हैं और उनकी रैलियों में भारी भीड़ जुट रही है। वे जहां भी जाते हैं अपनी सीधी और बेबाक बोलने की शैली की वजह से चर्चा में आ जाते हैं।

इस बार एफआईआर ने मामले को और गरमा दिया है। भाजपा ने इस एफआईआर को ममता सरकार की बौखलाहट बताया है। पार्टी का कहना है कि जब तृणमूल को लग रहा है कि वह चुनाव हार रही है तो वह इस तरह के हथकंडे अपना रही है।

वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि हिमंत बिस्व सरमा बंगाल में आकर भड़काऊ और गैरजिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं जो शांति और व्यवस्था के लिए खतरा है। इसीलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।

असम और बंगाल के बीच सियासी तनाव

हिमंत बिस्व सरमा की यह आक्रामकता और उनके खिलाफ एफआईआर ने दो राज्यों के बीच एक अजीब सियासी तनाव का माहौल बना दिया है। एक राज्य का मुख्यमंत्री दूसरे राज्य में जाकर प्रचार कर रहा है और दूसरे राज्य की सरकार उसके खिलाफ केस दर्ज कर रही है। यह अपने आप में बंगाल चुनाव की तीखी सियासत का एक बड़ा उदाहरण है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं चुनाव के माहौल को और ज्यादा ध्रुवीकृत करती हैं। एक तरफ यह भाजपा के लिए यह संदेश देने का मौका बन जाता है कि ममता सरकार विपक्ष को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। दूसरी तरफ तृणमूल इसे कानून और व्यवस्था की रक्षा के तौर पर पेश करती है।

23 और 29 अप्रैल को होगा फैसला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का 29 अप्रैल को होना है। मतगणना 4 मई को होगी। इससे पहले भाजपा और तृणमूल दोनों अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। हिमंत बिस्व सरमा जैसे आक्रामक नेता भाजपा के लिए उत्तर बंगाल में खास भूमिका निभा रहे हैं जहां पार्टी को मजबूत जीत की उम्मीद है।

इस एफआईआर के बाद हिमंत का यह बयान कि “टक्कर बराबर की होगी” बंगाल चुनाव की सियासत में एक नया मोड़ लेकर आया है। अब देखना यह होगा कि 4 मई को जनता का फैसला किसके पक्ष में जाता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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