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JPSC JSSC Protest Ranchi: झारखंड में परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो

JPSC JSSC Protest Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के विरोध में छात्रों का आक्रोश अब सड़कों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। चौदहवीं जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले नौ दिनों से छात्रों का सत्याग्रह धरना उग्र रूप लेता जा रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब छात्रों का मनोबल बढ़ाने और अपनी मांगों को मनवाने के लिए प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए।

प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई या ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों से स्वतंत्र जांच कराने की जिद पर अड़े हुए हैं। हालांकि राज्य सरकार ने सीआईडी जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन छात्र इस आंतरिक जांच से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस छात्र आंदोलन को अपना खुला समर्थन देने की घोषणा कर दी है, जिससे इस पूरे प्रकरण को एक नया राजनीतिक मोड़ मिल गया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले ये युवा दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और किसान परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जिनका भविष्य इन आयोगों की लापरवाही के कारण अधर में लटका हुआ है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षाओं में होने वाली धांधलियों से उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया जाता है और योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन होता है। आंदोलन को समर्थन देने के लिए अब विभिन्न जिलों के छात्र भी रांची पहुंचने लगे हैं, जिससे यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे एक बड़ा जन आंदोलन बनता जा रहा है। सरकार और प्रशासन के स्तर पर इस मामले को शांत करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन छात्रों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

JPSC JSSC Protest Ranchi: परीक्षाओं में कथित धांधली और छात्रों का बढ़ता आक्रोश

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उपजा यह विवाद पिछले महीने तब शुरू हुआ जब चौदहवीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे घोषित किए गए। परिणामों के सामने आते ही छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाना शुरू कर दिया।

पांच जुलाई से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन देखते ही देखते एक बड़े सत्याग्रह में बदल गया, जिसमें राज्यभर के हजारों युवा शामिल हो चुके हैं। छात्रों का कहना है कि वे महीनों और सालों तक कठिन परिश्रम करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसी घटनाएं उनके सपनों को चकनाचूर कर देती हैं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने न केवल धरने का रास्ता चुना बल्कि अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए राज्यपाल से मुलाकात और पुतला दहन जैसे लोकतांत्रिक तरीके भी अपनाए। मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठकों और सबूत सौंपने के बाद भी जब छात्रों को संतोषजनक परिणाम नहीं मिले, तो उन्होंने अपने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया।

वर्तमान स्थिति यह है कि राज्य के विभिन्न जिलों से आए छात्र कचहरी चौक और जयपाल सिंह स्टेडियम में एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। युवाओं का साफ कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती और परीक्षाएं दोबारा पारदर्शी तरीके से नहीं कराई जातीं, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल और समर्थन

आंदोलन को निर्णायक मोड़ देते हुए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने धरना स्थल पर ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान कर दिया। उनका यह कदम सरकार और चयन आयोगों के सुस्त रवैये के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार और आयोगों की उदासीनता राज्यभर के युवाओं का मनोबल तोड़ रही है, जिसे बनाए रखने के लिए उन्होंने अन्न और जल का त्याग करने का फैसला किया है। इस भूख हड़ताल के शुरू होने के बाद से धरना स्थल पर छात्रों का जोश और अधिक हाई हो गया है और वे पूरी एकजुटता के साथ अपने नेता के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं।

झारखंड के कोने-कोने से लोग और विभिन्न छात्र संगठन इस भूख हड़ताल और धरने को समर्थन देने के लिए आगे आ रहे हैं। स्थिति यह है कि कई जगहों से आम नागरिक और स्थानीय लोग प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए खाने-पीने की सामग्री और अन्य जरूरी चीजें भेजकर इस संघर्ष में अपना योगदान दे रहे हैं। छात्रों का यह आपसी भाईचारा और समर्थन इस बात का प्रमाण है कि यह लड़ाई अब केवल कुछ चुनिंदा युवाओं की नहीं बल्कि पूरे राज्य के छात्र समुदाय के अस्तित्व की बन चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है, क्योंकि आंदोलनकारी किसी भी सूरत में अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

JPSC JSSC Protest Ranchi: कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन और राजनीतिक सरगर्मी

इस छात्र आंदोलन को उस समय एक बड़ा राजनीतिक आयाम मिला जब कॉकरोच जनता पार्टी ने खुलकर इन प्रदर्शनकारी युवाओं का पक्ष लिया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वीडियो कॉल के माध्यम से रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में बैठे छात्रों से सीधा संवाद किया और उनकी सभी मांगों का पुरजोर समर्थन किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी झारखंड के हर एक छात्र के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी लड़ाई में उनका पूरा साथ देगी। इस राजनीतिक समर्थन के मिलने से छात्रों का मनोबल और अधिक ऊंचा हो गया है और उनकी आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर भी गूंजने लगी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले का समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन सकता है। विपक्षी दल भी पहले से ही सरकार को रोजगार और परीक्षा प्रणाली के मुद्दे पर घेरने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में छात्रों के साथ यह नया जुड़ाव माहौल को और अधिक गर्मा रहा है। छात्रों ने शाम के वक्त मशाल जुलूस निकालकर अपनी ताकत का अहसास कराया और अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च किया। इस दौरान उन्होंने अपने शरीरों और हाथों पर बैनर-पोस्टर चिपकाकर अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया, जिससे प्रशासन की नींद उड़ना स्वाभाविक है।

JPSC JSSC Protest Ranchi: केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग और भविष्य की राह

प्रदर्शनकारी छात्रों की सबसे प्रमुख और शुरुआती मांगों में चौदहवीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह से रद्द करना शामिल है। इसके अलावा वे विवादित परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित की गई जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल और अन्य सभी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पूरे मामले की जांच सीआईडी से कराने के आदेश दे चुके हैं, लेकिन छात्रों का भरोसा राज्य स्तर की जांच एजेंसियों पर नहीं है। उनकी मांग है कि इन तमाम कथित गड़बड़ियों की तह तक जाने के लिए सीबीआई या ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों से स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

छात्रों का यह भी तर्क है कि जब तक इस भ्रष्टाचार में संलिप्त आयोग के अध्यक्ष, जिम्मेदार सदस्य और अन्य कर्मचारी बर्खास्त नहीं किए जाते, तब तक न्याय की उम्मीद करना बेमानी है। वे चाहते हैं कि भविष्य में होने वाली सभी परीक्षाओं के लिए एक सख्त और पारदर्शी नीति बनाई जाए ताकि किसी भी युवा के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार छात्रों की इन मांगों पर क्या और कितना त्वरित निर्णय लेती है। युवाओं का यह हुजूम यह साबित करता है कि अब राज्य का जागरूक छात्र अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सचेत हो चुका है और वह अन्याय के खिलाफ चुप बैठने वाला नहीं है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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