Devendra Mahato: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आखिरकार अपना अनशन तोड़ दिया है। रांची में लंबे समय से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे महतो ने यह फैसला जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से हुई एक अहम बातचीत के बाद लिया। वांगचुक ने फोन पर लाइव बातचीत के दौरान महतो से थोड़ा पानी पीने और अपनी सेहत का ध्यान रखने की अपील की, जिसके बाद छात्र नेता ने अपना अनशन खत्म करने का निर्णय लिया। झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी और अन्य कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य में लंबे समय से आंदोलन चल रहा है, और इसी आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो का अनशन तोड़ना एक बड़ी घटना मानी जा रही है।
Devendra Mahato: 25 जुलाई से चल रहा है सत्याग्रह आंदोलन
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के मुताबिक यह आंदोलन 25 जुलाई से लगातार जारी था। शुरुआत में यह सत्याग्रह के रूप में चल रहा था, जिसमें छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही कथित गड़बड़ियों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे। महतो ने बताया कि 2 अगस्त से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी, जिसके बाद उनकी स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती चली गई। उनके मुताबिक कई दिनों तक बिना ठोस आहार के रहने के कारण वे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और थके हुए महसूस कर रहे थे।
डॉक्टर ने दी थी अस्पताल भर्ती करने की चेतावनी
देवेंद्र नाथ महतो ने खुद बताया कि उनकी सेहत को लेकर डॉक्टरों की तरफ से लगातार चिंता जताई जा रही थी। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले ही डॉक्टर ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने पानी नहीं पिया तो उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है। महतो के अनुसार यह स्थिति काफी नाजुक हो चुकी थी, फिर भी वे अपनी मांगों को लेकर अडिग बने हुए थे और आंदोलन जारी रखने पर जोर दे रहे थे। यही वह मोड़ था जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने उनसे सीधे बातचीत करने का फैसला किया।
छात्र नेता ने बताया 26 साल पुरानी समस्या
बातचीत के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड में परीक्षा प्रणाली से जुड़ी अपनी पीड़ा भी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य में बीते 26 साल से लगातार पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिसके चलते लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। महतो के मुताबिक यही वजह है कि छात्र समुदाय अब इस मुद्दे पर स्थायी और ठोस समाधान चाहता है, ताकि भविष्य में परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे। उनका कहना था कि यही मूल कारण था जिसके चलते उन्होंने भूख हड़ताल जैसा कठोर कदम उठाने का फैसला किया था।
सोनम वांगचुक ने की पानी पीने की अपील
वीडियो कॉल के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देवेंद्र नाथ महतो से बेहद संवेदनशील अंदाज में बात की। उन्होंने कहा कि महतो को कृपया थोड़ा पानी पी लेना चाहिए, क्योंकि इस तरह भूखे-प्यासे रहना लगभग आत्महत्या जैसा कदम साबित हो सकता है। वांगचुक ने यह भी कहा कि आंदोलन को अपनी मांगें मनवाने के लिए कुछ समय की जरूरत पड़ सकती है, और यह समय दो से तीन हफ्ते तक भी खिंच सकता है। उन्होंने महतो को समझाते हुए कहा कि लंबी लड़ाई के लिए स्वस्थ रहना जरूरी है, इसलिए अपनी सेहत को दांव पर लगाना सही रणनीति नहीं मानी जा सकती।
सरकार से सही फैसले की उम्मीद जताई
बातचीत के अंत में सोनम वांगचुक ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस पूरे मसले की गंभीरता को समझेगी और छात्रों के हित में सही फैसला लेगी। उनकी यह अपील सीधे तौर पर झारखंड सरकार से जुड़ी हुई थी, जिसमें उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता के साथ मामले को सुलझाने का आग्रह किया। वांगचुक की यह बातचीत सिर्फ महतो के अनशन को खत्म कराने भर तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पूरे आंदोलन को एक नई दिशा और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का एक मजबूत मंच भी दिया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और छात्रों की मांगें
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर असंतोष कोई नया मुद्दा नहीं है। जेपीएससी और जेएसएससी जैसी परीक्षाओं में बार-बार सामने आई कथित गड़बड़ियों ने राज्य के लाखों प्रतियोगी छात्रों के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है। इसी असंतोष के चलते छात्रों ने रांची में लगातार धरना और प्रदर्शन जारी रखा हुआ है। देवेंद्र नाथ महतो का अनशन इसी बड़े आंदोलन का एक अहम हिस्सा था, जिसने राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जैसे जाने-माने चेहरे का इस मुद्दे में शामिल होना दिखाता है कि यह आंदोलन अब स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है।
Devendra Mahato: आगे की राह और छात्रों की उम्मीदें
अनशन टूटने के बाद अब सबकी निगाहें झारखंड सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। छात्र संगठन उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर ठोस घोषणा करेगी, ताकि भविष्य में इस तरह के आंदोलन की नौबत ही न आए। हालांकि देवेंद्र नाथ महतो का अनशन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उनकी मूल मांगें अब भी पूरी तरह से बरकरार हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मसले पर क्या ठोस कदम उठाती है और छात्रों को कब तक न्याय मिल पाता है।
देवेंद्र नाथ महतो का अनशन तोड़ना झारखंड के परीक्षा सुधार आंदोलन में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। सोनम वांगचुक की संवेदनशील अपील ने न सिर्फ एक छात्र नेता की जान बचाने में मदद की, बल्कि इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर भी पहुंचाया। अब पूरे राज्य की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि छात्रों की मांग अब भी जस की तस बनी हुई है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता कितनी जरूरी है, और जब तक ठोस सुधार नहीं होते, तब तक छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल हो पाना मुश्किल है।
Read More Here:-
- Aaj Ka Rashifal 5 August 2026: फैसलों में आज दिखेगा सफलता का रास्ता, पढ़ें सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल
- Mitchell Starc Vs Kapil Dev: टेस्ट क्रिकेट में इतिहास रचने की दहलीज पर मिचेल स्टार्क, कपिल देव का रिकॉर्ड खतरे में
- Odisha Investment Roadshow: नई दिल्ली रोडशो में शामिल होंगे ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी, 7 और 8 अगस्त को बड़े उद्योगपतियों से होगी मुलाकात
- UPPSC Exam New Rules: हर परीक्षा कक्ष में जैमर, आधार से जुड़ेगा OTR, भर्ती प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल


