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बजट 2026 में बदल सकती है घर खरीदने की परिभाषा, 90 लाख रुपये तक के घर होंगे किफायती श्रेणी में

Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में घर खरीदारों को बड़ी राहत मिल सकती है। रियल एस्टेट उद्योग ने सरकार से किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव की मांग की है। उद्योग संगठनों ने किफायती आवास की कीमत सीमा को मौजूदा 45 लाख रुपये से बढ़ाकर 90 लाख रुपये करने की मांग की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। उम्मीद है कि इस बजट में मध्यम वर्ग के घर खरीदारों के लिए कई बड़े ऐलान हो सकते हैं।

किफायती आवास की पुरानी परिभाषा

Budget 2026
Budget 2026

वर्तमान में सरकार 45 लाख रुपये तक के मकान को किफायती आवास मानती है। यह सीमा 2017 में तय की गई थी। तब से लेकर अब तक जमीन की कीमतों और निर्माण लागत में भारी इजाफा हो चुका है। लेकिन किफायती आवास की परिभाषा में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस वजह से बड़े शहरों में 45 लाख रुपये में घर खरीदना लगभग असंभव हो गया है।

क्रेडाई ने की 90 लाख की मांग

कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी क्रेडाई ने बजट 2026 के लिए अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपी हैं। क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि मौजूदा कीमत सीमा बाजार की वास्तविकता को नहीं दर्शाती है। उन्होंने कहा कि किफायती आवास को व्यावहारिक परिभाषा की जरूरत है न कि भावनात्मक परिभाषा की।

महंगाई और निर्माण लागत में बढ़ोतरी

पिछले कुछ वर्षों में स्टील, सीमेंट और मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। शहरी और अर्ध शहरी इलाकों में जमीन की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं। बड़े शहरों के बाहरी इलाकों में भी 45 लाख रुपये से कम में घर मिलना मुश्किल है। डेवलपर्स का कहना है कि इस कीमत में प्रोजेक्ट बनाना उनके लिए व्यावहारिक नहीं रह गया है।

बड़े शहरों में स्थिति अधिक गंभीर

मुंबई में 600 वर्ग फुट का अपार्टमेंट बाहरी इलाकों में 60 से 75 लाख रुपये में मिलता है। पुणे में ऐसे घरों की कीमत 50 से 65 लाख रुपये है। बेंगलुरु और दिल्ली एनसीआर में भी कीमतें सरकारी परिभाषा से कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में 45 लाख रुपये की सीमा पूरी तरह से पुरानी हो चुकी है।

टियर वन शहरों के लिए 85 लाख की मांग

विशेषज्ञों का सुझाव है कि मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए किफायती आवास की सीमा 85 लाख रुपये होनी चाहिए। दिल्ली एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे अन्य प्रमुख शहरों के लिए यह सीमा कम से कम 75 लाख रुपये होनी चाहिए। यह आंकड़े मनमाने नहीं बल्कि वर्तमान निर्माण लागत और जमीन की कीमतों को ध्यान में रखते हुए तय किए गए हैं।

होम लोन ब्याज में छूट बढ़ाने की मांग

उद्योग संगठनों ने होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। वर्तमान में सेक्शन 24बी के तहत खुद के रहने के लिए लिए गए घर पर 2 लाख रुपये तक के ब्याज पर छूट मिलती है। यह सीमा 2014 में तय की गई थी। नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल यानी नारेडको ने इस सीमा को 5 लाख रुपये करने की मांग की है।

पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही है छूट

नई टैक्स व्यवस्था में होम लोन के ब्याज पर कोई छूट नहीं मिलती है। यह छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही उपलब्ध है। इस वजह से कई लोग घर खरीदने के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था को ही चुनते हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि नई व्यवस्था में भी यह छूट दी जानी चाहिए।

जीएसटी में कमी की मांग

रियल एस्टेट उद्योग ने निर्माणाधीन घरों पर जीएसटी की दर कम करने की मांग की है। वर्तमान में निर्माण अनुबंधों पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। उद्योग चाहता है कि इसे घटाकर 12 फीसदी या आदर्श रूप से 5 फीसदी किया जाए। किफायती आवास पर फिलहाल 1 फीसदी की रियायती दर लागू है।

