Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव एक बार फिर सामने आया है। १५ अगस्त के राजकीय कार्यक्रमों के समापन के बाद वे अपने एक दिवसीय प्रवास पर जशपुर जिले स्थित पैतृक गृहग्राम बगिया पहुंचे। सोमवार की सुबह मुख्यमंत्री पारंपरिक तरीके से बैलों की जोड़ी के साथ खेत में उतरे और हल चलाकर बियासी की प्रक्रिया पूरी की। खेत में उतरकर हल की मूठ थामे मुख्यमंत्री एक सहज किसान की भूमिका में नजर आए। उन्होंने खेती को केवल आजीविका का साधन न मानकर जीवन का संस्कार बताया और प्रदेश के सभी किसानों के कठोर परिश्रम को नमन किया। इस दौरान अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि गांव, माटी और खेतों से जुड़ाव का सुख बाकी सभी अनुभवों से अलग और मन को असीम शांति देने वाला होता है।
Chhattisgarh News: गृहग्राम बगिया में सुबह-सुबह खेत पहुंचने का क्षण
पैतृक गांव बगिया पहुंचते ही मुख्यमंत्री सुबह-सुबह सीधे खेतों की ओर निकल गए, जहां मिट्टी की सौंधी सुगंध फैली हुई थी। खेत में पारंपरिक बैलों की जोड़ी और हल पहले से तैयार था। मुख्यमंत्री ने बिना किसी झिझक के हल की मूठ थामी और बैलों को हांकते हुए बियासी का काम शुरू किया। बियासी धान की फसल के विकास के लिए की जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण पारंपरिक प्रक्रिया है, जिसमें खड़े पौधे के बीच खेत को जोता जाता है। इस दौरान वे किसी आम और मेहनती किसान की तरह काम करते दिखे। गांव के बुजुर्ग और स्थानीय नागरिक मुख्यमंत्री को इस रूप में देखकर भावुक हो गए और उन्होंने उनके इस सादगी भरे अंदाज की सराहना की।
खेत में काम करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी माटी और पैतृक खेत से जुड़ने का अनुभव बेहद खास होता है। हल पकड़ते ही बचपन और युवावस्था की तमाम स्मृतियां ताजा हो जाती हैं। खेतों के बीच बिताया गया यह समय मन को सुकून देता है और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच नई ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने बताया कि मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक तरीकों से काम करने का अनुभव इंसान को आधुनिकता के शोर से दूर अपनी वास्तविक जड़ों की ओर ले जाता है। गांव के लोगों ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कदम से युवा पीढ़ी को यह प्रेरणा मिलती है कि व्यक्ति चाहे कितने भी ऊंचे पद पर पहुंच जाए, उसे अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
किसान परिवार से आने का अनुभव और खेती को संस्कार मानना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि उनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ है और उन्होंने बचपन से ही खेती-किसानी के हर पहलू को बहुत करीब से देखा और जीया है। उनके लिए कृषि केवल रोजी-रोटी कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक शैली और संस्कार है। ग्रामीण परिवेश और खेतों ने ही उन्हें श्रम का सम्मान करना, धैर्य रखना और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर चलना सिखाया है। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे पूरे परिवार के साथ मिलकर खेतों में पसीना बहाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा हुआ करता था।
उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना बेहद जरूरी है। किसान केवल अपने परिवार के लिए फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने कड़े परिश्रम से पूरे समाज का पेट भरता है और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। मुख्यमंत्री के विचारों से साफ झलकता है कि वे कृषि को छत्तीसगढ़ की मूल पहचान और संस्कृति का आधार मानते हैं। प्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था और तीज-त्योहारों में कृषि का हमेशा से केंद्रीय स्थान रहा है।
छत्तीसगढ़ की पहचान माटी और किसानों से जुड़ी
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ की वास्तविक पहचान यहां की उपजाऊ माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं से है। पीढ़ियों से किसान अपनी मेहनत से धरती को सींचकर राज्य की प्रगति की नींव रखते आए हैं। उन्होंने किसानों को ‘अन्नदाता’ की संज्ञा देते हुए उनका आभार व्यक्त किया और उनके जीवन में खुशहाली तथा फसलों की अच्छी पैदावार की कामना की। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य का किसान समृद्ध नहीं होगा, तब तक प्रदेश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
इस अवसर पर उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कृषि केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। ग्रामीण जीवन पूरी तरह से प्रकृति और मौसम के चक्र से बंधा हुआ है। फसल की बुआई से लेकर कटाई तक के समय अलग-अलग उत्सव मनाए जाते हैं। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय कदम से किसानों के बीच यह सकारात्मक संदेश गया है कि राज्य का नेतृत्व उनके जमीनी संघर्षों और मेहनत को अच्छी तरह समझता है।
आधुनिकता के बीच परंपराओं को जीवित रखने का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि आज कृषि के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और मशीनों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन पारंपरिक तरीकों का अपना अलग महत्व और वैज्ञानिक आधार है। बैलों के माध्यम से हल चलाना मिट्टी की उर्वरता और उसकी संरचना को बनाए रखने में मददगार होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा और रोजगार के लिए शहरों का रुख जरूर करें, लेकिन अपने गांव, खेत और कृषि परंपराओं से नाता न तोड़ें।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी अपने हल चलाते हुए कुछ चित्र साझा किए, जिन्हें लोगों द्वारा काफी पसंद किया गया। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि हल की मूठ थामते ही बीते दिनों की यादें जीवंत हो गईं। इन तस्वीरों की सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हुई और आम नागरिकों ने एक मुख्यमंत्री को खेत में पसीना बहाते देखकर उनकी सरलता की तारीफ की।
