Jharkhand News: झारखंड में शराब घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की प्रवेश जल्द हो सकती है। छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित आर्थिक अपराध विंग द्वारा सात सितंबर 2024 को दर्ज प्राथमिकी के लगभग एक वर्ष पश्चात सीबीआई ने इस मामले से संबंधित जानकारी एकत्रित करना प्रारंभ कर दिया है। सूत्रों के अनुसार शीघ्र ही सीबीआई इस मामले में औपचारिक मामला दर्ज करेगी।
रायपुर ईओडब्ल्यू की जांच और सीबीआई को दस्तावेज
वर्तमान में यह मामला रायपुर आर्थिक अपराध विंग के पास है, जहां झारखंड में शराब घोटाले के प्रमुख संदिग्धों और सत्ता के करीबी रहे आरोपितों की जानकारी एकत्रित की जा रही है। इन आरोपितों में प्रेम प्रकाश भी सम्मिलित है, जिसे प्रवर्तन निदेशालय ने भूमि घोटाला मामले में पहले ही जेल भेज दिया था।
रायपुर ईओडब्ल्यू ने प्रेम प्रकाश से संबंधित समस्त दस्तावेज संग्रहित किए हैं। आर्थिक अपराध विंग ने अपने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज अपनी अनुशंसा के साथ दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय को सौंप दिए हैं। यह कदम मामले में सीबीआई की भूमिका के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
झारखंड एसीबी द्वारा जेल भेजे गए आरोपित निशाने पर
झारखंड में शराब घोटाला मामले की जांच कर रही झारखंड भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जिन आरोपितों को गिरफ्तार कर कारागार भेजा है, वे सभी वर्तमान में रायपुर ईओडब्ल्यू के निशाने पर हैं। प्रत्येक आरोपित से व्यक्तिगत रूप से पूछताछ की जा रही है और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
हाल ही में रायपुर ईओडब्ल्यू ने देसी शराब आपूर्ति कंपनी के संचालक चुन्नू जायसवाल को रिमांड पर लिया था और उससे विस्तृत पूछताछ की थी। इससे पूर्व अन्य आरोपितों से भी गहन पूछताछ संपन्न हो चुकी है। ये समस्त आरोपित अब सीबीआई की जांच के दायरे में भी आएंगे और केंद्रीय एजेंसी इनसे भी पूछताछ कर सकती है।
प्रवर्तन निदेशालय की पीएमएलए जांच

रायपुर ईओडब्ल्यू मामले में प्रवर्तन निदेशालय रांची ने वर्ष 2024 में ही धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच आरंभ की थी। ईडी ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह तथा अन्य अधिकारियों को आरोपित बनाया था।
इसके उपरांत ईडी ने 29 अक्टूबर 2024 को सभी संबंधित व्यक्तियों के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की थी। इस छापेमारी में झारखंड की उत्पाद नीति से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात बरामद हुए। जनवरी 2022 में छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के मॉडल पर आधारित इस नीति के दस्तावेज, प्रिज्म कंपनी के होलोग्राम के नमूने, दो आईफोन तथा अन्य मोबाइल फोन बरामद किए गए थे।
आरोपों का विवरण
गंभीर आरोप है कि जनवरी 2022 में झारखंड में उत्पाद नीति में परिवर्तन करने के लिए छत्तीसगढ़ के अधिकारियों के साथ तत्कालीन उत्पाद सचिव एवं अन्य अधिकारियों ने षड्यंत्र रचा और रायपुर में गुप्त बैठक आयोजित की थी। यह बैठक नई नीति को लागू करने की योजना बनाने के लिए की गई थी।
इसके अतिरिक्त यह भी आरोप है कि उत्पाद नीति लागू होने के पश्चात दो वर्षों तक झारखंड उत्पाद नीति में छत्तीसगढ़ की एजेंसियां सक्रिय रूप से कार्यरत रहीं। इन एजेंसियों ने नकली होलोग्राम का उपयोग करते हुए अवैध शराब की आपूर्ति की और झारखंड सरकार को करोड़ों रुपये की वित्तीय क्षति पहुंचाई।
ईडी और सीबीआई की समानांतर जांच
प्रवर्तन निदेशालय की जांच धन शोधन के पहलुओं पर केंद्रित है और यह लगातार जारी है। वहीं अब सीबीआई इन समस्त बिंदुओं को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत विस्तृत रूप से खंगालेगी। दोनों एजेंसियों की समानांतर जांच से यह सुनिश्चित होने की संभावना है कि घोटाले के सभी आयाम सामने आएं।
सीबीआई की जांच विशेष रूप से अधिकारियों द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार, नीति निर्माण में अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही पर केंद्रित होगी। यह मामला झारखंड के प्रशासनिक तंत्र में गहरी पैठ बनाए हुए भ्रष्टाचार को उजागर कर सकता है।
Jharkhand News: राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव
यह मामला केवल आर्थिक घोटाले तक सीमित नहीं है बल्कि इसके गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक निहितार्थ हैं। उच्च स्तरीय अधिकारियों की संलिप्तता के आरोप राज्य के प्रशासनिक ढांचे पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। सीबीआई की प्रवेश इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।
आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है और यह झारखंड की राजनीति पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।



