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अब DAC के बिना नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलिंडर, बिहार में नए नियम से एजेंसियों और उपभोक्ताओं की बढ़ी मुश्किलें

Bihar News: घरेलू रसोई गैस की डिलीवरी में अब बड़ा बदलाव आ गया है। बिहार के किशनगंज जिले समेत पूरे देश में डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) को 100 प्रतिशत अनिवार्य कर दिया गया है। बिना DAC कोड दिए अब कोई भी गैस सिलिंडर डिलीवर नहीं किया जाएगा। गैस कंपनियों ने इस नियम को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसका मकसद वितरण में पारदर्शिता लाना और फर्जी डिलीवरी व कालाबाजारी को रोकना है।

ठाकुरगंज क्षेत्र की सरिता इंडेन गैस एजेंसी की प्रोपराइटर सरिता कालोंडिया ने बताया कि पहले DAC की अनिवार्यता 80 प्रतिशत तक सीमित थी, जिसे बाद में 85 और फिर 95 प्रतिशत तक बढ़ाया गया। अब इसे पूरी तरह 100 प्रतिशत कर दिया गया है। अगर एजेंसी को 100 सिलिंडर मिलते हैं तो सभी 100 सिलिंडर केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को दिए जा सकते हैं जिनके पास वैध DAC कोड उपलब्ध है। बिना कोड दिए एक भी सिलिंडर डिलीवर करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और एजेंसी पर कार्रवाई हो सकती है।

नए नियम से कैसे काम करेगी डिलीवरी प्रक्रिया

नए नियम के तहत जब उपभोक्ता गैस सिलिंडर बुक करता है तो उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) भेजा जाता है। सिलिंडर डिलीवरी के समय उपभोक्ता को इस कोड को डिलीवरी वाले व्यक्ति को बताना होता है। कोड सही होने पर ही सिलिंडर दिया जाएगा।

यह व्यवस्था मुख्य रूप से फर्जी कनेक्शन या गलत हाथों में गैस पहुंचने से रोकने के लिए लाई गई है। केंद्र सरकार और तेल कंपनियां चाहती हैं कि सब्सिडी वाला गैस सिलिंडर सही उपभोक्ता तक ही पहुंचे। हाल के महीनों में DAC आधारित डिलीवरी का प्रतिशत काफी बढ़ा है, जो पहले 53 प्रतिशत के आसपास था और अब 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है।

Bihar News: एजेंसियों पर बढ़ा दबाव

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नए नियम ने गैस एजेंसी संचालकों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। खासकर वीआईपी, जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के लिए समस्या ज्यादा है। इनमें से कई के नाम पर व्यक्तिगत गैस कनेक्शन नहीं होता क्योंकि उनका स्थानांतरण होता रहता है। ऐसे लोग सरकारी आवासों पर आपूर्ति विभाग के माध्यम से गैस लेते थे, जहां बिना कनेक्शन नंबर के भी सिलिंडर मिल जाता था।

अब DAC अनिवार्य होने के बाद यह व्यवस्था रुक गई है। एजेंसियों पर इन प्रभावशाली लोगों का दबाव बढ़ गया है। अगर एजेंसी नियम मानती है तो नाराजगी का सामना करना पड़ता है और अगर दबाव में सिलिंडर दे देती है तो कंपनी से सजा का खतरा रहता है। कई एजेंसी संचालक इस दोहरी मार से परेशान हैं।

आम उपभोक्ताओं को भी हो रही तकनीकी दिक्कतें

सामान्य परिवारों के लिए भी यह नया नियम आसान नहीं है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि समय पर DAC कोड नहीं पहुंच पाता। मोबाइल नेटवर्क की समस्या, पंजीकृत नंबर में गड़बड़ी, या तकनीकी खराबी की वजह से कोड नहीं आता। ऐसे में सिलिंडर डिलीवरी रुक जाती है और घर में रसोई का काम प्रभावित होता है।

