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झारखंड के बोकारो में हाथियों का कहर, दो दिनों में पांच मौतें, दादा-पोते और पति-पत्नी की जान गई

Jharkhand News: झारखंड के बोकारो जिले में हाथियों के हमलों से हाहाकार मचा हुआ है। गोमिया प्रखंड के गांवों में हाथी लगातार लोगों पर हमला कर रहे हैं। दो दिनों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें दादा-पोते और पति-पत्नी समेत परिवार के सदस्य शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। हाथी घरों में घुसकर तोड़फोड़ कर रहे हैं और लोगों को कुचल रहे हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि समस्या बढ़ती जा रही है।

यह घटना बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड में हुई है। यहां हाथियों का झुंड गांवों में घुस आया और लोगों पर हमला किया। पहले दिन बड़की पन्नू गांव में तीन लोगों की मौत हुई। अगले दिन गांगपुर गांव में दो लोगों की जान चली गई। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। झारखंड में हाथी हमले की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस बार दो दिनों में इतनी मौतों से लोग सहमे हुए हैं।

गांगपुर गांव में हाथियों का तांडव – दादा-पोते की मौत

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बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड में महुआटांड़ पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांगपुर गांव में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। गुरुवार की रात करीब 8:30 बजे तीन हाथियों का झुंड गांव में घुस आया। हाथियों ने घरों के दरवाजे और दीवारें तोड़ दीं। घर के अंदर मौजूद लोगों पर हमला किया गया। इस हमले में 60 साल के सोमर साव और उनके 8 साल के पोते अमन कुमार की मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी घर में घुसकर लोगों को कुचल रहे थे।

घटना के समय गांव में बिजली नहीं थी। अंधेरा होने से हाथियों को फायदा मिला। सोमर साव अपने परिवार के साथ घर में थे। हाथियों ने पहले दीवार तोड़ी, फिर अंदर घुसकर हमला किया। अमन कुमार को हाथी ने कुचल दिया। सोमर साव भी हमले में मारे गए। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी झुंड में थे और बहुत आक्रामक थे। वे फसल और घरों को नुकसान पहुंचा रहे थे। इस घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया। लोग चीख-पुकार कर रहे थे, लेकिन अंधेरे में मदद नहीं पहुंच सकी।

इस हमले में तीन अन्य लोग घायल हो गए। इनमें 10 साल का राहुल कुमार, जो सोमर साव का नाती है, शामिल है। इसके अलावा शांति देवी, जो सोमर साव की समधन हैं, और 10 साल की राशि कुमारी भी घायल हुईं। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी हालत गंभीर है, लेकिन इलाज चल रहा है। राहुल कुमार को सिर में चोट लगी है। शांति देवी के पैर में फ्रैक्चर हुआ है। राशि कुमारी को भी कुचलने से चोटें आई हैं। परिवार वाले अस्पताल में उनके स्वास्थ्य की प्रार्थना कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि एक व्यक्ति अब भी लापता है। आशंका है कि हाथी उसे अपने साथ ले गए हों। उसकी तलाश जारी है। गांव के लोग रात भर जागते रहे। वे डर से घरों से बाहर नहीं निकल रहे थे। हाथी हमले की यह घटना बोकारो में हाथी समस्या को फिर से उजागर करती है। ग्रामीण इलाकों में जंगलों के करीब होने से ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। वन विभाग को सूचना दी गई, लेकिन समय पर मदद नहीं पहुंची। अब गांव वाले मांग कर रहे हैं कि हाथियों को जंगल में वापस भगाया जाए।

पिछले दिन की दर्दनाक घटना – एक परिवार के तीन सदस्य मारे गए

गोमिया प्रखंड के बड़की पन्नू गांव में एक दिन पहले हाथियों ने हमला किया था। बुधवार की देर रात करीब तीन बजे पांच हाथियों का झुंड गांव में घुस आया। हाथी घर के आंगन तक पहुंच गए। इस हमले में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में गंगवा करमाली, उनकी पत्नी कमली देवी और भाभी भगिया देवी शामिल हैं। हाथियों ने उन्हें कुचल दिया।

घटना कैसे हुई? गंगवा करमाली घर में सो रहे थे। हाथियों की आवाज सुनकर वे बाहर निकले। हाथियों ने उन्हें सूंड में लपेटकर पटक दिया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पति की चीख सुनकर कमली देवी बाहर आईं। हाथियों ने उन्हें भी कुचल दिया। भगिया देवी बचने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन एक हाथी ने उन्हें मार डाला। पूरा परिवार सदमे में है। घर में अब सिर्फ बच्चे और बुजुर्ग बचे हैं।

यह हमला रात के समय हुआ, जब लोग सो रहे थे। हाथी झुंड में थे और गांव में फसल खा रहे थे। वे घरों की ओर बढ़े और उत्पात मचाया। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी बहुत तेजी से हमला कर रहे थे। कोई बचाव का मौका नहीं मिला। इस घटना के बाद गांव में मातम छा गया। लोग रो-बिलख रहे थे। पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

बड़की पन्नू गांव जंगल के करीब है। यहां हाथी अक्सर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फसल की वजह से हाथी गांव की ओर आकर्षित होते हैं। वे मक्का और धान खाने आते हैं। लेकिन इस बार हमला इतना घातक था कि तीन जानें चली गईं। परिवार ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। वे कहते हैं कि हाथी समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। वन विभाग हाथियों को ट्रैक कर रहा है, लेकिन ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं।

बोकारो में हाथी समस्या क्यों बढ़ रही है?

