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Border 2 Movie Review: सनी देओल की दहाड़ ने जीता दिल, लेकिन कहानी में कमजोरी

Border 2 Movie Review: नई दिल्ली, साल 2026 की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्म बॉर्डर 2 आखिरकार 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। 1997 में आई बॉर्डर की यादगार फिल्म के बाद लगभग तीन दशक बाद इसका सीक्वल सामने आया है। सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और आहान शेट्टी की इस युद्ध कथा फिल्म को दर्शकों से मिलाजुला रिस्पांस मिल रहा है। कुछ समीक्षकों ने इसे शानदार बताया तो कुछ ने कहानी की कमजोरी पर सवाल उठाए हैं।

कैसी है फिल्म की कहानी

Border 2 Movie Review
Border 2 Movie Review

बॉर्डर 2 की कहानी 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान की है। फिल्म तीन दोस्तों के इर्द गिर्द घूमती है जो नेशनल वॉर अकेडमी में 1961 में मिले थे। फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों यानी दिलजीत दोसांझ भारतीय वायुसेना में हैं। मेजर होशियार सिंह दहिया यानी वरुण धवन भारतीय सेना में हैं और लेफ्टिनेंट कमांडर महेंद्र रावत यानी आहान शेट्टी नौसेना में हैं। तीनों की शादी के दौरान ही उन्हें सीमा पर जाने का आदेश मिलता है।

Border 2 Movie Review: सनी देओल का दमदार किरदार

सनी देओल लेफ्टिनेंट कर्नल फतेह सिंह कलेर के किरदार में नजर आते हैं। वह तीनों दोस्तों के ट्रेनर रहे हैं। फिल्म में सनी देओल की एंट्री शुरुआत से लेकर अंत तक है। पहले यह अफवाह थी कि उनका रोल छोटा होगा लेकिन ऐसा नहीं है। सनी देओल पूरी फिल्म में छाए हुए हैं। उनकी दहाड़ और संवाद अदायगी आज भी उतनी ही प्रभावशाली है। भावनात्मक दृश्यों में वह दिल छू जाते हैं तो एक्शन सीन में वह रॉक करते हैं।

वरुण धवन का सरप्राइज परफॉर्मेंस

ट्रेड एनालिस्ट बॉर्डर 2 को 4.5 स्टार रेटिंग दी है। उन्होंने कहा कि वरुण धवन फिल्म का सरप्राइज एलिमेंट हैं। वरुण ने अपने किरदार में जान डाल दी है। उनके चरित्र की बहादुरी देखकर दर्शकों का दिल जीत लिया है। वरुण ने पहले कभी ऐसा रोल नहीं किया था। इस फिल्म में उन्होंने अपनी एक्टिंग की नई छवि पेश की है।

दिलजीत दोसांझ की कॉमेडी टाइमिंग

दिलजीत दोसांझ अपने किरदार को खूबसूरती से निभाते हैं। उनकी कॉमेडी टाइमिंग शानदार है। साथ ही भावनात्मक दृश्यों में भी वह प्रभावशाली हैं। हालांकि फिल्म में उन्हें उतना स्पेस नहीं मिला जितना मिलना चाहिए था। फिर भी जितने भी सीन्स हैं उनमें वह छा गए हैं।

आहान शेट्टी का अच्छा प्रयास

आहान शेट्टी ने भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है। वह एक योग्य कलाकार साबित होते हैं। हालांकि सनी देओल और वरुण धवन जैसे दिग्गजों के सामने वह थोड़े फीके पड़ जाते हैं। लेकिन जो मौके मिले हैं उनका सदुपयोग किया है।

महिला कलाकारों का योगदान

मोना सिंह फिल्म में सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ती हैं। सोनम बाजवा, मेधा राणा और अन्य महिला कलाकारों को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला। लेकिन जितने भी दृश्य हैं उनमें उन्होंने अच्छी एक्टिंग की है। फिल्म में परमवीर चीमा का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा।

पहले हाफ में भावनाओं का संगम

फिल्म का पहला आधा हिस्सा काफी अच्छा है। तीनों दोस्तों की दोस्ती और उनकी पृष्ठभूमि को खूबसूरती से दिखाया गया है। कॉमेडी और संगीत को कहानी में अच्छे से पिरोया गया है। इससे फिल्म रोचक बनी रहती है। परिवार वालों की भावनाएं दिखाई गई हैं। मां अपनी ममता को दबाकर बेटे को सीमा पर भेजती है। पत्नी अपने पति के बलिदान पर गर्व करती है।

इंटरवल ब्लॉक में दमदार संवाद

इंटरवल से पहले का हिस्सा बेहद शानदार है। सनी देओल का एक पंचलाइन डायलॉग दर्शकों को सीटें बजाने पर मजबूर कर देता है। यह सीन फिल्म की जान है। इसमें सनी देओल अपने पुराने अंदाज में नजर आते हैं। यह गदर फिल्म की याद दिलाता है।

