Jharkhand News: झारखंड के पलामू प्रमंडल के किसानों के लिए लंबे इंतजार के बाद अच्छी खबर आई है। अमानत नदी पर बन रहे बैराज की परियोजना को नई जान मिल गई है। राज्य सरकार ने इस महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना के लिए 786 करोड़ रुपये की तीसरी पुनरीक्षित लागत को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। अब जल संसाधन विभाग इस पर तेजी से काम शुरू करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन साल के अंदर इस परियोजना को पूरा कर लिया जाए। इस फैसले से पलामू, पांकी, पाटन, तरहसी और मनातू प्रखंड के हजारों किसानों की मुश्किलें कम होने की उम्मीद है।
लंबे समय से अटकी हुई थी परियोजना
अमानत बैराज परियोजना की शुरुआत काफी पुरानी है। साल 1974 में इसे पहली बार प्रशासनिक मंजूरी मिली थी और तब इसकी लागत सिर्फ 41.67 करोड़ रुपये रखी गई थी। 1983 में पहली बार इसकी लागत बढ़ाकर 125.40 करोड़ रुपये कर दी गई। उसके बाद 2003 में दूसरी बार संशोधन हुआ और लागत 341.10 करोड़ रुपये हो गई।
लेकिन पिछले कई दशकों तक इस परियोजना पर ठोस प्रगति नहीं हो पाई। मुख्य समस्या वन भूमि के अधिग्रहण और फॉरेस्ट विभाग से जुड़े विवाद की थी। इन बाधाओं के कारण काम रुक गया था और किसान लगातार सिंचाई सुविधा की मांग करते रहे थे।
अब सरकार ने इन समस्याओं का हल निकाल लिया है। वन विभाग और ग्रामीण क्षेत्र के बीच लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध खत्म कर दिया गया है।
वन भूमि विवाद का स्मार्ट समाधान
परियोजना की सबसे बड़ी रुकावट वन भूमि का अधिग्रहण था। अब राज्य सरकार ने एक नया और व्यावहारिक रास्ता निकाला है। फैसला लिया गया है कि विवादित वन भूमि का भौतिक अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, बैराज से निकलने वाले पानी को पहुंचाने के लिए वन भूमि के नीचे से पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
इस तकनीकी तरीके से जंगल को कोई नुकसान नहीं होगा और किसानों की जमीन का मालिकाना हक भी सुरक्षित रहेगा। इस फैसले से पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों के बीच संतुलन बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समाधान अन्य परियोजनाओं के लिए भी मिसाल बन सकता है।
अब तक कितना खर्च और कितना बचा है?
परियोजना के पहले चरण में मार्च 2025 तक कुल 339.16 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। दूसरा चरण शुरू करने के लिए पहले 341.10 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन अब कुल लागत को बढ़ाकर 947.27 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
इसमें लगभग 177.70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, यानी पहले के मुकाबले 606.16 करोड़ रुपये ज्यादा। शेष बचे कामों के लिए अब 608.11 करोड़ रुपये की जरूरत है। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 786 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी के बाद जल संसाधन विभाग नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा और परियोजना को तेज गति से आगे बढ़ाएगा।
किसानों को कितना फायदा मिलेगा?
अमानत बैराज परियोजना के पूरा होने पर पलामू प्रमंडल की कृषि व्यवस्था पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। इस परियोजना से कुल 11,820 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुविधा मिलेगी।
पांकी प्रखंड में अमानत नदी पर बन रहे इस बैराज से पांकी, पाटन, तरहसी और मनातू प्रखंड के किसान सीधे लाभान्वित होंगे। सूखे की समस्या से जूझ रहे इस इलाके में अब साल भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
किसान अब ज्यादा फसलें उगा सकेंगे। खासकर धान, गेहूं, सब्जियां और फल उत्पादन में बढ़ोतरी होने की संभावना है। सिंचाई सुविधा मिलने से कृषि आय बढ़ेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
इसके अलावा, क्षेत्र से हो रहे पलायन को भी रोका जा सकेगा। युवा अब गांव में ही रहकर खेती-बाड़ी कर सकेंगे क्योंकि पानी की उपलब्धता से खेती लाभकारी बन जाएगी।
सरकार का लक्ष्य और रोडमैप
राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इस परियोजना को अगले तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा। जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि काम में कोई देरी न हो।
परियोजना के पूरा होने के बाद न सिर्फ सिंचाई बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बैराज निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और संबंधित कामों में स्थानीय लोगों को नौकरी मिलने की संभावना है।
इसके साथ ही क्षेत्र में छोटे-छोटे उद्योग भी विकसित हो सकते हैं जो कृषि उत्पादों पर आधारित होंगे। कुल मिलाकर यह परियोजना पलामू प्रमंडल के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों की राय
कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पलामू जैसे सूखा प्रभावित इलाके में बैराज जैसी परियोजनाएं बहुत जरूरी हैं। सिंचाई सुविधा मिलने से फसल की पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
इसके अलावा, भूजल स्तर भी सुधरेगा क्योंकि ज्यादा सिंचाई से कुओं और नलों पर निर्भरता कम होगी। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पाइपलाइन का विकल्प चुना जाना भी सराहनीय कदम है।
किसानों की प्रतिक्रिया
स्थानीय किसानों में इस खबर से खुशी की लहर दौड़ गई है। कई किसान लंबे समय से इस परियोजना की मांग कर रहे थे। अब उन्हें उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनके खेतों तक पानी पहुंचेगा।
एक स्थानीय किसान ने बताया कि पहले सूखे के कारण कई बार फसल बर्बाद हो जाती थी। अब बैराज बनने से साल में दो-तीन फसलें आसानी से ली जा सकेंगी।
निष्कर्ष
786 करोड़ रुपये की इस मंजूरी से पलामू के किसानों में नई उम्मीद जगी है। अमानत बैराज परियोजना अगर समय पर पूरी हुई तो न सिर्फ सिंचाई की समस्या सुलझेगी बल्कि पूरे क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास भी तेज होगा।
झारखंड सरकार का यह कदम किसान हितैषी नीतियों की दिशा में सकारात्मक माना जा रहा है। अब देखना यह है कि विभाग कितनी तेजी से काम करता है और किसानों तक पानी कब तक पहुंचता है।
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