Top 5 This Week

Related Posts

Uttarakhand News: उत्तराखंड में भारी बारिश से हाहाकार, कई राष्ट्रीय राजमार्ग बंद; नदियां उफान पर, भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित और कई इलाकों में पेयजल संकट गहराया

Uttarakhand News: उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में जगह-जगह हो रहे भूस्खलन और पहाड़ियों से मलबा गिरने के कारण प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों समेत दर्जनों ग्रामीण संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद हो गए हैं। कई संवेदनशील और दूरदराज के क्षेत्रों का संपर्क जिला मुख्यालयों तथा सीमावर्ती इलाकों से पूरी तरह से कट चुका है। इसके साथ ही राज्य की प्रमुख नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा लगातार मंडरा रहा है। पेयजल लाइनों में गाद भरने और मुख्य आपूर्ति नेटवर्क क्षतिग्रस्त होने के कारण कई शहरों और गांवों में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है, जिससे आने वाले दिनों में चुनौतियां और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

Uttarakhand News: पिथौरागढ़ जिले में कुदरत का कहर और सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही ठप

सीमांत जिले पिथौरागढ़ में देर रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। जिले में कुदरत के इस प्रकोप से सामान्य जीवन पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग अस्कोट और जौलजीबी के बीच स्थित बगड़ीहाट के पास भारी मलबा और बोल्डर आने के कारण बंद पड़ा हुआ है। इस मार्ग के अवरुद्ध होने से एम्बुलेंस और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों सहित दर्जनों गाड़ियां रास्ते में ही फंसी हुई हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण राहत और बचाव कार्य शुरू करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। धारचूला, बंगापानी और डीडीहाट तहसील के कई दुर्गम इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह से कट गया है। जिलेभर में करीब पच्चीस मोटर मार्ग पूरी तरह से बंद पड़े हुए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों को आवागमन के लिए पैदल रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
मुनस्यारी क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां मुख्य पेयजल लाइन बह जाने के कारण पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति किसी आपदा से कम नहीं है, क्योंकि सड़कें बंद होने के कारण राशन, दवाएं और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने में भारी देरी हो रही है। ग्रामीण इलाकों में बारिश का पानी लोगों के घरों और दुकानों में घुस गया है, जिससे फसलों और निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन लगातार गिर रहे मलबे और खराब मौसम के चलते सड़कों को खोलने के काम में काफी अड़चनें आ रही हैं।

नैनीताल में झीलों का जलस्तर बढ़ा और पर्यटन व्यवसाय पर पड़ा बुरा असर

सरोवर नगरी नैनीताल और उसके आसपास के क्षेत्रों में देर रात से जारी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। जिले के विभिन्न हिस्सों में एक दर्जन से अधिक प्रमुख सड़कें मलबा आने से बंद हो चुकी हैं। लगातार हो रही बारिश से विश्व प्रसिद्ध नैनीताल झील का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए सत्तासी फीट के पार पहुंच गया है। झील का पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के निचले इलाकों और सड़कों पर फैलने लगा है, जिससे नैनीताल के प्रसिद्ध मॉल रोड और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सड़कों पर जलभराव और मलबे के कारण स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ वहां पहुंचे पर्यटकों की आवाजाही भी पूरी तरह से ठप हो गई है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सख्त हिदायत दी है।
नैनीताल जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर मानसून की इस मार का सीधा असर स्थानीय कारोबार पर देखने को मिल रहा है। बारिश और भूस्खलन की खबरों के बाद बड़ी संख्या में पर्यटकों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है, जिससे होटल, रेस्तरां और नाव चालकों का व्यवसाय पूरी तरह से ठप पड़ गया है। झील के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग अलर्ट मोड पर हैं और जल निकासी की व्यवस्था को सुचारू बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है क्योंकि यदि बारिश का दौर यूं ही जारी रहा तो तटीय बस्तियों में पानी घुसने का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा। मौसम साफ न होने तक क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