दूसरे हाफ में कमजोरी

फिल्म का दूसरा आधा हिस्सा उतना प्रभावशाली नहीं है। युद्ध के दृश्यों में वीएफएक्स कमजोर है। प्रेजेंटेशन में भी खामियां हैं। कहानी दोहराव का शिकार हो जाती है। भावनात्मक गहराई की कमी खलती है। पहले हाफ जितनी मजबूती दूसरे हाफ में नहीं दिखती।

वीएफएक्स में सुधार की गुंजाइश

फिल्म का सबसे बड़ा नुकसान कमजोर वीएफएक्स है। युद्ध के दृश्यों में विजुअल इफेक्ट्स उस स्तर के नहीं हैं जो इतनी बड़ी फिल्म में होने चाहिए। 300 करोड़ रुपये के बजट वाली फिल्म से बेहतर वीएफएक्स की उम्मीद थी। कुछ सीन्स में यह साफ दिखता है कि काम और बेहतर हो सकता था।

गानों का अच्छा असर

फिल्म के गाने काफी अच्छे हैं। घर कब आओगे गाना बेहद भावुक है। यह मूल फिल्म के संदेसे आते हैं गाने का रीमिक्स वर्जन है। इश्क दा चेहरा गाना रोमांटिक है। जाते हुए लम्हों गाना भी खूबसूरत है। हिंदुस्तान मेरी जान और मोहब्बत हो गई है गाने भी पुराने गानों के रीमिक्स हैं। अनु मलिक, मिथून, विशाल मिश्रा और सचेत पारामपरा ने संगीत दिया है।

3 घंटे 20 मिनट की लंबाई

फिल्म की कुल अवधि 3 घंटे 20 मिनट है। यह थोड़ी लंबी है। कुछ हिस्सों में एडिटिंग और टाइट हो सकती थी। लेकिन कहानी को पूरी तरह बताने के लिए शायद यह जरूरी था। मनीष मोरे ने एडिटिंग की है।

निर्देशन और पटकथा

फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है। उन्होंने कई जगहों पर अच्छा काम किया है। लेकिन कहानी की मजबूती जितनी होनी चाहिए थी उतनी नहीं है। सुमित अरोड़ा, जेपी दत्ता और निधि दत्ता ने पटकथा लिखी है। निधि दत्ता ने कहानी भी लिखी है। कुछ सीक्वेंस बेहद शानदार हैं लेकिन कुछ जगहों पर कमजोरी खलती है।

सिनेमैटोग्राफी और एक्शन

अंशुल चोबे की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। फिल्म के युद्ध दृश्य बड़े पैमाने पर शूट किए गए हैं। पंजाब के मैदानों, उत्तराखंड के पहाड़ों और राजस्थान के रेगिस्तान में फिल्मांकन हुआ है। आईएनएस विक्रांत पर भी शूटिंग की गई है। एक्शन सीक्वेंस रोमांचक हैं।

बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त ओपनिंग

बॉर्डर 2 का एडवांस बुकिंग रिकॉर्ड तोड़ रहा है। फिल्म ने पहले ही दिन करीब 12.5 करोड़ रुपये का एडवांस कलेक्शन कर लिया था। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार पहले दिन फिल्म ने करीब 8.43 करोड़ रुपये की शुद्ध कमाई की है। यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि शाम और रात के शो अभी बाकी हैं।

1997 की बॉर्डर से तुलना

मूल बॉर्डर फिल्म ने पहले दिन 1.10 करोड़ रुपये कमाए थे। पहले हफ्ते में 6.30 करोड़, दूसरे हफ्ते में 5.75 करोड़ और तीसरे हफ्ते में 5.10 करोड़ रुपये कमाए थे। कुल मिलाकर फिल्म ने भारत में 39.30 करोड़ रुपये कमाए थे। विश्वभर में यह 64.98 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी है। बॉर्डर 2 ने पहले दिन ही 1997 की बॉर्डर की शुरुआती कमाई को पीछे छोड़ दिया है।

35 करोड़ के ओपनिंग की उम्मीद

ट्रेड एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि बॉर्डर 2 पहले दिन 35 से 40 करोड़ रुपये तक कमा सकती है। रिपब्लिक डे के चार दिनों के वीकेंड में फिल्म 125 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने की संभावना है। यह गदर 2 की ओपनिंग को चुनौती दे सकती है। फिल्म करीब 4800 स्क्रीन पर रिलीज हुई है।