कीमत सीमा बढ़ने से मिलेगा फायदा

अगर किफायती आवास की कीमत सीमा बढ़ाई जाती है तो ज्यादा घर इस श्रेणी में आएंगे। इससे इन घरों पर 1 फीसदी की रियायती जीएसटी दर लागू होगी। इससे घर खरीदारों को सीधे तौर पर फायदा होगा। क्रेडाई के राष्ट्रीय सचिव गौरव गुप्ता ने इसे महत्वपूर्ण लाभ बताया है।

डेवलपर्स के लिए टैक्स छूट की मांग

उद्योग ने किफायती आवास बनाने वाले डेवलपर्स के लिए टैक्स लाभ की भी मांग की है। पहले सेक्शन 80आईबीए के तहत ऐसे डेवलपर्स को टैक्स छूट मिलती थी। यह सुविधा 2021 में समाप्त हो गई और अब तक इसे फिर से शुरू नहीं किया गया है। डेवलपर्स का कहना है कि बिना इन प्रोत्साहनों के किफायती आवास प्रोजेक्ट लाभदायक नहीं रह गए हैं।

पहली बार घर खरीदारों के लिए राहत

विशेषज्ञों ने पहली बार घर खरीदने वालों के लिए विशेष प्रावधान की मांग की है। उन्होंने क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम को और मजबूत बनाने का सुझाव दिया है। यह योजना प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत फिर से शुरू की गई थी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका दायरा और बढ़ाने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री आवास योजना की सीमा भी कम

वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत 35 लाख रुपये तक के घर कवर होते हैं। बड़े शहरों में इस कीमत में घर मिलना मुश्किल है। नाइट फ्रैंक इंडिया ने सुझाव दिया है कि शहरी केंद्रों में इस सीमा को 75 लाख रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए।

किफायती आवास की बिक्री में गिरावट

नाइट फ्रैंक इंडिया के आंकड़ों के अनुसार किफायती आवास की बिक्री में भारी गिरावट आई है। 2018 में कुल बिक्री में किफायती आवास की हिस्सेदारी 54 फीसदी थी। 2025 में यह घटकर सिर्फ 21 फीसदी रह गई है। 2025 में किफायती आवास के लेनदेन में साल दर साल 17 फीसदी की गिरावट आई है।

लक्जरी घरों की बिक्री में बढ़ोतरी

जहां किफायती आवास की बिक्री घट रही है वहीं लक्जरी घरों की बिक्री में भारी बढ़ोतरी हो रही है। 2024 में एचएनआई और एनआरआई की लक्जरी घरों की खरीद में 170 फीसदी की वृद्धि हुई। यह बाजार में असमानता को दर्शाता है। मध्यम वर्ग के खरीदार महंगाई की वजह से बाजार से बाहर हो रहे हैं।

स्टांप ड्यूटी में एकरूपता की मांग

एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि सभी राज्यों में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क को एक समान बनाया जाना चाहिए। फिलहाल यह अलग-अलग राज्यों में 7.5 फीसदी से 12 फीसदी के बीच है। एकरूपता से घर खरीदारों के लिए घर ज्यादा किफायती होंगे।

रेंटल हाउसिंग और रीट्स को बढ़ावा

उद्योग ने किराये के आवास और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी रीट्स को बढ़ावा देने की भी मांग की है। कोलियर्स इंडिया के सीईओ बादल यागनिक ने कहा कि रीट्स और एसएम रीट्स को खुदरा निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने की जरूरत है। इससे रियल एस्टेट में निवेश का लोकतंत्रीकरण होगा।

ग्रीन बिल्डिंग के लिए प्रोत्साहन

क्रेडाई ने 2047 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। संगठन अपने सदस्यों को हरित निर्माण प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। क्रेडाई ने नासिक में 9000 एकड़ और गुरुग्राम में 150 एकड़ में वनीकरण किया है। हैदराबाद चैप्टर ने पर्यावरण प्रयासों में लगभग 3 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए स्पष्टता

उद्योग ने पुनर्विकास और टाउनशिप परियोजनाओं के लिए नियामक स्पष्टता की मांग की है। उन्होंने सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को वास्तव में लागू करने का आग्रह किया है। तेज मंजूरी से परियोजनाओं में तेजी आएगी और डिलीवरी जल्दी होगी।

टियर 2 शहरों के लिए समर्थन

ट्राइडेंट रियल्टी के सीईओ परविंदर सिंह ने टियर 2 शहरों में प्रीमियम हाउसिंग के लिए नीतिगत समर्थन की मांग की है। इन शहरों में जीवनशैली में बदलाव हो रहा है। खरीदार बड़े रहने की जगह और बेहतर सुविधाएं चाहते हैं। सरकारी समर्थन से इन बाजारों को और मजबूती मिलेगी।