झारखंड के बोकारो जिले में हाथी हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। गोमिया प्रखंड ग्रामीण इलाका है, जहां जंगल ज्यादा हैं। हाथी जंगलों से निकलकर गांवों में आते हैं। वजह है भोजन की तलाश। जंगलों में भोजन कम हो रहा है, इसलिए हाथी फसलों की ओर आकर्षित होते हैं। गांगपुर और बड़की पन्नू जैसे गांव जंगल के किनारे पर हैं। यहां हाथी आसानी से घुस आते हैं।

दो दिनों में पांच मौतें होना चिंताजनक है। पहले दिन तीन, दूसरे दिन दो। कुल मिलाकर गोमिया प्रखंड में हाथी आतंक मचा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में बिजली नहीं रहती, जिससे समस्या बढ़ जाती है। अंधेरे में हाथी आसानी से हमला कर देते हैं। वन विभाग को पहले से अलर्ट रहना चाहिए। लेकिन ग्रामीणों की शिकायत है कि सूचना देने पर भी समय पर टीम नहीं आती।

झारखंड में हाथी-मानव संघर्ष पुराना है। हर साल कई मौतें होती हैं। बोकारो जिले में यह समस्या ज्यादा है। हाथी झुंड में घूमते हैं और आक्रामक हो जाते हैं। खासकर रात में। ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम कम हैं। लोग घरों में रहते हैं, लेकिन हाथी दीवारें तोड़ देते हैं। इस बार गांगपुर में तीन हाथी थे, जबकि बड़की पन्नू में पांच। झुंड जितना बड़ा, उतना ज्यादा खतरा।

सरकार और वन विभाग क्या कर रहे हैं? वे हाथियों को जंगल में वापस भगाने की कोशिश करते हैं। लेकिन स्थायी समाधान नहीं है। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि जंगलों में हाथियों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाए। गांवों के आसपास बाड़ लगाई जाए। बिजली की व्यवस्था सुधारी जाए। लेकिन अभी तक ये मांगें पूरी नहीं हुईं। हाथी हमले से प्रभावित परिवारों को मुआवजा मिलता है, लेकिन जान की कीमत क्या?

प्रभावित परिवारों की स्थिति और मदद

गांगपुर गांव में सोमर साव के परिवार में अब दुख का साया है। दादा और पोते की मौत से घर उजड़ गया। राहुल कुमार और अन्य घायल अस्पताल में हैं। परिवार वाले कहते हैं कि अमन कुमार स्कूल जाता था। वह बहुत होशियार था। सोमर साव किसान थे। वे परिवार का सहारा थे। अब परिवार कैसे चलेगा? वे सरकार से मदद मांग रहे हैं।

बड़की पन्नू में गंगवा करमाली का परिवार भी टूट गया। पति-पत्नी और भाभी की मौत से बच्चे अनाथ हो गए। वे रो-रोकर बेहाल हैं। गांव वाले मदद कर रहे हैं, लेकिन दुख कम नहीं हो रहा। घायलों का इलाज बोकारो के अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों ने कहा कि वे ठीक हो जाएंगे, लेकिन चोटें गहरी हैं।

दोनों घटनाओं में कुल पांच मौतें हुईं। तीन घायल हैं। बोकारो प्रशासन ने जांच शुरू की है। वन विभाग हाथियों का पीछा कर रहा है। वे उन्हें जंगल में भगाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीण डरे हुए हैं। वे रात में सो नहीं पा रहे। बच्चे स्कूल नहीं जा रहे। खेतों में काम रुक गया है। हाथी समस्या से अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

झारखंड सरकार ने हाथी हमले पर ध्यान दिया है। वे मुआवजे का ऐलान करते हैं। लेकिन ग्रामीण कहते हैं कि मुआवजा जान वापस नहीं लाता। उन्हें सुरक्षा चाहिए। बोकारो में हाथी ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाए। अलर्ट सिस्टम हो। गांवों में लाइट्स लगें। ये मांगें लंबे समय से हैं। अब देखना है कि प्रशासन क्या करता है।

हाथी हमले से बचाव के उपाय

बोकारो में हाथी हमले से बचने के लिए ग्रामीण कुछ उपाय कर रहे हैं। वे रात में घर से बाहर नहीं निकलते। गांव में घंटियां बजाते हैं ताकि हाथी दूर रहें। लेकिन ये उपाय काफी नहीं हैं। वन विभाग सलाह देता है कि हाथी दिखें तो शोर मचाएं। दूर रहें। घर मजबूत बनाएं। लेकिन ग्रामीण गरीब हैं। मजबूत घर बनाना मुश्किल है।

झारखंड में हाथी संरक्षण भी जरूरी है। हाथी वन्यजीव हैं। उन्हें मारना गैरकानूनी है। इसलिए समाधान संतुलित होना चाहिए। जंगलों को बचाना पड़ेगा। हाथियों के लिए कॉरिडोर बनाएं। गांवों से दूर रखें। बोकारो जिले में ऐसे प्रयास हो रहे हैं, लेकिन धीमे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल्दी कार्रवाई हो।

गांगपुर और बड़की पन्नू की घटनाएं सबक हैं। दो दिनों में पांच मौतें। दादा-पोते, पति-पत्नी की जान गई। घायल अस्पताल में हैं। बोकारो में हाथी आतंक थमना चाहिए। प्रशासन को सक्रिय होना पड़ेगा। ग्रामीणों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। झारखंड के अन्य जिलों में भी ऐसी घटनाएं होती हैं। पूरे राज्य में योजना बनानी होगी।

Jharkhand News: बोकारो में शांति की जरूरत

बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड में हाथियों के हमलों से स्थिति तनावपूर्ण है। गांगपुर में दादा-पोते की मौत, बड़की पन्नू में तीन मौतें। कुल पांच जानें गईं। ग्रामीण दहशत में हैं। वन विभाग और प्रशासन काम कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। हाथी हमले रोकने के लिए कदम उठाए जाएं। झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष कम हो, यही उम्मीद है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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