बागेश्वर में नदियों में गाद आने से गहराया पेयजल संकट

बागेश्वर जिले में मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है, जिससे जिले के लगभग इक्कीस से अधिक संपर्क मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो चुके हैं। जिले में तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जहां अधिकतम तापमान उनतीस डिग्री और न्यूनतम तापमान इक्कीस डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों से भारी मात्रा में मिट्टी और गाद बहकर सरयू और गोमती नदियों में समा रही है। नदियों में अत्यधिक सिल्ट यानी गाद आ जाने के कारण जल संस्थान के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ठप हो गए हैं, जिससे नलों में गंदे और मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है। कई क्षेत्रों में तो पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी गई है, जिससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी का भीषण संकट पैदा हो गया है।
साफ पानी की किल्लत के कारण स्थानीय लोग प्राकृतिक स्रोतों और नौलों से पानी भरने के लिए मजबूर हैं, जहां लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। पानी की मुख्य टंकियों में गाद जमा होने से सप्लाई नेटवर्क पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। नदियों में जमा हो रही इस गाद का असर स्थानीय कृषि और मत्स्य पालन पर भी पड़ रहा है। किसानों को डर है कि खेतों में मटमैला पानी और मलबा भरने से उनकी खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। जिला प्रशासन ने जल संस्थान को टैंकरों के माध्यम से प्रभावित बस्तियों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन दुर्गम रास्तों के बंद होने से टैंकर भी समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।

ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगा लंबा जाम

चारधाम यात्रा के मुख्य प्रवेश द्वार ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कौड़ियाला और व्यासी के बीच पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा। भारी मात्रा में मलबा और विशालकाय चट्टानें गिरने से इस महत्वपूर्ण राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं, जिनमें सैकड़ों यात्री, श्रद्धालु और स्थानीय लोग फंसे हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की भारी मशीनें और जेसीबी मौके पर पहुंच तो गई हैं, लेकिन ऊपर से लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण मलबा हटाने का काम बेहद जोखिमभरा साबित हो रहा है। बारिश का सिलसिला जारी रहने से राहत कार्य की रफ्तार धीमी पड़ी हुई है।
यह राष्ट्रीय राजमार्ग न केवल बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए मुख्य मार्ग है, बल्कि चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों को रसद सामग्री पहुंचाने का भी मुख्य जरिया है। मार्ग बंद होने से चमोली और आसपास के क्षेत्रों में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुरक्षित स्थानों, ढाबों और शिविरों में ठहरने की सलाह दी है। इसके साथ ही यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि जब तक मार्ग पूरी तरह से साफ न हो जाए, तब तक वे आगे की यात्रा न शुरू करें। मौके पर सुरक्षाकर्मियों और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटा जा सके।

राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान के करीब

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जारी अविरल बारिश के कारण राज्य की तमाम छोटी-बड़ी नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी, सरयू, गोमती और काली नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं। नदियों के इस उफान से तटीय क्षेत्रों में कटाव तेज हो गया है और कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें ढह गई हैं। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखें और तटीय इलाकों में गश्त बढ़ाएं।
लगातार बारिश से पर्वतीय ढलानों की मिट्टी बेहद कमजोर हो गई है, जिससे आने वाले दिनों में और अधिक भूस्खलन होने की आशंका बनी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी जारी की है कि यदि बारिश का यह क्रम आगे भी जारी रहता है तो निचले मैदानी इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में उफनती नदियों और बरसाती नालों के पास न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर बने रहें।

प्रशासनिक राहत कार्य और आपदा प्रबंधन की तैयारी

उत्तराखंड सरकार और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हैं। आपदा परिचालन केंद्र से राज्य के सभी जिलों की स्थिति पर पल-पल की नजर रखी जा रही है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ और राज्य आपदा प्रतिवादन बल यानी एसडीआरएफ की टीमों को अत्यंत संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर दिया गया है। जिन इलाकों में सड़कें पूरी तरह से कट गई हैं, वहां हेलीकॉप्टर के माध्यम से खाद्य सामग्री, दवाएं और आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आपदा प्रभावित लोगों को तत्काल राहत राशि और सहायता उपलब्ध कराई जाए। बंद पड़े मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने के लिए अतिरिक्त मशीनें और मैनपावर लगाई जा रही हैं। इसके साथ ही जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में घायलों या मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा दी जा सके।

Uttarakhand News: मौसम विभाग का पूर्वानुमान और आने वाले दिनों की चुनौतियां

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी रखा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम के इस कड़े रुख को देखते हुए आने वाले कुछ दिन उत्तराखंड के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।
हिमालयी राज्य उत्तराखंड के लिए मानसून का मौसम हमेशा से ही प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम लेकर आता है। इस वर्ष की मानसूनी बारिश ने एक बार फिर से पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, सड़क निर्माण की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन की पहली प्राथमिकता बंद मार्गों को खोलकर जनजीवन को सामान्य बनाना और प्रभावित लोगों तक त्वरित राहत पहुंचाना है। फिलहाल पूरे प्रदेश में कुदरत का यह कड़ा इम्तिहान जारी है और सभी की नजरें मौसम के साफ होने पर टिकी हुई हैं।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles