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Assam Election 2026: 85% से ज्यादा वोटिंग के बाद CM हिमंत का बड़ा दावा, NDA जीतेगी 100 से ज्यादा सीटें, 4 मई को खुलेगा जनता का फैसला

Assam Election 2026: असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान संपन्न हो गया। सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस चुनाव में राज्य ने एक नया इतिहास रच दिया। चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 85 से 87 प्रतिशत के बीच मतदान दर्ज किया गया जो 2021 के विधानसभा चुनाव के 82.5 प्रतिशत के आंकड़े से काफी ज्यादा है। इतने बड़े पैमाने पर मतदान ने यह साफ कर दिया है कि असम की जनता इस बार अपने भविष्य को लेकर बेहद गंभीर और जागरूक है।

CM हिमंत का बड़ा दावा: NDA पार करेगी 100 सीटों का आंकड़ा

वोटिंग खत्म होते ही मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा मीडिया के सामने आए और उन्होंने एक बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन इस बार 100 से ज्यादा सीटें जीत सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी नतीजों पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी लेकिन अगर एनडीए तिहरे अंक तक पहुंच जाए तो इसमें कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।

सीएम हिमंत ने मतदान के रुझानों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी मूल के मुस्लिम समुदाय में मतदान प्रतिशत 95 से 96 तक रहा जबकि असम के बाकी समाज में यह 75 से 76 प्रतिशत के आसपास था। उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों के बीच इस बार सीधी टक्कर देखने को मिली। उनका साफ कहना था कि महिलाओं और युवाओं ने असम की पहचान और संस्कृति को बचाने के लिए वोट किया है और जनता ने घुसपैठियों के खिलाफ अपना मत दिया है।

Assam Election 2026: क्या NDA लगा पाएगी जीत की हैट्रिक?

Assam Election 2026

असम में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन 2016 और 2021 दोनों चुनावों में सत्ता में आया था। अब 2026 में तीसरी बार सत्ता में वापसी का सवाल है। बहुमत के लिए 64 सीटों की जरूरत है। सीएम हिमंत का 100 से ज्यादा सीटों का दावा अगर सच हुआ तो यह एनडीए की सबसे बड़ी जीत होगी।

सीएम ने यह भी बताया कि उनके सहयोगी दल असम गण परिषद यानी AGP ने पहले ही कुछ मुस्लिम बहुल सीटों पर अच्छी पकड़ बनाई है। भाजपा भी कई अहम सीटों पर मजबूत स्थिति में है। विश्लेषकों का मानना है कि महिला और युवा मतदाताओं की बढ़ी हुई भागीदारी का सीधा फायदा सत्ताधारी गठबंधन को मिल सकता है।

इस चुनाव में क्या थे मुख्य मुद्दे?

असम विधानसभा चुनाव 2026 कई अहम मुद्दों के इर्द-गिर्द लड़ा गया। घुसपैठ और असम की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा रहा। भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्त रवैये और असमिया संस्कृति को बचाने के अपने वादे पर वोट मांगे।

इसके अलावा बाढ़ प्रबंधन, रोजगार, सड़क और बुनियादी ढांचे का विकास भी बड़े मुद्दे रहे। भाजपा ने अपने पांच साल के कार्यकाल में किए गए कामों को जनता के सामने रखा। दूसरी तरफ कांग्रेस और विपक्षी दलों ने युवा बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और CAA-NRC जैसे संवेदनशील मुद्दों को हथियार बनाया।

इस बार चुनाव में विकास बनाम पहचान की सुरक्षा की सीधी टक्कर देखने को मिली। जनता के बड़े हिस्से ने अपनी भाषा, संस्कृति और जमीन की रक्षा को सबसे ऊपर रखा और इसी के आधार पर अपना वोट दिया।

कितने मतदाताओं ने किया अपने मत का इस्तेमाल?

असम में इस बार कुल 2 करोड़ 50 लाख से ज्यादा मतदाता थे। इनमें करीब 1 करोड़ 25 लाख महिला मतदाता शामिल थीं जिन्होंने बड़ी तादाद में मतदान केंद्रों पर पहुंचकर अपना वोट डाला। इसके अलावा 6 लाख 42 हजार से ज्यादा नए मतदाता भी इस बार पहली बार लोकतंत्र के इस उत्सव में शामिल हुए।

महिला मतदाताओं की इतनी बड़ी संख्या में भागीदारी इस बात का संकेत है कि असम की महिलाएं राज्य की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं। नए मतदाताओं का जोश भी इस बार मतदान केंद्रों पर साफ दिखा।

चुनाव आयोग ने कैसे सुनिश्चित की शांतिपूर्ण वोटिंग?

चुनाव आयोग ने इस बार असम में मतदान को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए पूरी तैयारी की थी। पूरे राज्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी। राज्य के सभी 31,490 मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था थी ताकि हर मतदान केंद्र पर नजर रखी जा सके।

इस बार चुनावी मैदान में 59 महिला उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रही थीं जो पिछले चुनावों की तुलना में एक अच्छा बदलाव है। भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच पूरे प्रदेश में छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर वोटिंग बेहद शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। चुनाव आयोग ने मतदान के दिन किसी भी अनियमितता की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की।

विपक्ष की क्या है रणनीति और दावे?

जहां एक तरफ सीएम हिमंत और एनडीए जीत के दावे कर रहे हैं वहीं विपक्षी दल भी पीछे नहीं हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने दावा किया है कि इस बार जनता बदलाव चाहती है और सरकार के कामकाज से लोग नाखुश हैं। विपक्ष का कहना है कि युवा बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याएं इस चुनाव में भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित होंगी।

हालांकि उच्च मतदान प्रतिशत का मतलब किसी एक पार्टी की जीत नहीं होता। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ज्यादा वोटिंग कभी-कभी सत्ता परिवर्तन का संकेत भी दे सकती है। ऐसे में 4 मई को आने वाले नतीजे ही बताएंगे कि जनता ने किसके साथ खड़े होने का फैसला किया है।

4 मई को खुलेगा असम की जनता का राज

असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित होंगे। उस दिन यह तय हो जाएगा कि असम में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनेगी या फिर राज्य में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू होगा। सीएम हिमंत का 100 से ज्यादा सीटों का दावा राजनीतिक गलियारों में गर्मी बढ़ा रहा है।

85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान ने यह तो जरूर साबित कर दिया है कि असम की जनता लोकतंत्र के प्रति बेहद जागरूक है और अपने वोट की ताकत को पहचानती है। अब 4 मई का इंतजार है जब ईवीएम खुलेंगी और असम की नई राजनीतिक तस्वीर सामने आएगी।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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