Jharkhand Politics: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बुधवार को धनबाद में अपना 54वां स्थापना दिवस मनाया। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मूलवासियों के साथ साथ जो लोग बाहर से आकर झारखंड में बसे हैं वे भी स्वयं को झारखंडी कहने में गर्व महसूस करते हैं। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि झामुमो को परंपरागत रूप से मूलवासियों और आदिवासियों की पार्टी माना जाता रहा है। पार्टी के नेता अक्सर बाहर से आकर बसे लोगों को दिकू यानी शोषक कहकर संबोधित करते रहे हैं। लेकिन अब जब झामुमो पिछले सात वर्षों से सत्ता में है तो पार्टी सभी को साथ लेकर चलने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। सीएम ने अग्निवीर योजना के तहत शहीद होने वाले जवानों के परिवार को नौकरी देने की भी घोषणा की।
पालन करने वाली मां का दर्जा बड़ा होता है

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में आयोजित झामुमो के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जन्म देने वाली मां से पालन करने वाली मां का दर्जा बड़ा होता है। यह कहकर उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि झारखंड की धरती पर बाहर से आकर बसे लोग भी समान रूप से सम्मान के हकदार हैं। गौरतलब है कि 4 फरवरी 1973 को धनबाद में ही झामुमो की स्थापना हुई थी। इसलिए यह शहर पार्टी के लिए विशेष महत्व रखता है। सोरेन ने कहा कि जोहार यानी संथाली में नमस्कार सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है। पूरे देश में इस अभिवादन को सम्मान और समर्थन मिला है। लंदन में भी लोग जोहार बोल रहे हैं। यह झारखंड की संस्कृति और पहचान की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन को किया याद
मुख्यमंत्री ने अपने पिता और झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने लंबी लड़ाई लड़ी। कई ऐसे नेता थे जिन्होंने रास्ता दिखाया लेकिन वे आज हमारे बीच नहीं हैं। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहचान देश और दुनिया में आदिवासी, दलित और मजदूरों के नेता के रूप में रही है। हेमंत सोरेन ने कहा कि यह सिर्फ स्थापना दिवस नहीं है बल्कि गुरुजी के नहीं रहने का दिन भी है। यह राज्य को सजाने संवारने और उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प दिवस है। बता दें कि पिछले साल 4 अगस्त 2025 को शिबू सोरेन का निधन हो गया था। तब से यह झामुमो के लिए पहला स्थापना दिवस था जब उनके संस्थापक उनके बीच नहीं थे।
झारखंड के महान नेताओं का स्मरण
गोल्फ ग्राउंड के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए सोरेन ने कहा कि इस धरती ने कई ऐसे नेतृत्व दिए जिन्होंने दमनकारियों के सामने सीना तानकर बलिदान दिया। भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और ए के राय जैसे महान नेताओं का यह राज्य है। इनके बलिदान और समर्पण ने झारखंड को अलग पहचान दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने पूरे देश को चलाने का काम किया लेकिन यहां के लोगों को गरीबी, उत्पीड़न और अशिक्षा मिली। इसी कारण गुरुजी ने अलग राज्य का बिगुल फूंका। उन्होंने याद दिलाया कि जब अलग झारखंड राज्य का आंदोलन शुरू हुआ तब कई लोग इस मिट्टी में मिल गए। राज्य गठन के बाद तंज कसा गया कि ये भोले लोग राज्य नहीं चला सकते। लेकिन राज्य गठन के 15 से 16 साल बाद भाजपा से सत्ता छीनने का काम झामुमो ने किया।
शिक्षा और विकास पर जोर
सोरेन ने आरोप लगाया कि आज झारखंड के युवा दूसरे राज्यों से आगे रह सकते थे लेकिन राज्य को बीमारू बना दिया गया। यहां का खून चूसा गया, स्कूल बंद किए गए और गरीबों को मजबूत नहीं होने दिया गया। सामंती सोच वाले लोग यही करते रहे। उन्होंने कहा कि अबुआ सरकार बनने के बाद स्कूल दोबारा खोले गए और निजी शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर शिक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है। आज झारखंड के बच्चे विदेशों में पढ़ाई करने जा रहे हैं। हालांकि कुपोषण जैसी समस्याओं से बाहर निकलने में अभी समय लगेगा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार रांची से नहीं बल्कि गांवों से संचालित होती है। अधिकारी गांव गांव जाकर काम कर रहे हैं। गरीबी के आधार पर परिवारों को चिन्हित कर 2500 रुपए की सहायता दी जा रही है। माताओं बहनों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ाएं और उन्हें आईएएस आईपीएस जैसे बड़े पदों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करें।
स्थानीय लोगों को रोजगार पर जोर
धनबाद के महत्व पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से बाहरी लोगों को लाया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे रोजगार के अवसरों पर अपना हक सुनिश्चित करें। राज्य सरकार ने 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को नौकरी देने का कानून बनाया है। उन्होंने बताया कि 26 हजार युवाओं को नौकरी दी गई है। बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकारी नौकरी पर निर्भर न रहें बल्कि ऐसी शिक्षा लें कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफल हो सकें। रांची में कोचिंग की पढ़ाई शुरू की गई है जिसे सभी जिलों तक विस्तार देने की योजना है। यह पहल विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं लेकिन महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते।
अग्निवीरों के परिवार को मिलेगी नौकरी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि पहले देश के सुरक्षाबलों में सबसे अधिक भर्ती झारखंड से होती थी लेकिन अब अग्निवीर जैसी योजना लाई गई है। उन्होंने घोषणा की कि अग्निवीर योजना के तहत शामिल किसी जवान की मृत्यु होने पर झारखंड सरकार उसके परिवार को नौकरी देगी। यह घोषणा उन परिवारों के लिए राहत की खबर है जो अग्निवीर योजना को लेकर चिंतित थे। अग्निवीर योजना में चार साल की सेवा के बाद केवल 25 प्रतिशत जवानों को स्थायी नौकरी मिलती है। बाकी को रिटायरमेंट पैकेज के साथ छोड़ दिया जाता है। ऐसे में अगर किसी अग्निवीर की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है तो झारखंड सरकार उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देगी। यह झारखंड के युवाओं के लिए सुरक्षा कवच की तरह है।
Jharkhand Politics: विरोधियों को मौका नहीं देने का संकल्प
सोरेन ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि बड़ी मुश्किल से राज्य और सत्ता मिली है इसलिए झारखंड विरोधी ताकतों को दोबारा मौका नहीं देना है। गांव भी हमारा, शहर भी हमारा कोई कोना नहीं छोड़ना है। राजनीतिक ताकत को मजबूत करना है। निकाय चुनाव और आने वाले पंचायत चुनाव में विरोधियों को हावी नहीं होने देना है। यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। झामुमो अपने कार्यकर्ताओं को तैयार करना चाहती है ताकि स्थानीय निकाय चुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया जा सके।
झामुमो के 54वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का संदेश साफ है कि पार्टी अब केवल आदिवासियों की नहीं बल्कि झारखंड के सभी निवासियों की पार्टी बनना चाहती है।



