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Jharkhand Student Protest: जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, अभिजीत दीपके ने दिया समर्थन

Jharkhand Student Protest: झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों के खिलाफ आक्रोशित युवाओं का आंदोलन अब तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग की चौदहवीं परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर सैकड़ों छात्र पिछले पांच दिनों से राजधानी रांची के एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारी छात्र इन सभी विवादित परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने और भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर सुधार किए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। छात्रों के इस बड़े आंदोलन को अब राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है, जिससे यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने भी आंदोलनरत छात्रों से संपर्क साधकर उन्हें अपना पूरा समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान किया है।

युवाओं के इस कड़कते आंदोलन ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को भी काफी तेज कर दिया है क्योंकि छात्र केवल परीक्षाओं को रद्द करने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग उठा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पूर्व में की गई सीआईडी जांच के आदेश को छात्रों ने खारिज कर दिया है और उनकी मांग है कि पिछले सात वर्षों में हुई सभी प्रमुख परीक्षाओं की पारदर्शी केंद्रीय जांच कराई जाए। आंदोलन के पांचवें दिन छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप लेता दिखाई दे रहा है, क्योंकि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ने की भी खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में प्रशासन और सरकार के सामने इन नाराज युवाओं को शांत करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

Jharkhand Student Protest: कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दीपके का छात्रों को समर्थन और झारखंड दौरा

झारखंड के इन परीक्षाओं में कथित घोटालों के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने हाल ही में वीडियो कॉल के माध्यम से प्रदर्शनकारी छात्रों से लंबी बातचीत की और उनकी मांगों को पूरी तरह जायज ठहराया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी इस कठिन समय में झारखंड के युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें अपने संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि फिलहाल उन्हें टायफॉइड की समस्या है, जिसकी वजह से उन्हें यात्रा करने में कुछ कठिनाई हो रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि जैसे ही उनकी सेहत में सुधार होगा, वह जल्द ही रांची पहुंचकर सीधे तौर पर इस आंदोलन में शामिल होंगे।

छात्रों के साथ इस डिजिटल संवाद के दौरान नेताओं और युवाओं के बीच हुए संवाद ने आंदोलन में एक नया जोश भर दिया है। लगातार पांच दिनों से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं करती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के क्षेत्रीय मुद्दों पर बाहरी और अन्य दलों के नेताओं का हस्तक्षेप आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल को और अधिक बढ़ा सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार इन आंदोलित युवाओं से बातचीत करने के लिए कौन सा नया माध्यम चुनती है।

क्या हैं प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें और क्यों उठ रही सीबीआई जांच की मांग

राजधानी के स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों की मांगें बेहद स्पष्ट और सख्त हैं, जिनका समाधान वे किसी भी कीमत पर चाहते हैं। छात्रों का मुख्य आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग की चौदहवीं प्रारंभिक परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और इसकी ओएमआर शीट तक लीक होने के गंभीर मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से जुड़ी उन सभी परीक्षाओं को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए जिन पर गड़बड़ी के दाग लगे हैं। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि टीडीपीएल और अभय तिवारी से जुड़े तमाम परीक्षा मामलों की निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि असली दोषियों को बेनकाब किया जा सके। छात्रों का आरोप है कि राज्य प्रशासन इस पूरे गंभीर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और पिछले कई वर्षों से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए जेपीएससी अभ्यर्थी राहुल कुमार क्रांति ने मीडिया के सामने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में घोषित की गई सीआईडी जांच पर से उनका पूरा भरोसा उठ चुका है क्योंकि पिछली बार भी ऐसी जांच के बाद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया था। अभ्यर्थियों का यह भी तर्क है कि पिछले सात वर्षों के दौरान आयोजित की गई तमाम प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में जिस प्रकार से अनियमितताएं पाई गई हैं, उनकी स्वतंत्र और पारदर्शी जांच केवल सीबीआई ही कर सकती है। छात्रों के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी आधे-अधूरे आश्वासन से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं और वे अपनी मांगों पर पूरी दृढ़ता के साथ डटे हुए हैं।

Jharkhand Student Protest: राजनीतिक सरगर्मी और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग से बढ़ा दबाव

इस छात्र आंदोलन ने अब केवल प्रशासनिक अमले तक सीमित न रहकर एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जहां सीधे तौर पर सरकार के मुखिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। धरモ प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग तक कर डाली है, जिससे राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। विपक्ष के विभिन्न दलों के नेता भी इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं और युवाओं के इस संघर्ष को समर्थन दे रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते राज्य के युवाओं को न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है। प्रशासन की ओर से हालांकि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति किसी भी स्तर पर हाथ से न निकले।

राज्य के युवाओं का यह आक्रोश इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि रोजगार और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली अब सबसे बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। जेपीएससी और जेएसएससी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की परीक्षाओं में बार-बार इस तरह की तकनीकी और प्रशासनिक चूक सामने आना पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। जैसे-जैसे प्रदर्शन के दिन बढ़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे छात्रों का यह सामूहिक संकल्प और अधिक मजबूत होता जा रहा है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इस गंभीर गतिरोध को तोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है और कब तक इन नाराज युवाओं की चिंताओं का कोई संतोषजनक समाधान निकाला जाता है।

झारखंड में चल रहा यह छात्र आंदोलन अब केवल कुछ परीक्षाओं की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक ढांचे में सुधार की एक बड़ी मांग बन चुका है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और धरने पर बैठे युवाओं का संघर्ष यह साबित करता है कि वे अपने भविष्य को लेकर कितने चिंतित और दृढ़संकल्पित हैं। विभिन्न राजनीतिक चेहरों का इस आंदोलन से जुड़ना इसे एक व्यापक मंच प्रदान कर रहा है, जिससे सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई का भरोसा नहीं दिलाया गया, तो यह असंतोष राज्य भर में फैल सकता है। पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा प्रणाली ही इन युवाओं के गुस्से को शांत करने का एकमात्र और सबसे प्रभावी रास्ता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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