Jharkhand News: उम्मीदों पर खरी उतरने वाली झारखंड की पहली आठ लेन सड़क अब बार-बार धंसने से लोगों के लिए खतरे का सबब बन गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा अक्टूबर 2024 में उद्घाटन के महज 24 घंटे बाद पहली बार धंसने वाली यह सड़क अब तक आठ बार ऐसी घटना का शिकार हो चुकी है। नवीनतम घटना में झारखंड मोड़ के निकट सर्विस लेन में बड़ा गड्ढा बन गया, जिससे स्थानीय लोग दहशत में आ गए और कई वाहन बाल-बाल बचे।
झारखंड मोड़ पर 8 फीट गहरा गड्ढा, पानी के रिसाव ने बढ़ाई दहशत

मंगलवार को धनबाद के झारखंड मोड़ से 99 कोयलांचल सिटी के बीच सर्विस लेन में अचानक सड़क धंस गई। गड्ढा लगभग तीन फीट चौड़ा और आठ फीट गहरा था। सड़क के नीचे पानी भरने से स्थिति और गंभीर हो गई। स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और दोपहिया वाहन चालकों को जोखिम उठाना पड़ा।
सड़क निर्माण स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड (साज) के तहत हुआ था। इस हिस्से का काम त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया। डीजीएम साज संजय कुमार सिंह ने बताया कि सड़क के नीचे पेयजल विभाग की मेन राइजिंग पाइपलाइन गुजरती है। कई बार बिना वाल्व नियंत्रित किए पानी का अधिक प्रेशर देने से ऐसी समस्या उत्पन्न होती है। इस मुद्दे पर विभागों के बीच बैठकें हो चुकी हैं और दोबारा चर्चा की जाएगी।
मरम्मत कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया है, लेकिन बार-बार घटनाएं निर्माण और रखरखाव की कमियों को उजागर कर रही हैं।
उद्घाटन के 24 घंटे बाद से ही शुरू हुआ धंसने का सिलसिला
यह 20 किलोमीटर लंबी आठ लेन सड़क गोल बिल्डिंग से काकों मठ तक फैली है। इसका उद्घाटन पांच अक्टूबर 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऑनलाइन किया था। निर्माण दो कंपनियों को सौंपा गया था। बिनोद बिहारी महतो चौक से काकों मठ तक 9.30 किलोमीटर हिस्सा त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन ने बनाया, जबकि गोल बिल्डिंग से बिनोद बिहारी महतो चौक तक 11.70 किलोमीटर शिवालय कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पूरा किया।
उद्घाटन के तुरंत बाद असर्फी अस्पताल के सामने पहली बार सड़क धंसी। 2024 में ही भूली ओवरब्रिज से बिनोद बिहारी चौक तक चार बार गड्ढे बने। मेमको मोड़ के पास भी समस्या आई। सितंबर 2025 में राजा तालाब के पास मेन राइजिंग पाइपलाइन फटने से बड़ा गड्ढा बना। अब 2026 में झारखंड मोड़ के पास फिर धंसाव।
यह परियोजना राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल थी, जो धनबाद की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए बनाई गई। लेकिन बार-बार धंसने से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
मौत का जाल बनी सड़क, यात्रियों और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश
यह सड़क धनबाद के प्रमुख मार्गों को जोड़ती है, जिससे हजारों लोग रोजाना इससे गुजरते हैं। बार-बार गड्ढे बनने से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। पहले घटनाओं में आवागमन कई दिनों तक रोका गया था। नवीनतम घटना में दोपहिया वाहन गिरते-गिरते बचे, लेकिन बड़ा हादसा होने पर जान-माल का नुकसान हो सकता था।
स्थानीय निवासियों में आक्रोश है। दैनिक यात्रा प्रभावित होने से समय और ईंधन की बर्बादी हो रही है। व्यापार और परिवहन पर भी असर पड़ रहा है। निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने से सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
पाइपलाइन प्रेशर या घटिया निर्माण सामग्री? जांच की मांग तेज
इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी बार-बार धंसाव की मुख्य वजह निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, मिट्टी की जांच में कमी या भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर का सही प्रबंधन न होना है। पेयजल पाइपलाइन का उच्च प्रेशर सड़क की बुनियाद को कमजोर कर सकता है।
संजय कुमार सिंह, डीजीएम साज ने कहा कि पेयजल विभाग के साथ समन्वय की कमी एक बड़ा कारण है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सड़क के नीचे की सभी यूटिलिटी लाइनों का सही मैपिंग और नियमित निरीक्षण जरूरी है। निर्माण कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।
स्थानीय इंजीनियरों के अनुसार, विश्व बैंक फंडेड परियोजनाओं में उच्च मानक होने चाहिए, लेकिन रखरखाव न होने से समस्या बढ़ती है।
मरम्मत के साथ-साथ स्ट्रक्चरल ऑडिट की आवश्यकता
साज ने तुरंत मरम्मत शुरू कर दी है। पेयजल विभाग के साथ दोबारा बैठक प्रस्तावित है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरी सड़क की स्ट्रक्चरल ऑडिट कराई जाए। पाइपलाइन प्रेशर नियंत्रण के लिए ऑटोमेटिक वाल्व सिस्टम लगाया जा सकता है।
लोगों को सलाह है कि प्रभावित हिस्सों से बचें और वैकल्पिक मार्ग अपनाएं। सरकार को पारदर्शी जांच करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
Jharkhand News: निष्कर्ष
धनबाद की यह आठ लेन सड़क विकास की मिसाल बननी थी, लेकिन बार-बार धंसने से यह गुणवत्ता और जवाबदेही की कमी का प्रतीक बन गई है। सरकार को तत्काल जांच, पारदर्शी रिपोर्ट और मजबूत रखरखाव योजना लागू करनी होगी। केवल मरम्मत से नहीं, बल्कि मूल कारणों को दूर करके ही यात्रियों का भरोसा बहाल हो सकता है। सार्वजनिक धन और सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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