किशनगंज के कई गांवों और छोटे कस्बों में नेटवर्क की स्थिति अच्छी नहीं है। बुजुर्गों और महिलाओं को खास परेशानी हो रही है जो ऑनलाइन बुकिंग या कोड मैनेज करने में दिक्कत महसूस करते हैं। कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि अगर कोड नहीं आ रहा हो तो वैकल्पिक व्यवस्था जैसे एजेंसी पर OTP जनरेट करने की सुविधा दी जाए ताकि आम आदमी को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े।

DAC प्रणाली से फायदे और चुनौतियां

सरकार का मानना है कि DAC अनिवार्य करने से गैस वितरण में पारदर्शिता आएगी। फर्जी डिलीवरी, कालाबाजारी और सब्सिडी के दुरुपयोग पर लगाम लगेगी। इससे सही उपभोक्ताओं को समय पर सिलिंडर मिल सकेगा और सरकारी खजाने पर बोझ भी कम होगा।

हालांकि ग्राउंड लेवल पर चुनौतियां साफ दिख रही हैं। तकनीकी समस्याओं को दूर करने की जरूरत है। कई जगहों पर DAC कोड अब बुकिंग वाले डिवाइस, व्हाट्सएप या ईमेल पर भी भेजा जा रहा है ताकि पुरानी समस्या कम हो। फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और सुविधा बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है।

किशनगंज में स्थिति और स्थानीय प्रतिक्रिया

किशनगंज जिले में गैस एजेंसियां इस नए नियम को लागू करने में लगी हुई हैं। कुछ एजेंसी संचालक बताते हैं कि शुरुआत में काफी कन्फ्यूजन था लेकिन अब धीरे-धीरे उपभोक्ता समझ रहे हैं। फिर भी रोजाना कुछ न कुछ शिकायतें आ रही हैं।

स्थानीय लोगों ने कहा कि डीएसी प्रणाली अच्छी है लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए कंपनियों को और बेहतर सपोर्ट देना चाहिए। जैसे नेटवर्क कमजोर इलाकों में वैकल्पिक तरीके से कोड जनरेट करने की सुविधा या हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत मदद।

सरकार और कंपनियों की जिम्मेदारी

तेल कंपनियां और पेट्रोलियम मंत्रालय इस व्यवस्था को और सुधारने पर काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में DAC आधारित डिलीवरी का प्रतिशत काफी बढ़ा है, जो सकारात्मक संकेत है। सरकार उपभोक्ताओं को डिजिटल मोड से बुकिंग करने की सलाह दे रही है ताकि प्रक्रिया आसान बने।

फिर भी ग्रामीण बिहार जैसे क्षेत्रों में इंटरनेट और नेटवर्क की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत है। अगर तकनीकी दिक्कतें दूर हो गईं तो यह नियम लंबे समय में सभी के लिए फायदेमंद साबित होगा।

उपभोक्ताओं के लिए सलाह

उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि अपना मोबाइल नंबर सही और सक्रिय रखें। बुकिंग हमेशा पंजीकृत नंबर से करें। अगर कोड नहीं आ रहा हो तो तुरंत एजेंसी या कंपनी की हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

DAC कोड सुरक्षित रखें और डिलीवरी वाले को सिर्फ सही समय पर बताएं। अगर कोई तकनीकी समस्या बार-बार हो रही हो तो कनेक्शन डिटेल्स अपडेट करवाएं।

निष्कर्ष: पारदर्शिता जरूरी लेकिन सुविधा भी

नया DAC नियम रसोई गैस वितरण को और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सही व्यक्ति तक सब्सिडी पहुंचेगी। लेकिन साथ ही एजेंसियों और आम उपभोक्ताओं की परेशानियां भी सामने आई हैं।

अगर सरकार और कंपनियां तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर करती हैं और जागरूकता अभियान चलाती हैं तो यह व्यवस्था सफल हो सकती है। फिलहाल किशनगंज समेत बिहार के कई जिलों में लोग इस बदलाव के साथ खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं।

रसोई की आग जलती रहे, इसके लिए DAC जैसी व्यवस्था को और यूजर फ्रेंडली बनाने की जरूरत है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह नया नियम कितना प्रभावी साबित होता है और उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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