ऑक्यूपेंसी की स्थिति

पहले दिन शुक्रवार को फिल्म की हिंदी 2डी ऑक्यूपेंसी 19.46 फीसदी रही। मॉर्निंग शो में यह आंकड़ा 19.46 फीसदी था। शाम और रात के शो में यह बढ़ने की पूरी उम्मीद है। दर्शक बड़ी संख्या में सिनेमाघरों में पहुंच रहे हैं।

दर्शकों की प्रतिक्रिया मिलीजुली

सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रिया मिलीजुली है। कुछ लोगों ने फिल्म को ब्लॉकबस्टर बताया है। एक यूजर ने लिखा कि सनी देओल हिंदुस्तान के असली किंग हैं। दूसरे यूजर ने कहा कि बॉर्डर 2 देशभक्ति के साथ जबरदस्त मास सिनेमा है। लेकिन कुछ दर्शकों को फिल्म बोरिंग लगी। उन्होंने कहा कि कहानी में कुछ नया नहीं है।

देशभक्ति की भावना

फिल्म में देशभक्ति की भावना भरपूर है। भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी को सलाम किया गया है। सैनिकों के त्याग और बलिदान को दिखाया गया है। यह फिल्म 1971 के युद्ध में हुए विभिन्न ऑपरेशंस पर आधारित है। ऑपरेशन चेंगिज खान का भी जिक्र है।

पुरानी स्टार कास्ट की कैमियो

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 1997 की बॉर्डर के मूल कलाकारों की कैमियो भी है। अक्षय खन्ना, सुनील शेट्टी और सुदेश बेरी को डिजिटल डी एजिंग तकनीक से दिखाया गया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

धर्मेंद्र के बेटे के रूप में परिचय

फिल्म की शुरुआत में सनी देओल का परिचय धर्मेंद्र के बेटे के रूप में दिया गया है। यह देखकर दर्शक भावुक हो गए। यह एक खूबसूरत श्रद्धांजलि है। सनी देओल के दिवंगत पिता धर्मेंद्र को याद किया गया है।

जेपी दत्ता की विरासत

मूल बॉर्डर के निर्देशक जेपी दत्ता अब इस फिल्म के प्रोड्यूसर हैं। उनकी बेटी निधि दत्ता ने कहानी लिखी है। यह फिल्म उनके पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास है। भूषण कुमार और कृष्ण कुमार ने भी प्रोड्यूसर के रूप में फिल्म बनाई है। टी सीरीज और जेपी फिल्म्स ने फिल्म बनाई है।

समीक्षकों की राय

विभिन्न समीक्षकों ने अलग अलग रेटिंग दी है। तरण आदर्श ने 4.5 स्टार दिए और फिल्म को आउटस्टैंडिंग बताया। इंडिया टीवी ने 2 स्टार दिए और कहानी की कमजोरी बताई। 123तेलुगु ने 2.75 स्टार दिए। बॉलीवुड हंगामा ने 4.5 स्टार देकर फिल्म को जबरदस्त युद्ध महाकाव्य बताया।

सनी देओल का पावर पैक्ड अवतार

सनी देओल एक बार फिर अपने पावर पैक्ड अवतार में नजर आए हैं। उनके संवाद और एक्शन थिएटरों में जबरदस्त तालियां बटोर रहे हैं। गदर 2 की सफलता के बाद यह उनकी दूसरी बड़ी देशभक्ति फिल्म है। दर्शक उनके इस अंदाज के दीवाने हैं।

रिपब्लिक डे वीकेंड का फायदा

26 जनवरी रिपब्लिक डे की वजह से लंबा वीकेंड मिल रहा है। इससे फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बड़ा फायदा मिलेगा। देशभक्ति की थीम वाली फिल्म के लिए यह सही समय है। परिवार के साथ लोग इसे देखने आ रहे हैं।

क्या बॉर्डर की विरासत को आगे बढ़ा पाई

मूल बॉर्डर भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार युद्ध फिल्मों में से एक है। उसके मुकाबले बॉर्डर 2 थोड़ी कमजोर पड़ती है। लेकिन फिर भी यह एक वॉचेबल फिल्म है। सनी देओल और वरुण धवन की एक्टिंग फिल्म को देखने लायक बनाती है।

निष्कर्ष

बॉर्डर 2 एक मिलाजुला अनुभव है। सनी देओल का दमदार प्रदर्शन, वरुण धवन की सरप्राइज एक्टिंग और भावनात्मक दृश्य फिल्म की ताकत हैं। लेकिन कमजोर कहानी, वीएफएक्स की खामियां और दूसरे हाफ की कमजोरी इसकी कमियां हैं। देशभक्ति फिल्मों के प्रेमी इसे जरूर पसंद करेंगे। बॉक्स ऑफिस पर यह अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। लेकिन मूल बॉर्डर जैसा असर यह नहीं छोड़ पाती।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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