डेस्क :दुनियाभर के ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में रेयर अर्थ का इस्तेमाल होता है. चीन दुनिया भर में रेयर-अर्थ माइनिंग का लगभग 70% और प्रोसेसिंग का लगभग 90% हिस्सा रखता है. उसकी एक्सपोर्ट पॉलिसी में किसी भी बदलाव का ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ता है.
पिछले कुछ समय से चीन, रेयर अर्थ के एक्सपोर्ट पर सख्ती करने का रुख अपना रहा था, जिसे लेकर दुनियाभर के देश डरे हुए थे. ऐसे में रेयर अर्थ मेटल्स पर लागू प्रतिबंधों में नागरिक उपयोग के लिए ढील का फैसला पूरी दुनिया के लिए राहत की बात है. आइये समझते हैं कि चीन के इस फैसले का भारत पर क्या असर होगा?

क्या होगा भारत पर असर ?
भारत के लिए चीन का ये कदम राहत देने वाला है. आम इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिलने से उन इंडस्ट्रीज को थोड़ी राहत मिली है, जो सप्लाई की भारी कमी महसूस कर रही थीं. ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट और प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर को आने वाले समय में सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है.
हालांकि चीन के इस कदम से भले ही फौरी तौर पर अभी राहत मिल जाए, लेकिन लॉन्ग टर्म में अब भी समस्या सुलझी नहीं है.क्योंकि इस पूरी घटन से ये बात तो समझ आ गया है कि चीनी रेयर-अर्थ सप्लाई पर भारत की भारी निर्भरता है और इसकी वजह से इसकी रणनीतिक कमजोरी भी दिख रही है. वैसे नागरिक इस्तेमाल के लिए मंजूरी से आने वाले समय में इंपोर्ट स्थिर हो सकता है, लेकिन उन सेक्टरों में अनिश्चितता अब भी बनी हुई है, जहां नागरिक और रक्षा एप्लीकेशन ओवरलैप होते हैं. यानी लंबे समय की सप्लाई सुरक्षा का मुद्दा अब भी अनसुलझा ही है.

हालांकि भारत चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए लगातार प्रयास में लगा हुआ है. देश में घरेलू रेयर अर्थ माइनिंग और प्रोसेसिंग में इंवेस्टमेंट के प्रयास किए जा रहे हैं. इसके साथ ही भारत, चीन के अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे दूसरे सप्लायर्स से भी साझेदारी बढ़ा रहा है.
निष्कर्ष :
चीन द्वारा रेयर अर्थ मेटल्स के नागरिक उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंधों में दी गई ढील से भारत को अल्पकालिक राहत जरूर मिली है। इससे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में सप्लाई की स्थिति कुछ हद तक सुधरने की उम्मीद है। हालांकि यह फैसला भारत की चीन पर भारी निर्भरता को भी उजागर करता है, जो रणनीतिक रूप से एक बड़ी कमजोरी है। लंबे समय में सप्लाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत को घरेलू रेयर अर्थ माइनिंग, प्रोसेसिंग क्षमताओं के विस्तार और वैकल्पिक वैश्विक सप्लायर्स के साथ साझेदारी को तेज करना होगा।