अनौपचारिक कामगारों के लिए क्रेडिट गारंटी

विशेषज्ञों ने अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वालों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना की मांग की है। ऑटो चालक, दुकानदार और अन्य स्व-रोजगार वाले लोगों को होम लोन मिलने में कठिनाई होती है। यह योजना उनके लिए छोटे घर खरीदना संभव बना सकती है।

कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव

उद्योग ने संपत्ति पर कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में स्पष्टता की मांग की है। नारेडको ने सुझाव दिया है कि अगर संपत्ति बेचने की रकम से तीन या अधिक मकान बनाए जाएं तो कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलनी चाहिए। इससे हाउसिंग स्टॉक बढ़ेगा।

इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन की बहाली

नारेडको ने इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन को फिर से शुरू करने की मांग की है। यह आयोग 1 फरवरी 2021 से बंद है। 1976 में स्थापित यह आयोग करदाताओं को कर अधिकारियों के साथ विवाद निपटाने का अवसर देता था। इससे जुर्माने और मुकदमे से राहत मिलती थी।

बाजार की वास्तविकता से जुड़ी नीति जरूरी

एयू रियल एस्टेट के निदेशक आशीष अग्रवाल ने कहा कि हमें एनसीआर लक्जरी हाउसिंग बाजार के लिए नीतिगत स्थिरता और विकास केंद्रित प्रोत्साहन की उम्मीद है। उन्होंने बुनियादी ढांचे की बाधाओं को दूर करने, मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने और पर्यावरण मंजूरी में तेजी लाने की जरूरत बताई।

मध्यम वर्ग के लिए राहत जरूरी

घर खरीदना हर भारतीय का सपना है। लेकिन बढ़ती कीमतों और ऊंची ईएमआई ने इस सपने को मुश्किल बना दिया है। मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना लगातार कठिन होता जा रहा है। बजट 2026 में अगर सरकार इन मांगों पर ध्यान देती है तो लाखों लोगों का घर का सपना पूरा हो सकता है।

आर्थिक विकास में योगदान

रियल एस्टेट सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास में प्रमुख भूमिका निभाता है। किफायती आवास को बढ़ावा देने से न केवल लोगों को घर मिलेगा बल्कि अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

हाउसिंग फॉर ऑल का लक्ष्य

सरकार का हाउसिंग फॉर ऑल का लक्ष्य है। लेकिन पुरानी परिभाषाओं और सीमाओं के साथ यह लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है। नीतियों को बाजार की वास्तविकता के अनुसार बदलना जरूरी है। तभी सही मायने में सभी के लिए आवास का सपना पूरा हो सकेगा।

उद्योग की एकमत मांग

रियल एस्टेट उद्योग के सभी प्रमुख संगठन एक स्वर में किफायती आवास की परिभाषा बदलने की मांग कर रहे हैं। क्रेडाई, नारेडको, एनारॉक और अन्य संगठनों ने मिलकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। यह दिखाता है कि उद्योग में इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता है।

1 फरवरी को पेश होगा बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह नए आयकर अधिनियम के 1 अप्रैल 2026 से लागू होने से पहले का आखिरी बड़ा बजट है। घर खरीदार और रियल एस्टेट उद्योग दोनों इस बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं।

विशेषज्ञों की राय

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा कि हाउसिंग सेक्टर को बढ़ती संरचनात्मक असंतुलन को दूर करने के लिए केंद्रित हस्तक्षेप की जरूरत है। किफायती आवास निरंतर कम प्रदर्शन कर रहा है। सया ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास भसीन ने कहा कि कटौती को कम से कम 5 लाख रुपये करने से खरीदारों को वास्तविक राहत मिलेगी।

बजट से उम्मीदें

बजट 2026 में अगर सरकार किफायती आवास की परिभाषा को संशोधित करती है, टैक्स प्रोत्साहनों को बहाल करती है और जीएसटी को तर्कसंगत बनाती है तो सेक्टर में बड़ी आपूर्ति बढ़ सकती है। घर खरीदार फिर से पहुंच बना सकेंगे। डेवलपर्स आत्मविश्वास के साथ योजना बना सकेंगे। आज का यथार्थवादी फैसला अगले दशक के लिए भारत के हाउसिंग बाजार को आकार दे सकता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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