जमशेदपुर।पलामू टाइगर रिजर्व से दलमा पहुंचा बाघ अब यहीं का निवासी बन चुका है। करीब एक महीने से वह लगातार दलमा के जंगलों में घूम रहा है। हाल ही में पिंडराबेड़ा के पास ट्रैकिंग कैमरे में उसकी नई तस्वीर कैद हुई है, जिसमें वह तंदुरुस्त नजर आ रहा है। यह पहली बार है जब बाघ की इतनी नजदीकी और स्पष्ट तस्वीर सामने आई है।
भोजन की कोई कमी नहीं, बाघ कर रहा लगातार शिकार
दो दिन पहले ही बाघ ने दलमा में एक सांड का शिकार किया था। इसकी पुष्टि वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) सबा आलम अंसारी ने की है। उन्होंने बताया कि बाघ के लिए दलमा में पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध है, इसलिए उसने यहीं अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है। विभाग द्वारा बाघ पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस निगरानी के लिए दलमा में 100 से अधिक ट्रैकिंग कैमरे लगाए गए हैं।
बाघ पर्यटकों के घूमने वाले क्षेत्र से काफी दूर रह रहा है, जिससे किसी तरह का खतरा नहीं है। वन विभाग उसकी गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए है।
बैल और मोर को भी बनाया था शिकार
यह बाघ सबसे पहले चांडिल के तुलग्राम-खूंटी के जंगलों में देखा गया था, जहां उसने एक बैल का शिकार किया था। इसके बाद वह दलमा की ओर बढ़ा और यहां आने के बाद उसने 31 दिसंबर को एक मोर का शिकार किया। कुछ समय रहने के बाद वह पश्चिम बंगाल की सीमा में चला गया था।
23 जनवरी को माकुली जंगल में उसने फिर एक बैल का शिकार किया और इसके बाद दोबारा दलमा लौट आया। अब बाघ पूरी तरह से दलमा के जंगलों में रच-बस गया है और यहां उसका स्थायी वास बन चुका है। वन विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि वह सुरक्षित रहे और साथ ही किसी को कोई नुकसान न पहुंचे।

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