किसानों की खुशहाली और कृषि विकास पर जोर
किसानों के योगदान का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, उन्नत बीज एवं खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए कई नीतिगत निर्णय लिए जा रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की योजनाओं का मूल ध्येय किसान को सम्मान और उसकी मेहनत का सही फल देना है।
खेत में बियासी करने के बाद मुख्यमंत्री ने उपस्थित स्थानीय किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए। गांव के वरिष्ठ नागरिकों ने बताया कि विष्णु देव साय बचपन से ही खेतों में इसी तरह काम करते आए हैं और पद पर पहुंचने के बाद भी उनकी सादगी में कोई बदलाव नहीं आया है।
ग्रामीण जीवन और सांस्कृतिक महत्व
छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति मुख्य रूप से कृषि गतिविधियों के आसपास केंद्रित है। हरेली, पोला और छेरछेरा जैसे प्रमुख लोक पर्व सीधे तौर पर खेती-किसानी और पशुधन से जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री ने इन पर्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये त्योहार हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञ होना सिखाते हैं। कृषि हमें यह सीख देती है कि जिस प्रकार बीज से फसल बनने में समय और धैर्य लगता है, उसी प्रकार जीवन में भी निरंतर प्रयास और धैर्य से ही सफलता मिलती है।
उन्होंने युवा किसानों को सलाह दी कि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान, जैविक खेती, जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। बगिया जैसे गांवों में आज भी पारंपरिक कृषि पद्धतियां सुरक्षित हैं, जो भावी पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक का काम कर सकती हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
मुख्यमंत्री के इस कदम की विभिन्न सामाजिक और किसान संगठनों ने मुक्तकंठ से सराहना की। किसान नेताओं का कहना था कि जब प्रदेश का मुखिया स्वयं खेत में उतरकर किसान का दर्द और मेहनत समझता है, तो इससे पूरी व्यवस्था में किसानों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है। सोशल मीडिया पर भी आम जनता ने इसे एक अनुकरणीय उदाहरण बताया जो यह संदेश देता है कि उच्च पद पर रहते हुए भी अपनी माटी के प्रति निष्ठा बनी रहनी चाहिए।
जशपुर जिले के निवासियों के लिए यह एक स्मरणीय क्षण रहा। कई शैक्षणिक संस्थानों में भी इस घटना की चर्चा हुई, जहां विद्यार्थियों को यह सीख दी गई कि श्रम का कोई विकल्प नहीं होता और अपनी जड़ों से जुड़ाव ही व्यक्ति को वास्तविक महानता प्रदान करता है।
कृषि नीति और भविष्य की दिशा
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकताओं में कृषि और ग्रामीण विकास सबसे ऊपर हैं। सरकार का ध्यान केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहकर वैल्यू एडिशन, फूड प्रोसेसिंग और एग्रो-बेस्ड उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और बाजार तक किसानों की सीधी पहुंच को मजबूत करना होगा।
अपने पैतृक खेत में बिताए इस समय ने मुख्यमंत्री को प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच एक नई ऊर्जा दी। उन्होंने कहा कि प्रकृति के करीब बिताया गया समय सोच को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाता है। यह अनुभव उन्हें निरंतर यह याद दिलाता रहता है कि शासन का मुख्य उद्देश्य अंतिम व्यक्ति, विशेषकर दिन-रात मेहनत करने वाले अन्नदाता की सेवा करना है।
युवाओं के लिए प्रेरणा और सामाजिक संदेश
मुख्यमंत्री के इस कृत्य से युवा वर्ग को एक बड़ा सामाजिक संदेश मिला है। जब कोई शीर्ष पद पर बैठा व्यक्ति खेत में काम करता है, तो इससे शारीरिक श्रम के प्रति समाज में सम्मान का भाव बढ़ता है। इससे उन युवाओं को प्रेरणा मिलती है जो कृषि को एक पिछड़े व्यवसाय के रूप में देखते थे। कई युवा किसानों ने मुख्यमंत्री से प्रेरित होकर आधुनिक और जैविक तरीकों से अपनी खेती को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचारों की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि युवा कृषि आधारित उद्यमों, कोल्ड स्टोरेज और स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं और दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।
Chhattisgarh News: माटी से जुड़े रहने का दीर्घकालिक महत्व
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपने गांव बगिया में हल चलाना केवल एक दिन का सांकेतिक कार्य नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन दर्शन को दर्शाता है। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचने के बावजूद अपनी माटी के प्रति उनका यह अनुराग अनुकरणीय है। कृषि प्रधान राज्य छत्तीसगढ़ में नेतृत्व का यह रूप जनता के भीतर विश्वास और अपनेपन की भावना को गहरा करता है।
इस पूरे वाकये ने यह सिद्ध किया है कि वास्तविक नेतृत्व वही है जो अपनी जड़ों और जनता की प्राथमिकताओं से गहराई से जुड़ा रहे। मुख्यमंत्री के इस कदम ने न केवल पुरानी यादों को ताजा किया, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों को यह भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। बगिया के खेतों में हल चलाते मुख्यमंत्री की यह छवि प्रदेश की कृषि संस्कृति और किसान सम्मान के एक सशक्त प्रतीक के रूप में याद की जाएगी।
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