Shivvas in Sawan 2026: हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भगवान शिव की पूजा और विशेष रूप से रुद्राभिषेक का अत्यंत धार्मिक महत्व माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि तिथियों और काल की गणना के आधार पर महादेव का निवास स्थान बदलता रहता है। रुद्राभिषेक जैसा विशेष अनुष्ठान शुरू करने से पहले ज्योतिषी और पंडित ‘शिववास’ की गणना जरूर करते हैं।
सामान्य दिनों में रुद्राभिषेक कराने से पहले यह देखना आवश्यक होता है कि उस विशिष्ट दिन भगवान शिव कहां विराजमान हैं। हालांकि, पवित्र सावन माह की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या इस पूरे महीने भी अभिषेक करने से पहले शिववास देखना अनिवार्य है या नहीं।
Shivvas in Sawan 2026: क्या होता है शिववास और क्यों देखा जाता है इसका निवास?
धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव समय-समय पर अलग-अलग स्थानों पर विराजमान रहते हैं। शिववास की गणना पंचांग की तिथियों के आधार पर की जाती है।
ऐसा माना जाता है कि जब महादेव शुभ स्थानों पर विराजमान होते हैं, तब किया गया रुद्राभिषेक अत्यंत मनोवांछित फल प्रदान करता है। वहीं अशुभ स्थानों पर शिववास होने पर अभिषेक करने से बचना चाहिए।
इन शुभ स्थानों पर शिववास होने पर रुद्राभिषेक देता है मनचाहा फल
जब भगवान शिव देवी गौरी के साथ विराजमान होते हैं, उस समय रुद्राभिषेक करने से घर-परिवार में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।
कैलाश पर्वत पर शिववास होने के दौरान अभिषेक करने से सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जब शिव नंदी पर सवार होते हैं या विराजमान होते हैं, उस समय पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।
किन स्थानों पर शिववास रहने पर रुद्राभिषेक करने से बचना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, यदि शिववास श्मशान में हो तो उस समय रुद्राभिषेक करने से जीवन में भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसी तरह जब शिवजी किसी सभा में उपस्थित हों, ध्यान में हों, रात्रि भोजन कर रहे हों या कार्य व क्रीड़ा में व्यस्त हों, तब अभिषेक करने से मानसिक पीड़ा और कठिनाइयां मिल सकती हैं।
क्या पवित्र सावन महीने में भी शिववास देखना अनिवार्य है?
गोरखपुर के प्रसिद्ध विद्वान पंडित सुजीत जी महाराज के अनुसार, सावन के पवित्र महीने में रुद्राभिषेक कराने के लिए शिववास का विचार करना बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं होता है।
ऐसी मान्यता है कि सावन के पूरे महीने भगवान शिव स्वयं पृथ्वीलोक पर ही निवास करते हैं। इस दौरान महादेव अत्यंत प्रसन्न और कृपालु मुद्रा में रहते हैं, इसलिए सावन में किसी भी दिन बिना संकोच के रुद्राभिषेक किया जा सकता है।
Shivvas in Sawan 2026: ज्योतिर्लिंग और सावन के अलावा अन्य दिनों के नियम
यदि कोई श्रद्धालु किसी भी ज्योतिर्लिंग पर जाकर रुद्राभिषेक कराता है, तो वहां भी शिववास देखने की कोई आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि ज्योतिर्लिंगों पर शिव का नित्य वास माना गया है।
हालांकि, सावन के महीने और ज्योतिर्लिंगों को छोड़कर यदि आप साल के अन्य आम दिनों में अपने घर या मंदिर में रुद्राभिषेक करा रहे हैं, तो शिववास का सही ज्ञान होना बेहद आवश्यक है।
सावन का महीना भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे पावन अवसर माना जाता है। चूंकि इस पूरे माह महादेव पृथ्वी लोक पर ही विराजमान रहकर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं, इसलिए सावन में बिना किसी हिचकिचाहट या शिववास की चिंता किए किसी भी दिन रुद्राभिषेक कराया जा सकता है। धार्मिक विद्वानों और शास्त्रों के अनुसार, सावन में की गई शिव पूजा अक्षय पुण्य प्रदान करती है और साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आती है।
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