Top 5 This Week

Related Posts

8 महीने से लापता नाबालिग लड़की का मामला: झारखंड हाई कोर्ट सख्त, बोकारो थाना प्रभारी को हटाने का आदेश

Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो जिले की एक नाबालिग लड़की के लापता होने के मामले में पुलिस की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने एफआईआर दर्ज करने में आठ महीने की देरी और परिवार के सदस्यों के खिलाफ कथित कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बोकारो के एक पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को पद से हटाने का साफ आदेश दे दिया। यह फैसला परिवार की याचिका पर आया, जिसमें लड़की की तलाश और पुलिस की मदद न मिलने की शिकायत की गई थी।

लड़की 21 जुलाई 2025 को बोकारो से घर से निकली थी और उसके बाद से उसका कोई अता-पता नहीं है। परिवार का कहना है कि मां ने उसी दिन पुलिस से संपर्क किया, लेकिन एफआईआर चार अगस्त 2025 को दर्ज हुई। इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस की इस तरह की देरी और परिवार को परेशान करने की शिकायतें गंभीर हैं। कोर्ट ने पहले ही परिवार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था, फिर भी पुलिस ने एक रिश्तेदार को हिरासत में ले लिया।

परिवार की मुश्किलें और पुलिस का रवैया

लड़की की मां विंसेंट रोहित मार्की ने कोर्ट को बताया कि उनकी बेटी ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए घर से निकली थी। वापस नहीं लौटी तो तुरंत पुलिस स्टेशन पहुंचीं। लेकिन वहां पुलिस ने एफआईआर लिखने से मना कर दिया। मां ने कहा, “उसी रात हम थाने गए, लेकिन पुलिस ने पहले एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर हम किसी का नाम लेंगे और बेटी उसके साथ नहीं मिली तो हमें जेल हो सकती है और जमानत भी नहीं मिलेगी।”

परिवार के वकील ने अदालत में यह भी बताया कि पुलिस ने शिकायत दर्ज कराने से परिवार को डराया और हतोत्साहित किया। आखिरकार चार अगस्त को एक स्थानीय युवक ने अपहरण का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई। उस युवक को परिवार पुराने संबंधों की वजह से शक करता था। इस बीच आठ महीने बीत गए, लेकिन लड़की अभी तक नहीं मिली।

दिसंबर में मिला फोन, फिर पुलिस की कार्रवाई

Jharkhand News

दिसंबर 2025 में परिवार को एक फोन आया। फोन करने वाले ने दावा किया कि लड़की पुणे में है और उसे वापस लाया जाएगा। मां ने बताया कि फोन करने वाले ने कहा, “यह गंभीर मामला है, लेकिन मैं लड़की को वापस दिलवा दूंगा।” एक महीने बाद पुलिस ने उस व्यक्ति लोकनाथ महतो का पता लगाया और बोकारो से हिरासत में ले लिया। लेकिन लोकनाथ पुलिस हिरासत से भाग निकला।

परिवार का आरोप है कि इसके बाद भी पुलिस ने उनके रिश्तेदारों पर दबाव बनाना जारी रखा। सात अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने साफ आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता या उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। लेकिन इसके बावजूद गुरुवार को पुलिस ने एक और रिश्तेदार को हिरासत में ले लिया। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में इस बात पर गंभीर आपत्ति जताई।

हाई कोर्ट का सख्त रुख और आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर कई सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि लापता लड़की के परिवार के साथ कथित पुलिस कार्रवाई चिंताजनक है। पहले कोर्ट ने ऐसे कदमों पर रोक लगाने का आदेश दिया था, फिर भी इसे नजरअंदाज किया गया। कोर्ट ने बोकारो थाना प्रभारी को पद से हटाने का आदेश देते हुए साफ कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले की जांच तेजी से हो और लड़की की तलाश में कोई कोताही न बरती जाए। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि परिवार आठ महीने से इंसाफ की राह देख रहा है। बेटी की तलाश में वे दिन-रात परेशान हैं, लेकिन पुलिस की तरफ से सहयोग नहीं मिल रहा।

ऐसे मामलों में क्यों जरूरी है समय पर एफआईआर

नाबालिग लड़की के लापता होने जैसे मामले बेहद संवेदनशील होते हैं। कानून के मुताबिक, गुमशुदगी की सूचना मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। लेकिन कई बार पुलिस छोटी-छोटी बातों पर एफआईआर लिखने में देरी कर देती है। इससे सबूत खो जाते हैं और अपराधी आसानी से बच निकलते हैं। इस मामले में भी आठ महीने की देरी ने परिवार को और परेशान किया।

झारखंड हाई कोर्ट ने पहले भी कई मौकों पर पुलिस की लापरवाही पर सख्ती दिखाई है। इस फैसले से साफ संदेश जाता है कि लापता बच्चों और महिलाओं के मामलों में पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। परिवार के सदस्यों को डराकर या धमकाकर शिकायत दबाने की कोशिश बिल्कुल गलत है।

अगली सुनवाई 15 अप्रैल को

हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल 2026 को तय की है। तब तक पुलिस को लड़की की तलाश में रिपोर्ट देनी होगी। कोर्ट ने परिवार के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगाई हुई है। परिवार अब उम्मीद कर रहा है कि कोर्ट के इस सख्त रुख से पुलिस सक्रिय होगी और उनकी बेटी जल्द मिल जाएगी।

वकील ने कहा, “हम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हैं। परिवार आठ महीने से टूटा हुआ है। बेटी की एक तस्वीर और एक फोन कॉल के सहारे वे इंतजार कर रहे हैं। पुलिस को अब जिम्मेदारी निभानी चाहिए।”

परिवार की भावनाएं और समाज पर असर

लड़की की मां रोज थाने जाती हैं, हर अधिकारी से गुहार लगाती हैं। लेकिन हर बार उन्हें यही जवाब मिलता है कि जांच चल रही है। परिवार के अन्य सदस्य भी डरे हुए हैं। एक रिश्तेदार को हिरासत में लिए जाने से घर का माहौल और खराब हो गया। पड़ोसी और रिश्तेदार भी अब पुलिस से दूर रहने लगे हैं।

झारखंड हाई कोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे राज्य के उन मां-बाप के लिए उम्मीद की किरण है जो अपनी बेटियों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि पुलिस की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निष्कर्ष

यह मामला सिर्फ एक लड़की के लापता होने का नहीं है। यह पुलिस व्यवस्था, परिवार की पीड़ा और न्याय व्यवस्था की मजबूती का उदाहरण है। झारखंड हाई कोर्ट ने जो कदम उठाया है, वह सराहनीय है। अब जरूरत है कि पुलिस भी अपनी जिम्मेदारी समझे और लापता लड़की को सुरक्षित वापस लाए। परिवार को इंसाफ मिले और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

Read More Here:- 

अब DAC के बिना नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलिंडर, बिहार में नए नियम से एजेंसियों और उपभोक्ताओं की बढ़ी मुश्किलें

West Bengal Politics: ‘घुसपैठियों पर जीरो टॉलरेंस, सभी सरकारी कर्मचारियों को DA, अमित शाह ने जारी किया ‘संकल्प पत्र’

Government Job Update: 10वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, CRPF में 9,175 पदों पर निकली बंपर भर्ती, कब शुरू होगा आवेदन

ट्रंप की सख्त चेतावनी: डील टूटी तो ईरान की खैर नहीं, अमेरिकी सेना होर्मुज के आसपास तैयार

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles